You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
अविमुक्तेश्वरानंद के ख़िलाफ़ बाल यौन शोषण मामले में एफ़आईआर, हाल ही में क्यों थे चर्चा में
उत्तर प्रदेश पुलिस ने ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के अलावा 2-3 अज्ञात लोगों पर बाल यौन शोषण के आरोपों में एफ़आईआर दर्ज की है.
प्रयागराज की पॉक्सो कोर्ट ने शनिवार को झूंसी पुलिस स्टेशन के एसएचओ को निर्देश दिए थे कि वो लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम यानी पॉक्सो क़ानून की धाराओं के तहत इन अभियुक्तों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज करे.
पॉक्सो कोर्ट के एडिशनल सेशन जज विनोद कुमार चौरसिया ने अपने आदेश में पुलिस से कहा था कि वो पॉक्सो एक्ट के तहत निष्पक्ष रूप से इस मामले की जांच करे.
साथ ही कोर्ट ने सर्वाइवर की पहचान और सम्मान की सुरक्षा करने का भी आदेश दिया था. इसके अलावा कोर्ट ने कहा है कि इन निर्देशों को तुरंत पूरा करते हुए कोर्ट को बताया जाए.
बीबीसी हिंदी के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
शंकराचार्य ने इस फ़ैसले पर क्या कहा?
कोर्ट के इस आदेश के बाद शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने दावा किया है कि यह मामला झूठा है.
उन्होंने कहा, "हमारे ख़िलाफ़ दर्ज किए गए झूठे केस की सच्चाई सबके सामने आ जाएगी और दोषियों को सज़ा मिल सकेगी. इसलिए केस दर्ज होना और आगे की जांच होना ज़रूरी है."
"कोर्ट को इस पर जल्दी काम करना चाहिए और ज़्यादा समय नहीं लेना चाहिए, क्योंकि बहुत लोग इस मामले को देख रहे हैं. गवाही दर्ज हो और जल्द फ़ैसला लिया जाए. जो ग़लत है वह ग़लत ही रहेगा, जो झूठा केस दर्ज किया गया है वह आख़िरकार झूठा साबित होगा."
वहीं अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के ख़िलाफ़ शिकायत की मांग वाली याचिका लेकर कोर्ट गए शख़्स का भी बयान सामने आया है.
उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, "अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद के ख़िलाफ़ एफ़आईआर करने का आदेश दिया है. प्रथम दृष्ट्या हमें न्याय मिला है. छोटे बच्चों के साथ अविमुक्तेश्वरानंद कुकर्म करते थे, लैंगिक अपराध करते थे. कोर्ट ने उन साक्ष्य की जांच करने के भी आदेश दिए हैं, जो हमने दिए थे."
योगी और अविमुक्तेश्वरानंद के बीच तकरार
इसी साल जनवरी में उत्तराखंड के ज्योतिर्मठ के प्रमुख स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में एक विवाद की वजह से चर्चाओं में थे.
अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के अवसर पर संगम में स्नान करने जा रहे थे.
इस दौरान उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से रोके जाने के बाद वो धरने पर बैठ गए थे. वो पहले मांग कर रहे थे कि दोषी अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाए तभी वो स्नान करेंगे.
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने 28 जनवरी को ये घोषणा की कि वो इस माघ मेला में स्नान नहीं करेंगे और उन्हें दुखी मन से मेले से जाना पड़ रहा है.
उन्होंने मीडिया को जारी बयान में ये दावा किया है कि इतिहास में पहली बार हुआ है कि कोई शंकराचार्य बिना स्नान किए मेला छोड़कर गए हों.
इसको लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक्स पर पोस्ट करके इसके लिए भारतीय जनता पार्टी को ज़िम्मेदार ठहराया था.
हालाँकि इस मामले में बीजेपी की तरफ़ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई थी. लेकिन प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने उनसे स्नान करने की अपील की थी.
मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने इस मामले में किसी का नाम लिए बिना कहा कि 'कुछ लोग कालनेमि' हैं.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह बयान हरियाणा के सोनीपत में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दिया था.
उन्होंने कहा था, ''ऐसे तमाम कालनेमि होंगे, जो धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमज़ोर करने की साज़िश रच रहे होंगे. हमें उनसे सावधान होना होगा. हमें उनसे सतर्क रहना होगा.''
योगी आदित्यनाथ ने 14 फ़रवरी को यूपी विधानसभा में कहा था कि 'हर कोई शंकराचार्य नहीं बन सकता' है.
उन्होंने राज्य में 'क़ानून के शासन' पर ज़ोर देते हुए कहा था कि कोई भी व्यक्ति किसी पीठ के आचार्य के रूप में कहीं भी 'वातावरण ख़राब नहीं कर सकता'.
इस पर अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा था, "नजीर है, आदित्यनाथ के ऊपर 40 से ज़्यादा मुक़दमे थे और जब वह मुख्यमंत्री बने तो सभी मुक़दमे अपने ऊपर से हटवा लिए. ये कैसा क़ानून का पालन है? ये क्या क़ानून में लिखा है कि अगर कोई भी व्यक्ति बड़े पद पर पहुंच जाएगा तो उसके ऊपर से सारे मुक़दमे हटा लिए जाएंगे? ये कहां लिखा है?"
उन्होंने कहा, "उत्तर प्रदेश की विधानसभा में खड़े होकर आपने ये कहा है कि मैं क़ानून का पालन करने वाला हूं. अगर आप क़ानून का पालन करने वाले हैं तो 45 केस और उनका कोर्ट में सामना करिए."
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.