सोना ख़रीदने जा रहे हैं, जरा ठहरिए... क्या गोल्ड में निवेश के ये तरीके जानते हैं?
क्या आपको पता है, दुनिया में कुल गोल्ड भंडार का 11फ़ीसदी भारत में है, फिर भी हमारे देश में गोल्ड को लेकर दीवानगी कम नहीं है.
भारत में सोना सिर्फ़ निवेश के लिए ही नहीं ख़रीदा जाता है बल्कि इसके सामाजिक और सांस्कृतिक कारण भी हैं.
हाल के सालों में सोने में निवेश करने का चलन बढ़ा है. शेयर बाज़ारों में उठापटक और अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता की चिंताओं की वजह से कई बार निवेशक सोने में निवेश को सुरक्षित मानते हैं.
हाल के समय में, सोने की कीमतों में लगातार तेज़ी आई है.
भारत में सबसे अधिक क्रेज गोल्ड का है. बस लोगों को मौके का इंतज़ार रहता है, चाहे नवरात्रि हों, करवाचौथ हो, धनतेरस हो, दिवाली हो या फिर किसी की सालगिरह. तोहफ़े में देने के लिए गोल्ड को सबसे अच्छा मानने वालों की कमी नहीं है.

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सोने में निवेश के तरीके
गोल्ड में इनवेस्टमेंट की बात आती है तो सबसे पहले दिमाग में आती है ज्वैलरी. लेकिन बाज़ार में गोल्ड ख़रीदने के लिए ज्वैलरी के अलावा भी कई दूसरे तरीके भी मौजूद हैं.
पहले बात ज्वैलरी की, ये गोल्ड में इनवेस्टमेंट करने का सबसे आसान तरीका है. लेकिन ज्वैलरी खरीदने में कुछ नुक़सान हैं तो कुछ फ़ायदे भी हैं.
तो पहले बात फ़ायदे की... फ़ायदा ये है कि ज्वैलरी यानी गहने आप इस्तेमाल कर सकते हैं. मतलब ये केवल इनवेस्टमेंट नहीं है बल्कि कुछ मामलों में तो ये स्टेट्स सिंबल तक बन गया है.
लेकिन नुक़सान ये है कि जब भी आप इस तरह से सोना ख़रीदते हैं तो आपको मेकिंग चार्ज चुकाना होता है, जो 10 फ़ीसदी से अधिक हो सकता है. ज्वैलरी ख़रीदेंगे तो 3 फ़ीसदी जीएसटी भी देना होगा. बहुत ज्वैलरी हो जाएगी तो तिजोरी लेनी होगी या फिर लॉकर भी लेना होगा और अगर बहुत-बहुत ज्वैलरी हो गई है तो इसकी सुरक्षा के लिए गार्ड भी रखना पड़ सकता है.

फिजिकल गोल्ड
इस तरीके से सोने के सिक्के या बार ख़रीद सकते हैं.
इसमें मेकिंग चार्ज नहीं देना होता है, शुद्धता की गारंटी होती है. हर सोने का सिक्का बीआईएस यानी भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा हॉलमार्क किया जाता है.
यह सिक्के ज्वैलर्स, बैंक, और ई-कॉमर्स वेबसाइट्स पर उपलब्ध होते हैं. हालाँकि इस तरीके से गोल्ड में निवेश का नुक़सान ये है कि 3 फ़ीसदी जीएसटी देना होगा और ज्यादा सिक्के ख़रीद लिए तो सुरक्षित रखने का ठिकाना भी ढूँढना होगा.
डिजिटल गोल्ड

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इस तरीके में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए गोल्ड खरीद सकते हैं.
कई पेमेंट्स एप्स मौजूद हैं जहाँ से डिजिटल गोल्ड ख़रीद सकते हैं.
इस ऑप्शन की सबसे अच्छी बात ये हैं कि गोल्ड खरीदने के लिए बड़ी रकम की जरूरत नहीं होती, 50 या 100 रुपये से भी सोना खरीदना शुरू कर सकते हैं. यानी डिजिटल गोल्ड ख़रीदने का फ़ायदा यह है कि इसे छोटे-छोटे हिस्सों में खरीदा और बेचा जा सकता है.
इसमें भी 3 फ़ीसदी की जीएसटी लगेगी, लेकिन फ़ायदा ये है कि प्योरिटी की गारंटी होती है, चोरी नहीं होता और स्टोरेज का चार्ज नहीं देना होता.

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सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड
भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) सॉवरन गोल्ड बॉन्ड जारी करता है और इसकी एक तय क़ीमत होती है.
सरकार द्वारा जारी किए गए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड गोल्ड में निवेश करने का एक अच्छा विकल्प है. सरकार की गारंटी है, इसलिए पैसा डूबने का जोखिम नहीं. सोने के दाम बढ़ने का लाभ तो मिलेगा ही, साथ ही आपको एक निश्चित ब्याज भी मिलता है.
एसजीबी आठ साल में मैच्योर होता है. मतलब आठ साल बाद सोने का जो भाव होगा उसके अनुसार बॉन्ड वापस करने पर आपको उतनी रक़म मिल जाएगी. साथ ही उस समय मिलने वाले लाभ पर इनकम टैक्स भी नहीं लगता है.
जैसे आपने एक लाख के बॉन्ड ख़रीदे थे और वापस करने पर डेढ़ लाख मिले तो उस अतिरिक्त 50 हज़ार पर कोई टैक्स नहीं लगेगा.
सरकार समय-समय पर नए बॉन्ड्स की बिक्री के लिए एक विंडो क्रिएट करती है. ऐसा साल में लगभग एक या दो बार होता है, और सब्सक्रिप्शन विंडो तकरीबन एक सप्ताह तक खुली रहती है.
आप ज़रूरत पड़ने पर आठ साल से पहले भी बॉन्ड बेच सकते हैं. लेकिन, पाँच साल से पहले बॉन्ड बेचने से मिलने वाली रक़म पर टैक्स देना पड़ता है.

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गोल्ड ईटीएफ
गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड एक ओपन-एंडेड म्यूचुअल फंड स्कीम है, जो 99.5% प्योरिटी यानी शुद्धता वाले गोल्ड बुलियन में निवेश करती है.
गोल्ड ईटीएफ़ में निवेश शेयर बाज़ार में निवेश से मिलता-जुलता है. ये एक्सचेंज में लिस्ट होता है. जैसे आप शेयर ख़रीदते हैं वैसे ही इसे भी ख़रीद सकते हैं.
इसमें डीमेट अकाउंट खुलवाना ज़रूरी होता है जिसके ज़रिए आप ईटीएफ़ की ख़रीदारी कर सकते हैं. इसमें हर कारोबारी सत्र पर ट्रेड होता है.
कुछ कंपनियां गोल्ड ईटीएफ़ जारी करती हैं, आप उनके ईटीएफ़ ख़रीद सकते हैं. इसकी अंडरलाइन सिक्योरिटी गोल्ड ही होती है. जब आप को ज़रूरत हो या ईटीएफ़ के दाम बढ़े हुए लगें तो आप इन्हें बेच सकते हैं.
इसमें बस एक मुश्किल आती है और वो है लिक्विडिटी यानी आप जिस दिन ईटीएफ़ बेचना चाहेंगे उस दिन वो बिकेगा या नहीं. ये कुछ इस तरह है कि आप सोना बेचना चाह रहे हैं लेकिन कोई ख़रीदने वाला नहीं है.
हालांकि, शेयर में ऐसा बहुत कम होता है. वहां बड़ी कंपनियों में ख़रीदने और बेचने वालों की संख्या इतनी ज़्यादा होती है कि कभी आपको बेचने में दिक्क़त आती ही नहीं है. हां, कुछ छोटी कंपनियों के शेयर में ये दिक्क़त हो सकती है क्योंकि वहां बहुत ज़्यादा ख़रीद बिक्री नहीं होती है.

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गोल्ड सेविंग्स प्लान
आजकल कई ज्वैलर्स कस्टमर्स को गोल्ड सेविंग्स प्लान ऑफर करते हैं.
इस तरीके में हर महीने एक फिक्स्ड अमाउंट जमा करनी होती है और इस पर कई ज्वैलरी हाउस आकर्षक बोनस भी देते हैं.
जमा की गई रकम के साथ बोनस जोड़कर इस राशि का इस्तेमाल उसी ज्वेलर से गोल्ड खरीदने के लिए कर सकते हैं.
इन प्लान के जरिए आप हर महीने थोड़ी-थोड़ी बचत करके एक बड़ी रकम जुटाकर गोल्ड ख़रीद सकते हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित



































