कोरोना लस : काही देशांमध्ये कधीच कोरोनाचं लसीकरण होणार नाही का?

कोव्हिड 19साठीची लस द्यायला जगातल्या अनेक देशांत सुरुवात झालीय. पण प्रत्येकाला प्रश्न पडलाय - मला लस कधी मिळणार?
कारण कोव्हिड 19साठीची लस सगळ्या जगाला देणं हा जीवन-मरणाचा प्रश्न आहे.
काही मोजक्या देशांनीच लसीकरणासाठीची नेमकी उद्दिष्टं ठेवली आहेत, पण जगभरात इतरत्र मात्र हे चित्र इतकं स्पष्ट नाही.
लसीकरणाची ही प्रक्रिया गुंतागुंतीची आहे. त्यात अनेक देशांमधल्या कंपन्यांचा सहभाग आहे, जगभरातल्या सरकारांनी याविषयीची वेगवेगळी वक्तव्यं केलेली आहेत आणि देशांच्या नियामक संस्था आणि अधिकाऱ्यांचा या प्रक्रियेत महत्त्वाचा सहभाग आहे. म्हणूनच लस उपलब्ध होणं, तिला मान्यता मिळणं आणि जगामध्येच लसीकरण मोहीम राबवली जाणं, ही सरळसोपी प्रक्रिया नाही.
मला लस कधी मिळणार?
भारतामध्ये 16 जानेवारीपासून लसीकरणाचा पहिला टप्पा सुरू झाला. यामध्ये आरोग्य सेवा कर्मचारी आणि फ्रंटलाईन वर्कर्सना लस देण्यात आली. त्यानंतर आता 1 मार्चपासून लसीकरणाचा दुसरा टप्पा देशात सुरू झाला असून यामध्ये 60 वर्षांवरील ज्येष्ठ नागरिक आणि 45 वर्षांवरील सहव्याधी असणाऱ्या नागरिकांना लस देण्यात येतेय.
सरकारी लसीकरण केंद्रांसोबतच काही खासगी हॉस्पिटल्सनाही लस देण्याची परवानगी देण्यात आलेली आहे.

फोटो स्रोत, Getty Images / INDRANIL MUKHERJEE
सिरम इन्स्टिट्यूटची कोव्हिशील्ड लस आणि भारत बायोटेक - ICMR ची कोव्हॅक्सिन या दोन लशी सध्या भारतात दिल्या जात आहेत. खासगी लसीकरण केंद्रांमध्ये लसीच्या प्रत्येक डोससाठी 250 रुपये आकारले जात आहेत.
जगभरात कोव्हिड 19साठीची लसीकरण मोहीम कशी सुरू आहे, ते पहा.
जगभरातील लसीकरण मोहीम
लसीकरण पूर्ण झालेल्या लोकांची टक्केवारी
| जग |
61
|
12,12,05,24,547 |
| चीन |
87
|
3,40,36,43,000 |
| भारत |
66
|
1,97,89,18,170 |
| अमेेरिका (USA) |
67
|
59,62,33,489 |
| ब्राझील |
79
|
45,69,03,089 |
| इंडोनेशिया |
61
|
41,75,22,347 |
| जपान |
81
|
28,57,56,540 |
| बांगलादेश |
72
|
27,87,85,812 |
| पाकिस्तान |
57
|
27,33,65,003 |
| व्हिएतनाम |
83
|
23,35,34,502 |
| मेक्सिको |
61
|
20,91,79,257 |
| जर्मनी |
76
|
18,29,26,984 |
| रशिया |
51
|
16,89,92,435 |
| फिलिपीन्स |
64
|
15,38,52,751 |
| इराण |
68
|
14,99,57,751 |
| युनायटेड किंग्डम |
73
|
14,93,97,250 |
| तुर्कस्तान |
62
|
14,78,39,557 |
| फ्रान्स |
78
|
14,61,97,822 |
| थायलंड |
76
|
13,90,99,244 |
| इटली |
79
|
13,83,19,018 |
| दक्षिण कोरिया |
87
|
12,60,15,059 |
| अंर्जेंटिना |
82
|
10,60,75,760 |
| स्पेन |
87
|
9,51,53,556 |
| इजिप्त |
36
|
9,14,47,330 |
| कॅनडा |
83
|
8,62,56,122 |
| कोलंबिया |
71
|
8,57,67,160 |
| पेरू |
83
|
7,78,92,776 |
| मलेशिया |
83
|
7,12,72,417 |
| सौदी अरेबिया |
71
|
6,67,00,629 |
| म्यानमार |
49
|
6,22,59,560 |
| चिली |
92
|
5,96,05,701 |
| तैवान |
82
|
5,82,15,158 |
| ऑस्ट्रेलिया |
84
|
5,79,27,802 |
| उझबेकिस्तान |
46
|
5,57,82,994 |
| मोरोक्को |
63
|
5,48,46,507 |
| पोलंड |
60
|
5,46,05,119 |
| नायजेरिया |
10
|
5,06,19,238 |
| इथिओपिया |
32
|
4,96,87,694 |
| नेपाळ |
69
|
4,68,88,075 |
| कंबोडिया |
85
|
4,09,56,960 |
| श्रीलंका |
68
|
3,95,86,599 |
| क्युबा |
88
|
3,87,25,766 |
| व्हेनेझुएला |
50
|
3,78,60,994 |
| दक्षिण आफ्रिका |
32
|
3,68,61,626 |
| इक्वेडोर |
78
|
3,58,27,364 |
| नेदरलँड |
70
|
3,33,26,378 |
| युक्रेन |
35
|
3,16,68,577 |
| मोझाम्बिक |
44
|
3,16,16,078 |
| बेल्जियम |
79
|
2,56,72,563 |
| संयुक्त अरब अमिराती |
98
|
2,49,22,054 |
| पोर्तुगाल |
87
|
2,46,16,852 |
| रवांडा |
65
|
2,27,15,578 |
| स्वीडन |
75
|
2,26,74,504 |
| युगांडा |
24
|
2,17,56,456 |
| ग्रीस |
74
|
2,11,11,318 |
| कझाकस्तान |
49
|
2,09,18,681 |
| अंगोला |
21
|
2,03,97,115 |
| घाना |
23
|
1,86,43,437 |
| इराक |
18
|
1,86,36,865 |
| केनिया |
17
|
1,85,35,975 |
| ऑस्ट्रिया |
73
|
1,84,18,001 |
| इस्रायल |
66
|
1,81,90,799 |
| ग्वााटेमाला |
35
|
1,79,57,760 |
| हाँगकाँग |
86
|
1,77,31,631 |
| चेक प्रजासत्ताक |
64
|
1,76,76,269 |
| रोमेनिया |
42
|
1,68,27,486 |
| हंगेरी |
64
|
1,65,30,488 |
| डॉमिनिकन प्रजासत्ताक |
55
|
1,57,84,815 |
| स्वित्झर्लंड |
69
|
1,57,59,752 |
| अल्जेरिया |
15
|
1,52,05,854 |
| होंडुरास |
53
|
1,44,44,316 |
| सिंगापूर |
92
|
1,42,25,122 |
| बोलिव्हिया |
51
|
1,38,92,966 |
| ताजिकिस्तान |
52
|
1,37,82,905 |
| अझरबैजान |
47
|
1,37,72,531 |
| डेन्मार्क |
82
|
1,32,27,724 |
| बेलारूस |
67
|
1,32,06,203 |
| ट्युनिशिया |
53
|
1,31,92,714 |
| आयव्हरी कोस्ट |
20
|
1,27,53,769 |
| फिनलंड |
78
|
1,21,68,388 |
| झिम्बाब्वे |
31
|
1,20,06,503 |
| निकाराग्वा |
82
|
1,14,41,278 |
| नॉर्वे |
74
|
1,14,13,904 |
| न्यूझीलंड |
80
|
1,11,65,408 |
| कोस्टा रिका |
81
|
1,10,17,624 |
| आयर्लंड |
81
|
1,09,84,032 |
| एल साल्वाडोर |
66
|
1,09,58,940 |
| लाओस |
69
|
1,08,94,482 |
| जॉर्डन |
44
|
1,00,07,983 |
| पॅराग्वे |
48
|
89,52,310 |
| टांझानिया |
7
|
88,37,371 |
| उरुग्वे |
83
|
86,82,129 |
| सर्बिया |
48
|
85,34,688 |
| पनामा |
71
|
83,66,229 |
| सुदान |
10
|
81,79,010 |
| कुवेत |
77
|
81,20,613 |
| झाम्बिया |
24
|
71,99,179 |
| तुर्कमेनिस्तान |
48
|
71,40,000 |
| स्लोव्हाकिया |
51
|
70,76,057 |
| ओमान |
58
|
70,68,002 |
| कतार |
90
|
69,81,756 |
| अफगाणिस्तान |
13
|
64,45,359 |
| गिनी |
20
|
63,29,141 |
| लेबनॉन |
35
|
56,73,326 |
| मंगोलिया |
65
|
54,92,919 |
| क्रोएशिया |
55
|
52,58,768 |
| लिथुएनिया |
70
|
44,89,177 |
| बल्गेरिया |
30
|
44,13,874 |
| सीरिया |
10
|
42,32,490 |
| पॅलेस्टाईन |
34
|
37,34,270 |
| बेनिन |
22
|
36,81,560 |
| लिबिया |
17
|
35,79,762 |
| नायजर |
10
|
35,30,154 |
| डेमोक्रॅटिक रिपब्लिक ऑफ काँगो |
2
|
35,14,480 |
| सिएरा लिओन |
23
|
34,93,386 |
| बहारीन |
70
|
34,55,214 |
| टोगो |
18
|
32,90,821 |
| किर्गिझस्तान |
20
|
31,54,348 |
| सोमालिया |
10
|
31,43,630 |
| स्लोवेनिया |
59
|
29,96,484 |
| बुर्किना फासो |
7
|
29,47,625 |
| ॲल्बेनिया |
43
|
29,06,126 |
| जॉर्जिया |
32
|
29,02,085 |
| लॅटव्हिया |
70
|
28,93,861 |
| मॉरिटानिया |
28
|
28,72,677 |
| बोट्सवाना |
63
|
27,30,607 |
| लायबेरिया |
41
|
27,16,330 |
| मॉरिशस |
74
|
25,59,789 |
| सेनेगल |
6
|
25,23,856 |
| माली |
6
|
24,06,986 |
| मादागास्कर |
4
|
23,69,775 |
| चॅड |
12
|
23,56,138 |
| मलावी |
8
|
21,66,402 |
| मोल्डोव्हा |
26
|
21,65,600 |
| अर्मेनिया |
33
|
21,50,112 |
| एस्टोनिया |
64
|
19,93,944 |
| बोस्निया आणि हर्जेगोविना |
26
|
19,24,950 |
| भूतान |
86
|
19,10,077 |
| उत्तर मॅसिडोनिया |
40
|
18,50,145 |
| कॅमरून |
4
|
18,38,907 |
| कोसोवो |
46
|
18,30,809 |
| सायप्रस |
72
|
17,88,761 |
| तिमोर-लेस्ते |
52
|
16,38,158 |
| फिजी |
70
|
16,09,748 |
| त्रिनिदाद आणि टोबॅगो |
51
|
15,74,574 |
| जमैका |
24
|
14,59,394 |
| मकाऊ |
89
|
14,41,062 |
| माल्टा |
91
|
13,17,628 |
| लक्झम्बर्ग |
73
|
13,04,777 |
| दक्षिण सुदान |
10
|
12,26,772 |
| सेंट्रल आफ्रिकन रिपब्लिक |
22
|
12,17,399 |
| ब्रुनेई |
97
|
11,73,118 |
| गयाना |
58
|
10,11,150 |
| मालदीव |
71
|
9,45,036 |
| लेसोथो |
34
|
9,33,825 |
| येमेन |
1
|
8,64,544 |
| रिपब्लिक ऑफ काँगो |
12
|
8,31,318 |
| नामिबिया |
16
|
8,25,518 |
| गाम्बिया |
14
|
8,12,811 |
| आईसलँड |
79
|
8,05,469 |
| केप व्हर्ड |
55
|
7,73,810 |
| मॉन्टेनिग्रो |
45
|
6,75,285 |
| कमोरोस |
34
|
6,42,320 |
| पापुआ न्यू गिनी |
3
|
6,15,156 |
| गिनी बिसॉ |
17
|
5,72,954 |
| गॅबॉन |
11
|
5,67,575 |
| एस्वाटिनी |
29
|
5,35,393 |
| सुरीनाम |
40
|
5,05,699 |
| समोआ |
99
|
4,94,684 |
| बेलीझ |
53
|
4,89,508 |
| इक्वेटोरियल गिनी |
14
|
4,84,554 |
| सोलोमन बेटे |
25
|
4,63,637 |
| हैती |
1
|
3,42,724 |
| बहामा |
40
|
3,40,866 |
| बार्बाडोस |
53
|
3,16,212 |
| व्हानुआतू |
40
|
3,09,433 |
| टोंगा |
91
|
2,42,634 |
| जर्सी |
80
|
2,36,026 |
| जबूती |
16
|
2,22,387 |
| सेशेल्स |
82
|
2,21,597 |
| साओ टोम आणि प्रिन्सपी |
44
|
2,18,850 |
| आईल ऑफ मॅन |
79
|
1,89,994 |
| गर्नजे |
81
|
1,57,161 |
| अँडोरा |
69
|
1,53,383 |
| किरबाती |
50
|
1,47,497 |
| केयमेन आयलंड्स |
90
|
1,45,906 |
| बर्म्युडा |
77
|
1,31,612 |
| अँटिग्वा आणि बार्बुडा |
63
|
1,26,122 |
| सेंट लुसिया |
29
|
1,21,513 |
| जिब्रोल्टर |
123
|
1,19,855 |
| फॅरो आयलंड्स |
83
|
1,03,894 |
| ग्रेनाडा |
34
|
89,147 |
| ग्रीनलँड |
68
|
79,745 |
| सेंट व्हिन्सेंट आणि ग्रेनेडीन्स |
28
|
71,501 |
| लिखटनस्टाईन |
69
|
70,780 |
| टर्क अँड केकॉस आयलंड्स |
76
|
69,803 |
| सान मरीनो |
69
|
69,338 |
| डॉमिनिका |
42
|
66,992 |
| मोनॅको |
65
|
65,140 |
| सेंट किट्स आणि नेव्हिस |
49
|
60,467 |
| ब्रिटीश व्हर्जिन आयलंड्स |
59
|
41,198 |
| कुक आयलंड्स |
84
|
39,780 |
| अँग्विला |
67
|
23,926 |
| नाऊरू |
79
|
22,976 |
| बुरुंडी |
0.12
|
17,139 |
| टुवालू |
52
|
12,528 |
| सेंट हेलेना |
58
|
7,892 |
| मॉन्तसेरात |
38
|
4,422 |
| फॉकलंड आयलंड्स |
50
|
4,407 |
| न्यूए |
88
|
4,161 |
| टोकलाव |
71
|
1,936 |
| पिटकर्न |
100
|
94 |
| उत्तर कोरिया |
0
|
0 |
| एरिट्रिया |
0
|
0 |
| दक्षिण जॉर्जिया आणि दक्षिण सँडविच आयलंड |
0
|
0 |
| ब्रिटीश हिंदी महासागर क्षेत्र |
0
|
0 |
| व्हॅटिकन |
0
|
0 |
संपूर्ण मजकूर नीट पाहण्यासाठी तुमचा ब्राउजर अपडेट करा
ही माहिती नियमितपणे अपडेट केली जाते. पण यामध्ये प्रत्येक जागेसाठीची ताजी आकडेवारी वा लसीकरण असेलच असं नाही एकूण लसीकरण म्हणजे देण्यात आलेले लशींचे एकूण डोस. यामध्ये लसीकरणासाठी आवश्यक डोससोबतच बूस्टर डोसचाही समावेश असू शकतो. पूर्ण लसीकरणाची व्याख्या देश आणि लशीचा प्रकार यानुसार वेगवेगळी असू शकते आणि कालानुरूप त्यात बदल होऊ शकतो.
स्त्रोत: Our World in Data
शेवटचा अपडेट ५ जुलै, २०२२, ५:५८ म.उ. IST
आतापर्यंत किती लशी देण्यात आल्या आहेत?
जगभरातल्या 100 देशांत आतापर्यंत कोव्हिड 19साठीच्या विविध लशींचे मिळून 30 कोटींपेक्षा जास्त डोसेस देण्यात आलेले आहेत. जगाच्या इतिहासातली ही आजवरची सर्वांत मोठी लसीकरण मोहीम आहे.
चीनच्या वुहानमधून कोरोना व्हायरसचं प्रकरण आढळल्याच्या वर्षभरापेक्षा कमी काळातच लस द्यायला सुरुवात झाली खरी, पण जगभरातल्या लसीकरण मोहीमेत असमानता आहे.
काही देशांनी त्यांच्या लोकसंख्येतल्या बहुतेकांसाठी लागणारे लशीचे डोसेस मिळवले असून ते या लोकांपर्यंत पोहोचवण्यास सुरुवातही झालेली आहे. पण त्यापेक्षा अधिक देश अजूनही लशीच्या डोसेसच्या पहिल्या बॅचची वाट पाहतायत.
बहुतेक देश त्यांच्या लसीकरणाच्या पहिल्या टप्प्यात या नागरिकांना प्राधान्य देत आहेत :
- 60 वर्षांपेक्षा जास्त वय असलेले
- आरोग्यसेवक
- कोव्हिड होण्याचा धोका जास्त असणारे लोक
इस्रायल आणि युकेसारख्या देशांमध्ये लशीचे परिणाम दिसायला लागले आहेत. हॉस्पिटलमध्ये दाखल होणाऱ्यांची आणि मृत्यूंची संख्या घटलीय आणि सोबतच कम्युनिटी ट्रान्समिशन म्हणजे समाजामध्ये पसरणारं संक्रमणही कमी झालंय.
जवळपास सगळा युरोप आणि अमेरिकेत लसीकरण मोहीम सुरू झाली असली तरी आफ्रिकेतल्या मोजक्याच देशांत लसीकरण सुरू झालंय.

फोटो स्रोत, Getty Images /NurPhoto
द इकॉनिमिस्ट इंटेलिजन्स युनिट (EIU) मधले ग्लोबल फोरकास्टिंग विभागाचे संचालक अगाथे डेमरैस यांनी याविषयी सखोल संशोधन केलंय.
लशीसाठीची जगातली एकूण उत्पादन क्षमता, ही लस लोकांपर्यंत पोहोचण्यासाठी आवश्यक आरोग्यव्यवस्था, त्या देशाची एकूण लोकसंख्या आणि या देशाला किती लस परवडणार आहे यांचा अभ्यास करण्यात आला.
या संशोधनातून निष्पन्न झालेल्या गोष्टी या श्रीमंत विरुद्ध गरीब या फरकानुसार काहीशा अपेक्षित आहेत. सध्याच्या घडीला युके आणि अमेरिकेमध्ये लशींचा चांगला पुरवठा आहे. कारण लशीच्या विकास प्रक्रियेमध्ये भरपूर पैसे गुंतवणं या देशांना शक्य होतं आणि परिणामी लस मिळवण्याच्या शर्यतीत हे देश आघाडीवर होते.
कॅनडा आणि युरोपातले काही श्रीमंत देश या दोघांच्या पाठोपाठ आहेत.
कमी उत्पन्न गटामधल्या बहुतांश देशांमध्ये अद्याप लसीकरणाला सुरुवात झालेली नाही. पण याला काही अपवाद आहेत.
जागतिक लसीकरण मोहीम
स्त्रोत: Our World in Data
श्रीमंत देशांनी लशींचा साठा करून ठेवलाय का?
आपल्या देशाच्या लोकसंख्येच्या गरजेपेक्षा पाच पटींनी जास्त लशी विकत घेतल्यामुळे 2020च्या अखेरीस कॅनडावर टीका झाली होती. पण त्यांना लशींची प्राधान्याने डिलिव्हरी मिळणार नसल्याचं दिसतंय.
डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्राध्यक्ष असताना कदाचित अमेरिका लशींच्या निर्यातीवर बंदी घालेल असा विचार करत कॅनडाने युरोपातल्या लस उत्पादक कंपन्यांच्या लशीमध्ये गुंतवणूक केली. पण त्यांचा हा निर्णय चुकीचा ठरलेला दिसतोय.
युरोपातल्या कंपन्या लस पुरवठा सुरळीत ठेवू शकलेल्या नाहीत आणि गेल्या काही काळात युरोपातल्या देशांनीच निर्यातीवर बंदी घालण्याची धमकी दिलेली आहे. ऑस्ट्रेलियाला जाणारे लशीचे काही डोस इटलीने रोखून धरले.
पण अपेक्षेपेक्षा चांगली कामगिरी करणारेही काही देश आहेत.

लोकसंख्येच्या तुलनेमध्ये जास्तीत जास्त लोकांना लस देणाऱ्या जगातल्या देशांच्या यादीमध्ये, हा लेख लिहीतेवेळी सर्बिया आठव्या क्रमांकावर होता. युरोपियन युनियनमधल्या कोणत्याही देशापेक्षा हा देश आघाडीवर आहे.
लसीकरण मोहीमेची परिणामकारक अंमलबजावणी हे सर्बियाच्या यशाचं गमक आहेच पण सोबतच लसीसाठी त्यांनी धोरणात्मकरित्या केलेले करारही यासाठी कारणीभूत आहेत. रशिया आणि चीन हे दोन्ही देश पूर्व युरोपात जम बसवण्यासाठी धडपडतायत. रशियाची स्पुटनिक-5 लस आणि चीनची सायनोफार्म लस अशा दोन्ही लशी उपलब्ध असणाऱ्या मोजक्या देशांपैकी सर्बिया एक आहे.
कागदोपत्री सर्बियन नागरिकांना फायझर, स्पुटनिक किंवा सायनोफार्म लस निवडण्याचा पर्याय दिला जात असला, तरी प्रत्यक्षात बहुतेकांना सायनोफार्म लस दिली जातेय.
व्हॅक्सिन डिप्लोमसी म्हणजे काय?
चीनचा या प्रदेशावरचा प्रभाव दीर्घकालीन राहण्याची शक्यता आहे. चीनच्या सायनोफार्म लशीचे दोन्ही डोस वापरणारे देश, भविष्यात गरज पडल्यास पुढच्या बूस्टर डोससाठीही चीनवरच अवलंबून राहण्याची शक्यता आहे.
युनायटेड अरब अमिरात - UAE देखील चीनच्या लशीवर मोठ्या प्रमाणात अवलंबून आहे. सध्या त्यांच्याकडे देण्यात येणाऱ्या एकूण लशींपैकी 80% लशी या सायनोफार्म आहेत. UAE मध्ये सायनोफार्मच्या निर्मितीसाठीचा कारखानाही उभारण्यात येतोय.
"लशीच्या उत्पादनासाठीचे कारखाने, प्रशिक्षित कर्मचारी हे सगळं चीनकडून पुरवण्यात येतंय. त्यामुळेच चीनचा प्रभाव दीर्घकालीन असेल. आणि यामुळेच ही लस घेणाऱ्या देशाच्या सरकारला भविष्यात चीनला कोणत्याही गोष्टीसाठी नाही म्हणणं अतिशय कठीण जाईल."

फोटो स्रोत, Getty Images / triloks
पण जगाला लशीचा मोठ्या प्रमाणावर पुरवठा करणं याचा अर्थ स्वतःच्या देशातल्या लोकसंख्येला सर्वांत आधी लस मिळेलच असं नाही.
जगाला लशींचा सर्वाधिक पुरवठा करणाऱ्या दोन देशांत - चीन आणि भारतात 2022च्या अखेरपर्यंत पुरेशा प्रमाणात लसीकरण होणार नसल्याचा अंदाज EIUच्या संशोधनात व्यक्त करण्यात आलाय. या दोन्ही देशांमधली प्रचंड मोठी लोकसंख्या आणि आरोग्य कर्मचाऱ्यांचा तुटवडा यामुळे या दोन्ही देशांतल्या लसीकरणाला वेळ लागणार आहे.
आव्हानं काय आहेत?
कोव्हिडच्या लशीचा जगातला सर्वांत मोठा उत्पादक म्हणून भारताला मिळालेलं यश हे खरंतर, अदर पूनावाला या एका माणसामुळे मिळालेलं आहे. सिरम इन्स्टिट्यूट ऑफ इंडिया ही पूनावालांची कंपनी जगातली सर्वांत मोठी लस उत्पादक आहे.
पण लशीची परिणामकारकता सिद्ध होण्याआधीच त्यामध्ये लाखो डॉलर्सची गुंतवणूक करणाऱ्या अदर पूनावालांच्या निर्णयावर त्यांच्या घरच्यांनीच शंका घ्यायला सुरुवात केली होती.
ऑक्सफर्ड आणि अॅस्ट्राझेनकाने तयार केलेली लस जानेवारी महिन्यामध्ये भारत सरकारने स्वीकारली आणि आता सिरम इन्स्टिट्यूटमध्ये या लशीच्या 24 लाख डोसेसचं दररोज उत्पादन करण्यात येतंय.
अदर पूनावाला सांगतात, "मला वाटलं होतं की उत्पादन तयार झालं की हा तणाव संपेल. पण सगळ्यांना खुश ठेवणं हे सगळ्यांत मोठं आव्हान आहे."

फोटो स्रोत, Getty Images /John M Lund Photography Inc
उत्पादनाचं प्रमाण एका रात्रीत वाढवता येणार नसल्याचं ते म्हणतात.
"या गोष्टींना वेळ लागतो. लोकांना वाटतं सिरम इन्स्टिट्यूटकडे जादूची छडी आहे. आम्ही जे काही करतो त्यात चांगले आहोत, पण आमच्याकडे कोणतीही जादूची छडी नाही."
अदर पूनावालांनी गेल्या वर्षीच्या मार्च महिन्यातच उत्पादनासाठीची तयारी सुरू केली आणि ऑगस्टपासून या लशीसाठी आवश्यक काचेच्या कुपी आणि घटकांचा साठा करून ठेवायला सुरुवात केली.
उत्पादनादरम्यान किती लस निर्माण होते याचा आकडा कमी जास्त होऊ शकतो किंवा उत्पादनाच्या अनेक टप्प्यांमध्ये गोष्टी बिघडूही शकतात.
"ही गोष्ट विज्ञानासोबतच सगळं काही जुळवून आणण्याच्या कलेचीही आहे," अगाथे डेमरैस सांगतात.
ज्या उत्पादक कंपन्या आता निर्मितीला सुरुवात करत आहेत, त्यांना प्रत्यक्ष लस उत्पादनासाठी अनेक महिने लागणार आहेत. शिवाय कोरोनाच्या नवीन प्रकारच्या विषाणूसाठी (व्हेरियंट) जर लशीच्या बूस्टर डोसची गरज लागली, तर त्यासाठीही हेच लागू होईल.
कोव्हॅक्समुळे लशींच्या वितरणाचा वेग वाढेल का?
भारताला लस पुरवठा करण्याला आपलं प्राधान्य असल्याचं पूनावाला सांगतात. यासोबतच कोव्हॅक्स योजनेद्वारे ही लस आफ्रिकेलाही पुरवण्यात येणार आहे.

WHO, गावी (Gavi) ही लशीसाठीची योजना आणि CEPI - सेंटर फॉर एपिडेमिक प्रिपेअर्डनेस या सगळ्यांनी मिळून कोव्हॅक्स ही योजना आखली आहे. जगातल्या प्रत्येक देशामध्ये परवडणाऱ्या दरात लस पोहोचवणं हे याचं उद्दिष्टं आहे.
ज्या देशांना लस घेणं परवडणार नाही, त्यांना एका विशेष निधीच्या मार्फत ही लस पुरवण्यात येईल. उरलेले देश यासाठी पैसे देतील पण या योजनेद्वारे लस घेतल्याने त्यांना ती तुलनेने कमी दरात मिळेल.
लस मिळण्यासाठी पात्र असणाऱ्या देशांच्या 20 टक्क्यांपर्यंतच्या लोकसंख्येला याद्वारे लस पुरवण्यात येणार आहे.
या योजनेअंतर्गत 24 फेब्रुवारीला लस मिळणारा घाना हा पहिला देश ठरला. या वर्षअखेरपर्यंत जगभरात लशींचे 2 अब्ज डोस पुरवणं हे कोव्हॅक्स योजनेचं उद्दिष्टं आहे.
पण या कोव्हॅक्स योजनेतले अनेक देश वैयक्तिकरित्याही लस मिळवण्याचा प्रयत्न करत आहेत.
आफ्रिका खंडातील जवळपास प्रत्येक देशाच्या नेत्याने आपल्याकडे लशीसाठी वैयक्तिक पातळीवर संपर्क साधल्याचं अदर पूनावाला सांगतात.
अगाथे डेमरैस आणि EIU यांना या कोव्हॅक्स योजनेच्या यशाबद्दल फारशा अपेक्षा नाहीत. या योजनेच्या नियोजित गोष्टी पार पडल्या तरी यामुळे देशाच्या 20-27% लोकसंख्येला लस देण्यात येणार आहे.
"यामुळे लहानसा फरक पडेल, पण फार मोठं काही घडणार नाही," डेमरैस सांगतात.
काही देशांमध्ये 2023 पर्यंत संपूर्ण लसीकरण होणार नाही, तर काही देशांमध्ये हे कधीच घडणार नसल्याचं EIUच्या अंदाजात म्हटलंय. लसीकरणाला प्रत्येक देशाचं प्राधान्य नसेल. विशेषतः ज्या देशांमध्ये मोठ्या प्रमाणात तरूण लोकसंख्या आहे आणि जिथे फार मोठ्या प्रमाणात लोक आजारी पडत नाहीत, अशा देशांची लसीकरणाला प्राथमिकता नसेल.
पण जोपर्यंत हा विषाणू तग धरून आहे तोपर्यंत तो स्वतःमध्ये बदल घडवून आणेल आणि संसर्ग पुढे पसरत राहील. शिवाय लसीला दाद न देणारा विषाणूही निर्माण होईल.
पण चांगली गोष्ट म्हणजे पूर्वीपेक्षा जास्त वेगाने लस उत्पादन होत आहे. पण जगभरातल्या 7.7 अब्ज लोकांना लस देणं हे मोठं आव्हान आहे आणि हे यापूर्वी कधीही करण्यात आलेलं नाही.
सर्व सरकारांनी आपल्या जनतेला खरी माहिती देणं गरजेचं असल्याचं डेमरैस सांगतात. "पुढची काही वर्षं तरी आम्हाला लसीकरण मोहीम सगळ्यांपर्यत पोहोचवता येणं शक्य नाही, असं सांगणं कोणत्याही सरकारसाठी अतिशय कठीण आहे, आणि असं सांगण्याची कोणाचीही इच्छा नसते."
डेटा जर्नलिझम - बेकी डेल आणि नास्सोज स्टिलिआनू
या आकडेवारीबद्दल
अवर वर्ल्ड इन डेटा हा गट ऑक्सफर्ड विद्यापीठ आणि शैक्षणिक संस्थांनी मिळून बनवला असून त्यांनी ही माहिती गोळा करून नकाशे तयार केले आहे.
लोकसंख्येची आकडेवारी युनायटेड नेशन्सच्या 2020च्या मध्यातल्या अंदाजांतून घेण्यात आली आहे.
हे वाचलंत का?
या लेखात सोशल मीडियावरील वेबसाईट्सवरचा मजकुराचा समावेश आहे. कुठलाही मजकूर अपलोड करण्यापूर्वी आम्ही तुमची परवानगी विचारतो. कारण संबंधित वेबसाईट कुकीज तसंच अन्य तंत्रज्ञान वापरतं. तुम्ही स्वीकारण्यापूर्वी सोशल मीडिया वेबसाईट्सची कुकीज तसंच गोपनीयतेसंदर्भातील धोरण वाचू शकता. हा मजकूर पाहण्यासाठी 'स्वीकारा आणि पुढे सुरू ठेवा'.
YouTube पोस्ट समाप्त
(बीबीसी मराठीचे सर्व अपडेट्स मिळवण्यासाठी तुम्ही आम्हाला फेसबुक, इन्स्टाग्राम, यूट्यूब, ट्विटर वर फॉलो करू शकता.रोज रात्री8 वाजता फेसबुकवर बीबीसी मराठी न्यूज पानावर बीबीसी मराठी पॉडकास्ट नक्की पाहा.)























