लकवे से पीडित महिला ने मैराथन दौड़ पूरी की

इमेज स्रोत, BBC World Service
लकवे से पीड़ित ब्रिटेन की एक महिला लंदन मैराथन पूरी करने वाली दुनिया की पहली व्यक्ति बन गई हैं.
42 किलोमीटर वाले लंदन मैराथन को पूरा करने में क्लेयर लोमास ने 16 दिन लगाए.
उनके साथ इस प्रतियोगिता में 36,000 अन्य लोगों ने भी हिस्सा लिया था. जब उन्होंने इस मैराथन दौड़ को पूरा किया, तब हजारों की तादाद में कतार बनाकर खड़े लोगों ने तालियां बजाकर उनका अभिवादन किया.
कभी पेशेवर घुड़सवार रही ब्रिटेन की क्लेयर लोमास उस वक्त लकवे से पीड़ित हो गई थीं जब छह साल पहले घुड़सवारी करते हुए वो गिर पड़ी थीं. उनके सीने से नीचे के हिस्से को लकवा मार गया था.
लेकिन ये संभव हो पाया रोबोटिक टाँगों की वजह से.
रीढ़ की हड्डी में चोट के कारण क्लेयर को बताया गया था कि अब उसे बाकी की जिंदगी व्हीलचेयर पर बितानी होगी. पर वो तो अपने पैरों पर खड़ी होना चाहती थी, फिर से स्वतंत्र होना चाहती थीं.
‘रोबोटिक वॉकिंग सूट’
पिछले तीन महीनों में क्लेयर लोमास ‘रोबोटिक वॉकिंग सूट’ की मदद से मैराथन के लिए जी तोड़ मेहनत की.
शुरु-शुरु में तो वो दो कदम ही चल पाती थीं. कुछ हफ्ते पहले तक भी क्लेयर केवल 30 कदम तक चल पा रही थीं.
क्लेयर को चोट 2006 में लगी थी जब वे अपने घोड़े के ठिठकने से गिर गई थीं. इस दुर्घटना में उनकी गर्दन, पीठ और पसलियों में काफी चोट आई और सीने के नीचे वाले हिस्से में लकवा मार गया.
अपने जैसे लोगों की स्थिति पर शोध के दौरान उन्होंने इंटरनेट पर ‘रोबोट लेग्स’ के बारे में पढ़ा. परिवारजनों और दोस्तों की मदद से क्लेयर ने 43000 पाउंड जुटाए और रोबोट लेग्स खरीदीं.
हालांकि इन्हें लगाकर चलना आसान नहीं है, इसके लिए धैर्य, मशक्कत और धीरज की जरूरत होती है.
































