#100Women क्रिकेट में तहलका मचाने उतरीं कश्मीरी लड़कियां

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    • Author, माजिद जहांगीर
    • पदनाम, श्रीनगर से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए

भारत प्रशासित कश्मीर में आजकल क्रिकेट का जादू महिला क्रिकेटर्स के सिर चढ़ कर बोल रहा है. अभी हाल ही में जम्मू-कश्मीर में महिलाओं की 13 टीमों ने एक साथ अपने हुनर का प्रदर्शन किया. जिस खिलाड़ी से बात करो उसके हौसले चट्टान की तरह सख्त दिख रहे थे.

इस टूर्नामेंट में केवल एक मैच खेल सकीं महनाज़ बीमार होने के बावजूद इसका फ़ाइनल देखने पहुंची थीं. उन्होंने अब तक 16 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं.

क्रिकेट और परीक्षा साथ-साथ

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क्रिकेट खेलने के दौरान महनाज़ को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा लेकिन उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारीं. उन्हें कई बार मैच और परीक्षा साथ-साथ देने पड़े हैं.

वो कहती हैं, "कई बार ऐसा हुआ कि परीक्षा के दौरान मुझे क्रिकेट टूर्नामेंट में शामिल होना पड़ा. मेरे स्कूलवालों ने मुझे कभी रोका नहीं, बल्कि पहले मैं टूर्नामेंट खेलती, उसके बाद परीक्षा में बैठती. लेकिन इस वजह से मेरी पढ़ाई पर असर ज़रूर पड़ा."

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इमेज कैप्शन, महनाज़

महनाज़ की और भी छह बहनें हैं. उनके पिता बिजली विभाग में एक मामूली लाइनमैन थे जिनका एक साल पहले निधन हो गया.

उन्होंने कहा, "बीते साल जब पापा की मौत हुई तो हमारे घर में पांच महीनों तक एक भी पैसा नहीं था. हम कई महीनों तक खाने का सामान लाकर रखते थे. मेरे पास स्पोर्ट्स के लिए जूते नहीं थे और फिर मेरे जीजाजी वो लाए. वो समय मेरी जिंदगी का सबसे कठिन दौर था, जिसे भूलना आसान नहीं है."

छक्के चौके मार रही महिला क्रिकेटर

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इमेज कैप्शन, श्रीनगर टीम और जम्मू टीम की कप्तान

बीते सात सालों से क्रिकेट के मैदान में श्रीनगर की फ़रख़ंदा छक्के और चौके मार रही हैं. जब उन्होंने खेलना शुरू किया था तो उन्हें पता नहीं था कि एक दिन उन्हें बड़े मैदान में खेलने को मिलेगा.

वो कहती हैं, "सात साल पहले जब मुझे क्रिकेट खेलने का शौक हुआ तो मुझे हेल्पर के तौर पर रखा जाता था. फिर एक दिन जब हमारी टीम का एक खिलाड़ी बीमार पड़ा तो उसकी जगह मुझे खेलने का मौक़ा मिला."

वो बताती हैं, "वो मेरा पहला मैच था. उस दिन मैंने 39 रन बनाए. तब से ओपनर के तौर पर टीम में मुझे जगह मिल गई. आज मैं भारत के कई राज्यों में खेल चुकी हूं."

लड़कों से साथ खेल कर सीखा क्रिकेट

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श्रीनगर के करननगर की रहने वाली हनान मक़बूल बीते 13 सालों से क्रिकेट खेल रही हैं. शुरू-शुरू में वो लड़कों के साथ खेलती थीं.

वो कहती हैं, "आज महिला क्रिकेट टीमें हैं. जब मैंने खेलना शुरू किया था तो हमें लड़कों के साथ खेलना पड़ता था. उस समय लड़कियों का क्रिकेट खेलना पसंद नहीं किया जाता था. पूरी तरह नहीं, लेकिन, अब तो सोच में बदलाव आ गया है."

कश्मीर बंद का असर क्रिकेट पर

हनान कहती हैं कि कश्मीर में ख़राब हालात का असर उनके गेम पर भी पड़ता है. वो कहती हैं कि जब काफ़ी समय तक कश्मीर बंद रहता है तो खिलाड़ी प्रैक्टिस नहीं कर पाते हैं. जिसका सीधा असर क्रिकेटरों के प्रदर्शन पर पड़ता है. वो बहुत अच्छा नहीं कर पातीं."

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इमेज कैप्शन, मीनू सलाथिया

जम्मू की रहने वाली मीनू सलाथिया खुश हैं कि वो कश्मीर में कश्मीर की महिला क्रिकेटर्स के साथ खेल रही हैं. वो कहती हैं कि वो बार-बार कश्मीर आकर इस तरह के टूर्नामेंट में भाग लेना चाहती हैं.

जम्मू की अदिति कहती हैं कि जब उन्होंने अपने पापा को बताया कि वो सेलेक्ट की गई हैं तो उन्होंने पूछा कि 'तू क्रिकेट में सेलेक्ट हुई है,' मैंने कहा 'हां डैड', तो उन्होंने कहा, 'वेरी गुड, वेरी गुड.'

वो कहती हैं, "इंडिया में लोग क्रिकेट के लिए पागल हैं. यह पागलपन ही मुझे प्रेरित करता है और मुझे लगता है कि मैं आज ही इंडिया के लिए खेलना शुरू दूं."

करियर तो क्रिकेट में ही बनाना है

वीडियो कैप्शन, मिलिए कश्मीर की महिला क्रिकेटर रूबिया से

शोपियां की अंजुम कहती हैं, "कभी कभी मुझे लगता है कि शायद घरवाले, मुहल्लेवाले सही कह रहे हैं, मुझे क्रिकेट खेलना छोड़ देना चाहिए. लेकिन जब भी क्रिकेट की बात होती है तो मैं रोमांचित हो उठती हूं. यही मुझे क्रिकेट में करियर बनाने के लिए प्रेरित करती है."

वो कहती हैं, "मुझे क्रिकेट के मैदान में ही कुछ न कुछ करना है."

बारामूला की इंशा बताती हैं, "हमारे पास बैट-बॉल नहीं थे. हम लकड़ी के बल्ले और टेनिस बॉल से खेला करते थे. कभी-कभी आस-पास के लड़कों से उनके साथ खिलाने की मिन्नतें भी कीं.

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दक्षिण कश्मीर के पुलवामा से इस महिला क्रिकेट टूर्नामेंट को देखने पहुंचे यूनिस अहमद कहते हैं कि उन्हें अच्छा लग रहा है कि कश्मीर की महिलाएं क्रिकेट के मैदान में उतरी हैं.

वो यह भी कहते हैं कि इस खेल को खेल की तरह ही लेना चाहिए, चाहे महिलाएं खेल रही हों या पुरुष.

उधर इन महिला क्रिकेटर्स को शिकायत है कि घाटी में क्रिकेट के लिए बुनियादी सुविधाओं का अभाव है.

हनान मक़बूल कहती हैं, "कश्मीर और कश्मीर से बाहर क्रिकेट खेलने में बहुत अंतर है. वहां खेलने के लिए अच्छे मैदान और अन्य कई सुविधाएं हैं जबकि कश्मीर में अभी ऐसा कुछ भी नहीं है."

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