सोशल: 'काहे गंजे को कंघी बेच रहे हैं नीतीश बाबू'
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अमूमन ऐसा होता है कि चुनाव आते ही राजनेता आरक्षण और छूट देने के वादों की झड़ी लगा देते हैं.
गुजरात विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र भी आरक्षण एक अहम मुद्दा है, लेकिन फ़िलहाल आरक्षण को लेकर एक बड़ा बयान बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिया है.
नीतीश कुमार ने कहा है कि निजी सेक्टर में भी 50 फ़ीसदी आरक्षण होना चाहिए. उनके ऐसा कहने के पीछे वजह क्या है ये तो कहना मुश्किल है, लेकिन आरक्षण हमेशा से देश की राजनीति में एक बड़ा मसला रहा है. बुधवार को बिहार कैबिनेट ने एक प्रपोज़ल पास किया जिसके तहत प्राइवेट सेक्टर में भी आरक्षण की बात कही गई.
2016 में पीआईबी ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की थी जिसमें कहा गया था कि भारत में ओपन कॉम्पटीशन द्वारा सीधी भर्ती में अनुसूचित जाति को 15 फ़ीसदी, अनुसूचित जनजाति को 7.5 फ़ीसदी और अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 फ़ीसदी आरक्षण प्राप्त है. इसके अलावा अगर ओपन कॉम्पटीशन से हटकर किसी दूसरी प्रक्रिया से सीधी भर्ती होती है तो यह प्रतिशत 16.66, 7.5 और 25.84 हो जाता है.
नीतीश के इसी बयान को हमने कहासुनी के लिए विषय बनाया जिस पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आई हैं.
रिज़वान अहमद लिखते हैं कि 'भारत दुनिया में एकमात्र ऐसा देश है जहाँ आरक्षण है, देश की तरक्की के लिए आरक्षण का ख़त्म होना बहुत ज़रूरी है.'
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