नाज़िया हसन: स्कूल यूनिफ़ॉर्म में माइक पर गाने से लेकर 15 साल में फ़िल्म फेयर जीतने वालीं पाकिस्तानी गायिका
इमेज स्रोत, NAZIA HASSAN FAN PAGE
- Author, ताहिर सरवर मीर
- पदनाम, पत्रकार, लाहौर
- पढ़ने का समय: 10 मिनट
ज़ीनत अमान से अपनी बेटी का परिचय कराते हुए मुनीज़ा बसीर हसन ने शायद सोचा भी नहीं होगा कि उनके ड्राइंग रूम में रखे गिटार में इस मशहूर अभिनेत्री की दिलचस्पी उनकी बेटी का भविष्य तय करेगी.
ज़ीनत अमान लंदन में मुनीज़ा के घर आईं और उन्होंने गिटार देख कर पूछा, "ये कौन बजाता है?"
मुनीज़ा के मुताबिक, "मैंने उनसे कहा कि मेरे दोनों बच्चे नाज़िया और ज़ोहैब संगीत में रूचि रखते हैं. नाज़िया घर पर ही थीं. उन्होंने जब गाना सुनाया तो ज़ीनत जी बहुत ख़ुश हुई और कहा कि नाज़िया बहुत अच्छा गाती है, उसकी आवाज़ अलग है.''
मुनीज़ा के मुताबिक, "अगले दिन ज़ीनत अमान ने मुझे फ़ोन किया और कहा कि प्रोड्यूसर फ़िरोज़ ख़ान एक फ़िल्म बना रहे हैं, जिसके लिए उन्हें एक नई आवाज़ की तलाश है और मुझे लगता है कि उन्हें नाज़िया जैसी आवाज़ की तलाश है. मेरे मना करने के बावजूद ज़ीनत अमान ने ज़िद की तो मैंने सोचा नाज़िया के पिता से बात करती हूँ. नाज़िया के पिता और उनका परिवार परंपरावादी हैं. मुझे उन्हें मनाने के लिए थोड़ी बहस करनी पड़ी. हमारे घर का माहौल ऐसा रहा है कि हम एक दूसरे से बात कर सकते हैं.
इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट YouTube समाप्त, 1
पहला गाना
"मुझे याद है कि नाज़िया स्कूल की यूनिफॉर्म में थी, आधी छुट्टी के बाद रिकॉर्डिंग स्टूडियो गई थी. उन्होंने उसी समय गाना रिकॉर्ड कराया, जिसके बोल थे, आप जैसा कोई मेरी ज़िंदगी में आए, तो बात बन जाए और फिर जो हुआ वह इतिहास का हिस्सा है."
नाज़िया हसन ने ये गाना अभिनेता और निर्देशक फ़िरोज़ ख़ान की फ़िल्म 'क़ुर्बानी' के लिए गया था और इसके म्यूजिक अरेंजर बिदु थे. उन्होंने इस गीत का आइडिया अमेरिकी गायक लू रॉल्स के लोकप्रिय गीत 'यू विल नेवर फाइंड' से लिया था.
इस फ़िल्म के अन्य सभी गीत भारत के प्रसिद्ध संगीतकार कल्याण जी, आनंद जी ने आशा भोंसले, मोहम्मद रफ़ी और अन्य प्रसिद्ध गायकों से गवाए थे, लेकिन साल 1980 में सर्वश्रेष्ठ गायिका का पुरस्कार नाज़िया हसन को मिला था.
इमेज स्रोत, NAZIA HASSAN FAN PAGE
15 साल की उम्र में फ़िल्मफ़ेयर अवॉर्ड
मुनीज़ा बसीर हसन बताती हैं कि इस गाने को रिकॉर्ड करने के बाद नाज़िया अपनी पढ़ाई में व्यस्त हो गईं और उन्हें यह याद भी नहीं रहा था कि उन्होंने किसी भारतीय फिल्म में कोई गाना गाया है.
जब फ़िल्म रिलीज़ हुई और गाना लोकप्रिय हो गया, तब एक दिन राज कपूर का फ़ोन आया और उन्होंने कहा कि फ़िल्मफ़ेयर अवॉर्ड कमेटी ने निर्णय किया है कि इस साल बेस्ट सिंगर का अवॉर्ड नाज़िया को दिया जाए. क्या आप लोग यह अवॉर्ड लेने आ सकते हैं?"
जिस उम्र में नाज़िया हसन ने सर्वश्रेष्ठ गायिका का फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार हासिल किया था, वह इस पुरस्कार के 66 साल के इतिहास में दोबारा कभी नहीं हुआ. मुंबई के जिस होटल में नाज़िया हसन ठहरी थीं, वहां भारतीय मीडिया रिपोर्टरों का तांता लगा रहा.
नाज़िया को यह पुरस्कार ख़ुद राज कपूर के हाथों से मिला. इसके बाद, बॉलीवुड में 'शो मैन' कहे जाने वाले राज कपूर सहित, फ़िल्म उद्योग के हर सफल प्रोडक्शन हाउस ने नाज़िया हसन को 'ब्लैंक चेक' के साथ फ़िल्मों में नायिका के रूप में काम करने के लिए बहुत से ऑफर दिए. लेकिन उन्होंने सबका जवाब 'इनकार' में दिया.
इनकार की वजह थी कि नाज़िया हसन एक ऐसे परिवार से थीं जहां शो बिज़नेस और ग्लैमर को बुरा तो नहीं समझा जाता था, लेकिन इसे शिक्षा से बढ़ कर नहीं माना जाता था.
इमेज स्रोत, FB/Baby Tabassum
सीनियर एक्ट्रेस बेबी तबस्सुम के साथ नाज़िया हसन का टीवी इंटरव्यू उनके व्यक्तित्व का बेहतरीन 'ट्रेलर' है.
इंटरव्यू में नाज़िया हसन की पारिवारिक पृष्ठभूमि, शिक्षा, उनके व्यक्तित्व की ईमानदारी और आत्मविश्वास पूरे तौर पर साफ़ दिखाई देते हैं. तबस्सुम के शरारती सवालों को सुनकर नाज़िया शर्मा रही थीं. वह सवाल का बहुत ही छोटा लेकिन स्पष्ट और सीधा जवाब दे रही थीं.
तबस्सुम पूछती हैं, "इंटरव्यू की शुरुआत में, क्यों न हम आपकी शुद्ध और प्योर आवाज़ में साज़ों के बिना वो गाना सुन लें, जिसने तहलका मचा दिया है."
इसके बाद टीवी स्क्रीन पर नाज़िया का चमकता हुआ चेहरा दिखाई देता है. नाज़िया की बड़ी-बड़ी आँखों में सवाल है और वह पुष्टि के लिए पूछती हैं, 'आप जैसा कोई' और फिर पूरे ध्यान से थोड़ा सा गाती हैं.
अगला सवाल था, "नाज़िया! आप के अंदर स्त्रीत्व कूट कूट कर भरा हुआ है. जब मैं आपको देख रही थी, तो सोच रही थी कि जिस तरह से आपकी आवाज़ में लोच है और आपके अंग-अंग से जो रिदम फूट रही है, ऐसा लगता है जैसे आपने डांस भी सीखा है?" इसके जवाब में नाज़िया कहती हैं, "नहीं."
तबस्सुम शरारती अंदाज़ में पूछती हैं, "तो यह सब कारस्तानी बिना सीखे आ गई है?" इस बात पर नाज़िया 'कारस्तानी' शब्द को दोहराते हुए, उन्हें अहसास दिलाती हैं कि इस शब्द का चुनाव ठीक नहीं है.
तबस्सुम ने अपनी बात समझाते हुए कहा, "मेरा मतलब यह था कि आप बिना सीखे ही ये क़यामत ढा रही हैं. अगर ये कला सीख लेंगी तो और भी अच्छा हो जाएगा" जवाब में नाज़िया कहती हैं, "अभी तक तो मैंने सीखा नहीं है, क्योंकि स्कूल की पढ़ाई से समय नहीं मिलता है, स्कूल या कॉलेज ख़त्म होने के बाद देखूंगी."
इमेज स्रोत, NAZIA HASSAN FAN PAGE
असहाय बच्चों की देखभाल
नाज़िया ने अमेरिकी स्कूल से ग्रेजुएशन करने के बाद लंदन से बिजनेस लॉ में डिग्री हासिल की.
नाज़िया हसन के छोटे भाई और म्यूज़िक पार्टनर, ज़ोहैब हसन, अपनी बहन को याद करते हुए कहते हैं कि अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद, नाज़िया संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न परियोजनाओं के लिए काम करती रहीं. जिनमे उन्होंने वैश्विक महिला नेतृत्व योजना और राजनीतिक मामलों के विभाग में महत्वपूर्ण सेवाएं दी. वह बच्चों के अधिकारों और शिक्षा के लिए यूनिसेफ की ब्रांड एंबेसडर भी रहीं.
"वह बहुत ही होशियार, संवेदनशील और उच्च विचार वाली इंसान थीं, जो हमेशा इंसानों, विशेषकर असहाय बच्चों के अभावों की परवाह करती थीं."
उनके अनुसार, "जब वह बहुत छोटी थीं, तब अपना जन्मदिन मनाती थीं, लेकिन जब वह 14 साल की हुईं और माँ ने हमेशा की तरह उनके जन्मदिन की तैयारी करते हुए उनसे पूछा कि वह लंदन में किन दोस्तों को आमंत्रित करना चाहेंगी. तब नाज़िया ने कहा कि माँ मैं अब बच्ची नहीं हूँ जो जन्मदिन मनाऊं."
"माँ बहुत हैरान हुई और कहा, तुम अभी केवल 14 साल की हुई हो, तुम अपने आप को इतनी बड़ी क्यों समझ रही हो?' नाज़िया ने माँ से पूछा कि जिस तरह मैं कहूँगी आप मेरा जन्मदिन उस तरह मनाएंगी. माँ ने हाँ की, तो नाज़िया ने कहा कि यह केक और मेरे सभी गिफ़्ट बेसहारा बच्चों को दे दें. फिर ऐसा ही हुआ और जब तक नाज़िया इस दुनिया में रहीं, उन्होंने अपना जन्मदिन इसी तरह मनाया."
ज़ोहैब बताते हैं, "साल 2000 में नाज़िया इस दुनिया से चली गईं और तब से हम लंदन, कराची और दुनिया के अन्य हिस्सों में नाज़िया का जन्मदिन उनके बताये हुए तरीक़े से ही मना रहे हैं."
इमेज स्रोत, ZOHAIB HASSAN
ज़ोहैब कहते हैं, "वैसे तो नाज़िया मुझसे केवल डेढ़ साल बड़ी थीं लेकिन कभी-कभी मुझे लगता था कि वह मेरी बड़ी बहन नहीं बल्कि मेरी माँ थी. माँ बताती हैं कि नाज़िया जब ढाई साल की थीं, तो नानी ने उन्हें लाल जूते गिफ़्ट किये थे. वो लाल जूते नाज़िया को बहुत पसंद थे और वह उन जूतों को पहनने के बजाय गोद में उठाये रखती थीं."
"माँ बताती हैं कि मैं उस समय एक साल का था और बिस्तर पर लेटा हुआ था, नाज़िया मेरे बिस्तर के चारों ओर चक्कर लगा रही थी और चाहती थीं कि मैं उठकर उसके साथ खेलूँ. ज़ाहिर है मैं इतनी कम उम्र में नाज़िया की फ़रमाइश पूरी नहीं कर सकता था. इसलिए उसने वो लाल जूते मेरे बिस्तर पर रखते हुए सोचा कि मैं तुम्हें अपनी सबसे कीमती चीज़ दे रही हूँ, अब तो उठो!"
ज़ोहैब ने अपनी बड़ी बहन को याद करते हुए एक और घटना का ज़िक्र किया.
इमेज स्रोत, Zoheb Hassan Official Fan Page
14 देशों के टॉप टेन चार्ट पर नाज़िया और ज़ोहैब छाये रहे
नाज़िया और ज़ोहैब की जोड़ी ने दक्षिण एशिया में आधुनिक संगीत में क्रांति ला दी थी.
इन दोनों को इस क्षेत्र में पॉप संगीत के संस्थापकों में माना जाता है. बहन-भाई की इस जोड़ी ने क्षेत्र में आधी सदी से प्रचलित संगीत परंपरा को बदल दिया. साल 1931 में पहली बोलती फिल्म 'आलम आरा' से लेकर साल 1980 तक जितने भी प्रयोग हुए थे, नाज़िया हसन की आवाज़ और उसके साथ वाद्य यंत्र बजाने का अनुभव एक ख़ूबसूरत और अनोखा संगीत साबित हुआ.
गायक जव्वाद अहमद का कहना है कि भारत में एसडी बर्मन और किशोर कुमार का गाना 'मेरे सपनों की रानी' और पाकिस्तान में 'को को कोरिना' जिसे सोहेल राणा ने अहमद रुश्दी से गवाया था, इस क्षेत्र में पॉप संगीत की शुरुआत माना जा सकता है. लेकिन नाज़िया, ज़ोहैब और बिदु ने इस क्षेत्र में संगीत परंपरा को बदल दिया. इन तीनों ने जिस शैली का संगीत दिया उसे प्रशंसकों और मीडिया ने 'नाज़िया ज़ोहैब पॉप म्यूज़िक' का नाम दिया.
नाज़िया और ज़ोहैब ने एक साथ पांच एल्बम किए, जिनमे पहला 'डिस्को दीवाने' था जो 1981 में सामने आया और इसमें दस गाने शामिल थे जो सभी सुपरहिट हुए. नाज़िया और ज़ोहैब के इस पहले एल्बम के रिलीज़ होने के पहले ही दिन अकेले मुंबई में एक लाख कॉपियां बिकी थीं.
'डिस्को दीवाने' ने अपनी रिलीज़ के 15 दिनों के भीतर प्लेटिनम टाइटल जीता, और इसके तीसरे हफ़्ते में ये खिताब डबल प्लैटिनम में बदल गया था. यह एल्बम पाकिस्तान, भारत, ब्राज़ील, रूस, दक्षिण अफ़्रीका, फिलीपींस, मलेशिया, इंडोनेशिया, लैटिन अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, वेस्टइंडीज और अमेरिका सहित 14 देशों में टॉप टेन चार्ट में पहले नंबर पर रहा. दुनिया भर में इसकी एक करोड़ 40 लाख कॉपियां बिकी थी, जो उस समय एक रिकॉर्ड था.
उनका दूसरा एल्बम 'बूम बूम' था और वह भी सुपरहिट रहा था. इसके बाद 1992 में तीसरा एल्बम 'यंग तरंग', चौथा एल्बम 'हॉटलाइन' और 1992 में पांचवां एल्बम 'कैमरा कैमरा' आया था.
जब नाज़िया और ज़ोहैब के गीतों के वीडियो सामने आए, तो पश्चिमी संगीत की दुनिया में म्यूज़िक एल्बम के साथ वीडियो बनाने की परंपरा ज़रूरी हो गई, और भारत-पाकिस्तान समेत एशियाई मूल के अमेरिकी और ब्रिटिश युवा पीढ़ी ने इस ट्रेंड को अपनाते हुए म्यूज़िक बैंड्स बनाए.
इमेज स्रोत, DISCO DEWANE COVER
बोल नाज़िया के और धुन ज़ोहैब की
नाज़िया और ज़ोहैब से एक बार पूछा गया था कि आपका संगीत शुद्ध पश्चिमी नहीं है और इसे पूर्वी भी नहीं कहा जा सकता. क्या आपने फ्यूज़न किया? इस पर नाज़िया ने जवाब दिया था, "हम तो मासूमियत के साथ अपने दिल की बात मान रहे थे, दिल से उठने वाली आवाज़ को लोगों तक पहुंचा रहे थे, जिसे लोगों ने पसंद किया."
जब उन दोनों से पूछा गया कि आप काम कैसे करते हैं, तो उन्होंने कहा, "हम भाई-बहन तो हैं ही, साथ-साथ दोस्त भी हैं. हम बहस करते हैं, लड़ते हैं और इस तरह हम संगीत बनाते हैं."
नाज़िया और ज़ोहैब की जोड़ी में बोल लिखने का काम नाज़िया का था और धुन बनाने की ज़िम्मेदारी ज़ोहैब की थी. नाज़िया भी धुन बनाती थी, लेकिन ज़ोहैब के पास वीटो शक्ति थी, यानी वो धुनों को स्वीकार या अस्वीकार करने का हक़ रखते थे.
इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट YouTube समाप्त, 2
नाज़िया हसन के पहले शिक्षक 'सोहेल अंकल'
नाज़िया हसन अपने संगीत के प्रति आकर्षित होने का श्रेय संगीतकार सोहेल राणा को देती थीं. वो कहती थी कि सोहेल राणा कराची टीवी पर बच्चों का संगीत कार्यक्रम 'संग संग चलते रहना' किया करते थे और उन्होंने ज़ोहैब के साथ उसी टीवी शो से गाना शुरू किया था.
"हम दोनों उनकी स्थायी टीम का हिस्सा नहीं थे, लेकिन जब हम लंदन से कराची जाते थे, तो हम इस शो में शामिल हो जाते थे."
मुनीज़ा बसीर बताती हैं कि प्रोड्यूसर सुल्ताना सिद्दीकी ने इस प्रोग्राम में पहले नाज़िया को रखा था और उसके बाद ज़ोहैब भी प्रोग्राम में शामिल हो गए थे.
सोहेल राणा ने बीबीसी से कहा कि, "मुझे नाज़िया हसन को याद करते हुए गर्व हो रहा है. जब मैं पहली बार नाज़िया से मिला, तब वह छह या सात साल की थीं. वह बहुत ही होशियार और सुंदर लड़की थीं, मैं उन्हें जो भी धुन याद कराता, वह उसे तुरंत याद कर लेती थीं. वह मेरे कार्यक्रम में उन दो-तीन बच्चों में से एक थीं, जो बहुत ख़ास थे."
सोहेल राणा ने बताया कि "नाज़िया और ज़ोहैब ने मेरे गाने याद कर लिए थे. वो दोनों मेरे दो गीत 'आजा चाँद न जा' और 'गाये जा कोयल कू कू, कू कू' शौक़ से गाते थे."
इमेज स्रोत, NAZIA HASSAN FAN PAGE
"एक बहुत ही ख़ूबसूरत आत्मा जो दुनिया में आई थी"
नाज़िया के माता-पिता से घनिष्ठ संबंध रखने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री और सीनेटर जावेद जब्बार का कहना है कि अगर मैं नाज़िया को याद करूं, तो मैं कहूंगा कि वह छोटी सी लड़की थीं, जिसका दिल बहुत बड़ा था.
"वह बहुत होशियार थीं. वह महान कलाकार होने के साथ-साथ एक अच्छी इंसान भी थीं. उनमें जानने और सीखने की क्षमता थी, उन्हें दुनिया के हालात में दिलचस्पी थी."
"सबसे बढ़कर, उनके अंदर इंसानों की भलाई के लिए बहुत कुछ करने का जज़्बा था." उन्होंने अपने छोटे से जीवन में मानवता की भलाई के लिए बहुत कुछ किया. उनका कहना था कि, "हमें उन्हें भूलना नहीं चाहिए और उन्हें याद रखने के साथ-साथ उनके मिशन को आगे बढ़ाना चाहिए."
इमेज स्रोत, NAZIA HASSAN FAN PAGE
'गोल्डन वॉयस' के लिए मेरे पास भी एक नाम है 'माँ'
नाज़िया हसन ज़िन्दगी के अंतिम दिनों में फेफड़ों के कैंसर से लड़ते हुए इस दुनिया से चली गईं.
जब उनका निधन हुआ, तब उनका इकलौता बेटा अरीज़ हसन केवल दो या ढाई साल का था. अरीज़ का कहना है कि उनके दिल और दिमाग़ में उनकी माँ की बस हल्की सी यादें हैं. "वह मुझे चिड़ियाघर ले गई थीं."
उन्होंने कहा, "मेरी माँ को 'गोल्डन वॉयस' और 'पॉप म्यूजिक की पायनियर' के नामों से याद किया जाता है. मेरे पास भी उनके लिए एक नाम है, 'माँ'." वह मेरी माँ थी. जब तक मेरी माँ इस दुनिया में रहीं, उन्होंने इंसानों की भलाई के बारे में सोचा और उनके अभावों को दूर करने की कोशिश की. मैं भी ये कोशिश जारी रखूंगा."
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)
टॉप स्टोरी
ज़रूर पढ़ें
सबसे अधिक लोकप्रिय
सामग्री् उपलब्ध नहीं है