सऊदी अरब: क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन-सलमान पर अमेरिका ने उठाई उंगली, सऊदी ने दिया यह जवाब

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सऊदी अरब की सरकार ने पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या को लेकर अमेरिकी ख़ुफ़िया रिपोर्ट को सिरे से ख़ारिज कर दिया है.

सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने इसे लेकर बयान जारी किया है. इस बयान में कहा गया है, ''सऊदी की सरकार जमाल ख़ाशोज्जी मामले में अपमानजनक और ग़लत निष्कर्ष तक पहुँचने वाली अमेरिकी रिपोर्ट को सिरे से ख़ारिज करती है. हम इस रिपोर्ट को अस्वीकार करते हैं. इस रिपोर्ट में ग़लत निष्कर्ष निकाला गया है.''

सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने कहा है, ''यह एक नकारात्मक और फ़र्ज़ी रिपोर्ट है. हम इस मामले को लेकर पहले ही कह चुके हैं कि वो एक संगीन अपराध था, जिसमें सऊदी अरब के क़ानून और मूल्यों का उल्लंघन किया गया. हमारी सरकार ने इस मामले की जाँच के लिए सभी कड़े क़दम उठाए थे ताकि इंसाफ़ मिल सके. इसमें शामिल लोगों को दोषी ठहराया गया और अदालत ने उन्हें सज़ा भी दी. कोर्ट की सज़ा का जमाल ख़ाशोज्जी के परिवार ने भी स्वागत किया था. हमने वो हर ज़रूरी क़दम उठाए हैं, जिनसे ये सुनिश्चित किया जा सके कि ऐसा अपराध दोबारा ना हो.''

सऊदी के विदेश मंत्रालय ने कहा, ''हम उन हर कोशिश को ख़ारिज करते हैं, जिनसे हमारे नेतृत्व, संप्रभुता और स्वतंत्र न्यायिक व्यवस्था में बाधा उत्पन्न होती है. अमेरिका और सऊदी अरब के बीच की साझेदारी पिछले क़रीब आठ दशकों से काफ़ी मज़बूत रही है. यह साझेदारी पारस्परिक आदर और हितों पर आधारित है. हम इस इलाक़े और पूरी दुनिया में शांति-स्थिरता के लिए काम करते हैं.''

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जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या 2018 में 20 अक्टूबर को हुई थी. इस हत्या को अंजाम इस्तांबुल स्थित सऊदी अरब के वाणिज्य दूतावास में दिया गया था. इस मामले में सऊदी प्रशासन ने जाँच के लिए 18 लोगों को गिरफ़्तार किया था.

पिछले साल मई महीने में जमाल ख़ाशोज्जी के बेटे ने कहा था कि उन्होंने अपने पिता के सभी हत्यारों को माफ़ कर दिया है. दिसंबर 2019 में सऊदी अरब की एक अदालत ने इस मामले में पाँच लोगों को फांसी की सज़ा सुनाई थी और तीन अन्य को 24-24 साल की क़ैद.

सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अमेरिकी ख़ुफ़िया रिपोर्ट अफ़सोसनाक है और यह रिपोर्ट ग़लत निष्कर्ष तक गई है. मंत्रालय ने कहा है, ''यह रिपोर्ट अफ़सोसनाक है. इसमें कुछ भी सच्चाई नहीं है. बिल्कुल ग़लत निष्कर्ष निकाला गया है. सऊदी अरब इस संगीन अपराध को लेकर बहुत गंभीर है और ऐसी कोशिश कर रहा है कि दोबारा इस तरह के अपराध ना हों. हम अपने नेतृत्व को लेकर किसी भी पूर्वाग्रह को सिरे से नकारते हैं.''

2019 में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन-सलमान ने सीबीएस से कहा था कि वे जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या की पूरी ज़िम्मेदारी लेते हैं लेकिन उन्होंने इस बात से इनकार किया था कि उनके आदेश पर हत्या की गई थी.

क्राउन प्रिंस ने कहा था, ''जब सऊदी के नागरिक के ख़िलाफ़ अपने ही अधिकारियों की ओर से कोई अपराध होता है तो एक नेता के तौर पर मेरी ज़िम्मेदारी बनती है. वह एक ग़लती थी. मैं वो हर क़दम उठाऊंगा जिनसे इस तरह का अपराध दोबारा नहीं हो सके.''

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जमाल ख़ाशोज्जी से परेशान हाउस ऑफ साऊद

सऊदी अरब के पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी ने जीवित रहते सऊदी सरकार और शाही परिवार को जितना परेशान किया, उनकी मौत के बाद सरकार और शाही परिवार की परेशानियां कहीं बढ़ी हुई नज़र आ रही हैं.

उनकी हत्या किसने की, किसके आदेश पर हुई, हत्या कैसे हुई और हत्या के बाद उनकी लाश कहां गई. इन तमाम सवालों के जवाब अभी भी तलाशे जा रहे हैं.

जवाब की तलाश में शक़ की सुई घूम फिरकर सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की ओर पहुंच जाती है.

भले ही सऊदी के सरकारी अभियोजकों ने अपनी जांच में पाया है कि प्रिंस सलमान ने ख़ाशोज्जी की हत्या का आदेश नहीं दिया था और उन्हें इस हत्या के बारे में भनक तक नहीं थी फिर भी दुनिया के तमाम देश इस बात पर संदेह कर रहे हैं.

बीबीसी संवाददाता फ़्रैंक गार्डनर का कहना है कि सीआईए की रिपोर्ट से कई पश्चिमी देश सहमत नज़र आते हैं. इसका आधार असल में वाशिंगटन में मौजूद प्रिंस सलमान के भाई प्रिंस ख़ालिद बिन सलमान और ख़ाशोज्जी के बीच फ़ोन पर हुई बातचीत है.

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ख़ालिद बिन सलमान ने कथित तौर पर ख़ाशोज्जी को भरोसा दिया था कि वो दूतावास में सुरक्षित रहेंगे. यहीं पर बाद में ख़ाशोज्जी की हत्या हुई थी.

फ़्रैंक गार्डनर बताते हैं कि प्रिंस सलमान पर शक़ होने की दूसरी वजह वो फ़ोन कॉल है जो हत्या वाले दिन किया गया था. ये फ़ोन कॉल दूतावास में ख़ाशोज्जी के साथ हाथापाई करने वाली टीम की ओर से रियाद में मौजूद प्रिंस सलमान के किसी ख़ास व्यक्ति को किया गया था.

इन दोनों फ़ोन कॉल के बाद ये विश्वास करना ही मुश्किल है कि प्रिंस सलमान को इस हत्या से जुड़ी कोई जानकारी नहीं रही होगी. गार्डनर कहते हैं इस पूरे प्रकरण के चलते अब पश्चिमी देश प्रिंस सलमान और सऊदी सरकार की ओर शक़ भरी निगाहों से देख रहे हैं.

गार्डनर मानते हैं कि इसका सबसे पहला असर सऊदी अरब की विदेश नीति पर पड़ेगा. पश्चिमी देश सऊदी अरब पर यमन के साथ चल रहे युद्ध को समाप्त करने का दबाव बनाएंगे. इस युद्ध के चलते हज़ारों लोगों की मौत हो रही है.

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पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी सऊदी मूल के पत्रकार थे. वह क्राउन प्रिंस सलमान के बड़े आलोचकों में से एक थे. 2018 में तुर्की के इस्तांबुल में सऊदी उच्चायोग में सऊदी एजेंट्स ने उनकी हत्या कर दी और उनके शव को टुकड़ों में काटकर उसे ठिकाने लगा दिया.

अमेरिका की तरफ़ से इस रिपोर्ट के जारी होने के बाद बाइडन सरकार में अमेरिका और सऊदी के रिश्ते कैसे होंगे, इसका अंदाज़ा लग जाता है.

रिपोर्ट जारी होने से पहले राष्ट्रपति बाइडन ने सऊदी के किंग सलमान से बात की थी और कहा था कि उनकी सरकार के लिए मानवाधिकार और क़ानून का राज सबसे अहम है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार बाइडन प्रशासन सऊदी अरब से हथियार डील रद्द करने पर विचार कर रहा है.

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