ओबामा ने तोड़ी परंपरा, इस बार सार्वजनिक रूप से ट्रंप पर बरसे

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अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कोविड-19 की महामारी से निपटने के ट्रंप प्रशासन के तौर तरीक़ों की कड़ी आलोचना की है.

ओबामा ने कहा कि ट्रंप प्रशासन के कई अधिकारी तो ढोंग करने के बहाने भी ज़िम्मेदारी उठाते हुए नहीं दिखे.

पूर्व राष्ट्रपति कॉलेज और विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले ब्लैक स्टूडेंट्स के दीक्षांत समारोह को ऑनलाइन संबोधित कर रहे थे.

ओबामा ने ये भी कहा कि गोरे लोगों की तुलना में काले समुदाय पर कोरोना वायरस का जिस बड़े पैमाने पर असर हो रहा है, उसने अमरीकी व्यवस्था की कमियों को उजागर कर दिया है.

कोविड-19 की महामारी के दौरान ओबामा को सार्वजनिक तौर पर संबोधित करते हुए कम ही देखा गया है.

ओबामा ने छात्रों से कहा, "इस महामारी ने एक बात तो साफ़ कर दी है कि ज़िम्मेदार पदों पर बैठे बहुत से लोग ये जान गए हैं कि वे क्या कर रहे हैं. उनमें बहुत से लोग तो अब ये दिखावा भी नहीं कर रहे हैं कि वे किसी चीज़ के लिए ज़िम्मेदार हैं."

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अमरीकी स्वास्थ्य व्यवस्था

शनिवार को पूर्व राष्ट्रपति ओबामा ने बताया कि कोरोना संकट ने किस तरह से अमरीकी स्वास्थ्य व्यवस्था में नस्लीय ग़ैर-बराबरी को सामने लाकर रख दिया है.

अमरीकी स्वास्थ्य व्यवस्था में नस्लीय ग़ैर-बराबरी पर ओबामा ने कहा, "इस तरह की बीमारी पहले से मौजूद असमानता को उजागर कर देती है. इस देश में काले लोगों को ऐतिहासिक रूप से जिन हालात का सामना करना पड़ता है, उसका बोझ अलग से है."

"कोविड-19 की महामारी का हमारे समुदाय पर ज़्यादा असर पड़ रहा है, हम इसे इसी तरह से देखते हैं. ठीक इसी तरह से हम देखते हैं कि एक काला आदमी सुबह जॉगिंग पर जाता है और कुछ लोग सोचते हैं कि वे उसे रोक सकते हैं, सवाल पूछ सकते हैं और जवाब न मिलने की सूरत में उसे गोली मार सकते हैं."

ओबामा ने अहमद आर्बरी की हत्या पर बिना उनका नाम लिए नाराज़गी जताई. 23 फ़रवरी को जॉर्जिया में जॉगिंग के दौरान इस 25 वर्षीय नौजवान की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

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डोनाल्ड ट्रंप पर टिप्पणी

वे महामारी के प्रभाव के बारे में बात कर रहे थे, हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया.

साल 2017 में पद छोड़ने के बाद से बराक ओबामा ने सुर्खियों से दूरी बना रखी थी, सार्वजनिक तौर पर शायद ही उन्होंने इस बीच कोई बयान दिया हो.

वे आम तौर पर ट्रंप पर टिप्पणी करने को लेकर बचते रहे हैं लेकिन आठ मई को अपने पूर्व सहयोगियों और अधिकारियों से बातचीत में उन्होंने ट्रंप के कामकाज पर काफ़ी तल्ख़ टिप्पणी की थी.

उन्होंने कहा था, "ऐसा कोई उदाहरण नहीं खोजा जा सकता कि किसी व्यक्ति पर शपथ लेकर झूठ बोलने का आरोप लगे और उसे यूं ही छोड़ दिया जाए. ये वो बात है जो आपको परेशान करती है. ये केवल निर्धारित प्रक्रियाओं और नियम-क़ायदों की बात नहीं है बल्कि क़ानून के शासन को लेकर हमारी बुनियादी समझ पर ख़तरा है."

उस वक़्त ओबामा का इशारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व सुरक्षा सलाहकार के माइकल फ़्लिन के ख़िलाफ़ सभी आरोप रद्द करने के फ़ैसले की ओर था.

कोरोना वायरस

राष्ट्रपति ट्रंप अपने पूर्ववर्ती राष्ट्रपतियों पर इल्ज़ाम लगाने में कभी हिचके नहीं. हालांकि इसके बावजूद परंपरा का ख्याल रखते हुए अमरीका के पहले ब्लैक प्रेजिडेंट ने हाल तक अपने पूर्ववर्ती राष्ट्रपति की सार्वजनिक तौर पर ओलचना करने से बचते रहे.

लेकिन इस महीने की शुरुआत में ओबामा और उनके प्रशासन के लिए काम कर चुके अधिकारियों की एक ऑनलाइन बातचीत लीक हो गई.

उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस से फैली महामारी से ट्रंप प्रशासन जिस तरह से हैंडल कर रहे हैं वो तबाही की ओर जाता है.

ओबामा ने इस वेब कॉल के दौरान कहा, "कोई बहुत अच्छी सरकार होती तो उसके साथ भी बुरा हो सकता था. लेकिन अगर कोई ये धारणा रखे कि 'इसमें मेरे लिए क्या अवसर है' तो बर्बादी का रास्ता है."

अमरीका में कोरोना वायरस से 14 लाख लोग संक्रमित हैं और मरने वालों की संख्या तकरीबन 90 हज़ार हो गई है.

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