मुशर्रफ़ को लेकर सेना और वकील आमने-सामने

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पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ को फांसी की सज़ा देने के विशेष अदालत के फ़ैसले की निंदा करने वाले पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ़ ग़फ़ूर के बयान को पाकिस्तान बार काउंसिल ने अस्वीकार कर दिया है.

पाकिस्तान बार काउंसिल के चेयरमैन एग्ज़िक्यूटिव कमेटी शेर मोहम्मद ख़ान और डिप्टी-चेयरमैन सैयद अमजद शाह की तरफ़ से जारी बयान में कहा गया है कि पाकिस्तान बार काउंसिल डायरेक्टर जनरल आईएसपीआर के इस बयान को रद्द करती है.

ग़ौरतलब है कि इससे पहले पाकिस्तानी सेना के जनसंपर्क विभाग के डायरेक्टर मेजर जनरल आसिफ़ ग़फ़ूर ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस करते हुए कहा था कि जनरल (रिटायर्ड) परवेज़ मुशर्रफ़ से जुड़ा 17 दिसंबर का जो फ़ैसला आया था उसकी प्रतिक्रिया में जिन चिंताओं के बारे में बताया था आज के फ़ैसले में वो चिंताएं सही साबित हो रही हैं.

इस फ़ैसले के बाद पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता का कहना था कि जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ किसी सूरत में ग़द्दार नहीं हो सकते और ये कि विशेष अदालत के फ़ैसले पर पाकिस्तानी सेना में भारी ग़ुस्सा और चिंता है.

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पाकिस्तान बार काउंसिल की ओर से जारी बयान में कहा गया, "हमारी ये ठोस राय है कि डीजीआईएसपीआर का बयान संविधान और क़ानून विरोधी है और ये अदालत की अवमानना में आता है.

बयान में कहा गया है, "अगर डीजीआईएसपीआर की राय में मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ फ़ैसले में कोई ख़ामी थी तो क़ानूनी प्रक्रिया के तहत और रास्ते भी हैं जिसमें उन ख़ामियों की तरफ़ ध्यान दिलाया जा सकता है. इसके तहत ऊपरी अदालत में अपील की जा सकती है लेकिन जिस अंदाज़ में फ़ौज के एक अधिकारी ने न्यायपालिका के फ़ैसले पर टिप्पणी की है उससे इस धारणा को बल मिलता है कि देश के सभी संस्थान सेना के अंदर हैं और उसके आदेश पर चलते हैं और न्यायपालिका समेत किसी संस्थान की कोई इज़्ज़त नहीं है."

इसके साथ ही कहा गया है, "देश की सरकार, उसके मंत्री, अटॉर्नी जनरल और क़ानूनी सलाहकार की तरफ़ से जो रवैया अपनाया गया है उससे ज़ाहिर होता है कि सत्तारूढ़ दल को फ़ौज ने सत्ता में बैठाया हो और ये संगठन ही मुल्क चला रहा हो और इसी वजह से वो एक ही आवाज़ में न्यायपालिका के फ़ैसले पर टिप्पणी कर रहे हैं."

बयान के आख़िरी हिस्से में एक बार फिर फ़ौज के अफ़सर और सरकारी अधिकारियों के रवैए पर टिप्पणी करते हुए इसे 'न्यायपालिका और न्याय देने के संवैधानिक प्रक्रिया का उपहास उड़ाने वाला क़रार दिया है.'

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डीजीआईएसपीआर ने क्या कहा था

इससे पहले पाकिस्तानी सेना ने विशेष अदालत के इस फ़ैसले पर कड़ा ऐतराज़ जताया था.

पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ़ ग़फ़ूर ने बयान जारी करके कहा था कि जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ अदालत के फ़ैसले से सेना को धक्का लगा है और यह काफ़ी दुखद है.

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ग़फ़ूर ने अपने बयान में कहा था, ''पूर्व सेना प्रमुख और पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ ने मुल्क की 40 सालों तक सेवा की है. जिस व्यक्ति ने मुल्क की रक्षा में जंग लड़ी वो कभी देशद्रोही नहीं हो सकता है. इस अदालती कार्यवाही में संविधान की भी उपेक्षा की गई है."

"यहां तक कि अदालत में ख़ुद का बचाव करने का भी मौक़ा नहीं दिया गया, जो बुनियादी अधिकार है. बिना ठोस सुनवाई के जल्दबाज़ी में फ़ैसला सुना दिया गया है.''

ग़फ़ूर ने कहा कि पाकिस्तान की सेना उम्मीद करती है कि अदालती फ़ैसले मुल्क के संविधान के हिसाब से हो.

अभी जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ दुबई में हैं. वो अस्पताल में भर्ती हैं. एक वीडियो स्टेटमेंट में मुशर्रफ़ ने अस्पताल से कहा था, ''कोर्ट का फ़ैसला बिल्कुल बेबुनियाद है. हमने 10 साल तक मुल्क़ और सेना को लीड किया. मैंने पाकिस्तान के लिए युद्ध भी लड़ा. हमें प्रताड़ित किया गया है.''

मुशर्रफ़ की टीम इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में जाने की तैयारी कर रही है. अगर सुप्रीम कोर्ट भी इस फ़ैसले पर मुहर लगा देता है तो देश के राष्ट्रपति संवैधानिक अधिकार के तहत मौत की सज़ा माफ़ कर सकते हैं.

मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ देशद्रोह का मामला तीन नवंबर 2007 को पाकिस्तान में आपातकाल लगाने से जुड़ा हुआ है. यह मामला 2013 से ही लंबित था. 1999 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ का तख़्तापलट कर मुशर्रफ़ सत्ता में आए थे.

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