मां को खिलाई वायाग्रा, बच्चों की मौत
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नीदरलैंड्स में गर्भवती महिलाओं पर वायाग्रा के चिकित्सीय परीक्षण को 11 नवजातों की मौत के बाद तुरंत रोक दिया गया है.
शोध में हिस्सा ले रही महिलाओं को यौनवर्धक दवा वियाग्रा दी जा रही थी. ये शोध उन महिलाओं पर किया जा रहा था जिनमें गर्भस्थ शिशु की गर्भनाल कमज़ोर थी.
ऐसा प्रतीत हो रहा है कि शरीर में रक्त प्रवाह बढ़ा देने वाली इस दवा से बच्चों के फेफड़ों के गंभीर नुकसान पहुंचा है.
विशेषज्ञों का कहना है कि असल में क्या हुआ है, ये समझने के लिए विस्तृत जांच की ज़रूरत है.
इससे पहले ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड में किए गए इसी तरह के शोध में किसी तरह के नुक़सान सामने नहीं आए थे. लेकिन किसी फ़ायदे का पता भी नहीं चल सका था.
बीमार बच्चे
कमज़ोर गर्भनाल की वजह से अजन्मे बच्चों का विकास रुक जाना एक गंभीर बीमारी है जिसका अभी कोई इलाज विकसित नहीं किया जा सका है.
इसकी वजह से बच्चे समय से पहले जन्म ले लेते हैं. कमज़ोर होने की वजह से उनके बचने की संभावना भी कम ही रहती है.
ऐसी दवा जो शिशुओं का वज़न बढ़ा सके या उनके जन्म के समय को आगे बढ़ा सके, मददगार हो सकती है.
डमी दवा
शोध के दौरान कुल 93 महिलाओं को वायाग्रा दी गई जबकि 90 महिलाओं को एक डमी दवा दी गई.
जन्म के बाद बीस बच्चों को फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां हो गई. इनमें से तीन वो बच्चे थे जिनकी मां को डमी दवा दी गई थी जबकि बाकी सब दूसरे समूह की महिलाओं के बच्चे थे. इनमें से 11 बच्चों की मौत हो गई.
ब्रिटेन में हुए ऐसे ही शोध में हिस्सा लेने वाले यूनिवर्सिटी ऑफ़ लीवरपूल के प्रोफ़ेसर जार्को अल्फिरेविच कहते हैं कि नीदरलैंड्स में हुए शोध के ये नतीजे अप्रत्याशित हैं.
वो कहते हैं कि ब्रिटेन, न्यूज़ीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में हुए ऐसे ही शोध में इस तरह की जटिलताएं सामने नहीं आईं थीं इसलिए इसकी विस्तृत जांच किए जाने की ज़रूरत है.
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