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वुसत का ब्लॉगः पाकिस्तानी चुनाव में खड़े एक से बढ़कर एक ग़रीब नेता
- Author, वुसअतुल्लाह ख़ान
- पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, पाकिस्तान से बीबीसी हिंदी के लिए
पाकिस्तान में चुनावी अभियान को दूसरा गियर लग गया है, जितने भी उम्मीदवार हैं उन्होंने अपनी-अपनी पूंजी, कारोबार और ज़मीन की वैल्यू चुनावी कमिश्न को कसमें खाके सच-सच बता दी है.
इससे अंदाज़ा होता है कि जिन्हें हम अमीर समझते थे वो बेचारे तो हम जैसे मिडिल या अपर-मिडिल क्लासिए निकले और जिन्हें हम ग़रीब समझकर धुत कर दिया करते थे उनके पास इतना धन है कि पाकिस्तान चाहे तो आईएमएफ़ को कर्ज़ा देना शुरू कर दे.
जैसे पंजाब के ज़िला मुज़फ़्फरगढ़ के एक आज़ाद उम्मीदवार मोहम्मद हुसैन शेख़ ने संपत्ति घोषणापत्र में लिखा है कि वो 40 हज़ार करोड़ रुपये से ज़्यादा की ज़मीन के मालिक हैं. इस एतबार से वो चुनाव लड़ने वाले सबसे अमीर उम्मीदवार ठहरे.
जबकि जाने-माने इमरान ख़ान ने बताया कि इस्लामाबाद की बनी गाला पहाड़ी पर उनका तीन सौ कनाल का घर 30 लाख रुपये का है, कोई ज़ाति गाड़ी नहीं, 14 घर बाप-दादा से मिले हैं, हवाई-जहाज़ का टिकट यार-दोस्त खरीदकर दे देते हैं. इतने ग़रीब हैं कि पिछले वर्ष बमुश्किल 1 लाख 4 हज़ार रुपये इनकम टैक्स दे पाए.
आसिफ़ ज़रदारी के बारे में जाने क्या-क्या उलट-सुलट उड़ाई जाती रही कि वो सिंध की आधी सुगर मिलों के मालिक हैं, दुबई और ब्रिटेन में हवेलियां हैं, हज़ारों एकड़ ज़मीन है, अरबों रुपयों की बेनाम इनवेस्टमेंट है, मगर ऐसा कुछ भी नहीं.
कुल मिलाकर उनकी घोषित संपत्ति की वैल्यू बनती है सिर्फ 75 करोड़ रुपये यानी भारत के हिसाब से 38 करोड़ रुपये.
ज़रदारी के बेटे बिलावल भुट्टो कराची के इलाके क्लिफ़टन में चार हज़ार गज़ के घर में रहते हैं इस घर के बराबर में गुज़रने वाली आधी सड़क पर भी बस उन्ही की गाड़ी चलती है. मगर इस घर की वैल्यू 30 लाख रुपये डिक्लेयर की गई है. जबकि आगे-पीछे की गलियों में जितने और लोगों के घर हैं उनमें से कोई भी 30-40 करोड़ रुपये से कम का नहीं.
मुझ समेत हज़ारों लोगों ने कहा है कि वो बिलावल का 30 लाख का घर 60 लाख से 1 करोड़ रुपये में खरीदरने को तैयार हैं. मगर बिलावल कहते हैं नहीं बेचूंगा.
नवाज़ शरीफ़ की हालत सबसे पतली है. लाहौर जाते हैं तो बेचारे अम्मा के मकान में. मरी जाते हैं तो बीवी के मकान में और लंदन जाते हैं तो बेटे के फ्लैट में बिस्तर बिछा लेते हैं.
कारोबार कोई है नहीं बच्चे जेबखर्च देते हैं. जबकि उनके भाई शहबाज़ शरीफ़ और बेटे हमजा की कुल मिलाकर डेढ़ से दो अरब रुपये की संपत्ति है.
ये सब नेता जो देश के सबसे बड़े तीन राजनीतिक गुटों के देवता हैं. हर पांच वर्ष बाद एक ऐसा नया पाकिस्तान बनाना चाहते हैं जिसमें हर शख्स टैक्स दे और सच बोले. और उनकी पार्टी सत्ता में आकर ऐसे कानून बनाए जिनके ज़रिए अमीर बेतहाशा अमीर और ग़रीब बेतहाशा ग़रीब ना होता चला जाए.
और अर्थव्यवस्था कुछ ऐसी हो जाए कि पाकिस्तान एशियन टाइगर बनकर दहाड़े. रही जनता तो वो हर चुनावी अभियान में पुराने ख़्वाब नई पैकिंग में खरीदने के लिए बार-बार टूटी पड़ती है.
अब अगर जनता ये भी न करे तो फिर इन मूर्खों को जनता कौन कहे!
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