चीन की DF-26 मिसाइल के निशाने पर कौन शहर

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चीनी मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक़ पीपल्स लिबरेशन आर्मी की रॉकेट यूनिट में डीएफ-26 मिसाइलों के एक नए ब्रिगेड को सौंपा है, जिसमें भारत के अहम शहरों तक मार करने की क्षमता है.
गूगल अर्थ इमेज के विश्लेषण से पता चलता है कि डीएफ-26 दक्षिणी हेनान प्रांत में स्थित हो सकता है.
डोंगफेंग-26 या डीएफ-26 एक इंटरमीडिएट बैलिस्टिक मिसाइल है जो तीन से चार हज़ार किलोमीटर तक की मार कर सकता है.
हालांकि सैटेलाइट इमेजरी विश्लेषक रिटायर्ड कर्नल विनायक भट्ट का कहना है कि यह तथ्यात्मक तौर पर ग़लत दावा है.
तीन दशकों से भी अधिक भारतीय सेना के साथ जुड़े रहने वाले भट्ट ने द प्रिंट में लिखा है कि डीएफ-26 के एक ब्रिगेड की चीनी सेना में शामिल होने की चार साल पहले चर्चा थी जबकि इसी साल जनवरी में डीएफ-17 मिसाइलों के परीक्षण की ख़बर आई थी.
उनका कहना है कि पहली बार इसका प्रदर्शन 3 सितंबर 2015 को आयोजित विक्ट्री डे परेड में किया गया था. यह मानते हुए कि इसका प्रमुख निशाना पश्चिम प्रशांत महासागर स्थिति अमरीकी द्वीप गुआम होगा, इसे गुआम एक्सप्रेस या गुआम किलर का नाम दिया गया था.
चीन की सरकारी विज्ञप्ति के मुताबिक चीन की यह मिसाइल पूरी तरह से स्वदेशी है. यह पारंपरिक और परमाणु दोनों प्रकार के हथियारों को ले जाने में सक्षम है.

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मिसाइल की जद में कौन-कौन?
डीएफ-26 की रेंज चार हज़ार किलोमीटर बताई जा रही है जबकि इसके निशाने पर विशेषज्ञों के लगाए अनुमान के मुताबिक़ गुआम और भारतीय इलाक़े हैं.
मुंबई इसके रेंज में आने वाला सुदूर इलाक़ा है जो चीन से 4,350 किलोमीटर दूर है जबकि भारत के अन्य महानगरों की दूरी चार हज़ार किलोमीटर से कम है. वहीं गुआम की चीन से दूरी 3,750 किलोमीटर के क़रीब है.

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गुआम है अमरीकी सैन्य ठिकाना
अमरीका ने इस द्वीप के उत्तरी किनारे पर घने जंगलों के बीचों-बीच अपना एक विशाल एयरबेस बनाया हुआ है.
इस एयरबेस के रनवे पर बी1 बमवर्षकों का एक बेड़ा हर समय तैयार रहता है ताकि उत्तर कोरिया के दक्षिण कोरिया पर हमला बोलने की स्थिति में जवाब दिया जा सके.
गुआम उत्तर कोरिया के क़रीब का अमरीकी इलाक़ा है. दोनों के बीच की दूरी 3427 किलोमीटर की दूरी है.
यह दूरी हवाई और गुआम के बीच की आधी है. गुआम और हवाई के बीच की दूरी 6373 किलोमीटर है.
इसका क्षेत्र 210 वर्ग मील में फैला हुआ हुआ है जो क़रीब शिकागो के बराबर है.
चीन की ताक़त अमरीका की परेशानी?
चीन साबित करने की कोशिश कर रहा है कि उसके पास अब वो क्षमता है जिसके बारे में पहले ये माना जाता था कि ये केवल अमरीका और रूस के पास है.
चीन इस ख़ास क्लब का तीसरा मेंबर बन गया है. भारत ने जो ब्रह्मोस बनाया था वो एक हाइपर सोनिक क्रूज़ मिसाइल है.
चीन ने अब जो बनाया वो हाइपर सोनिक बैलिस्टिक मिसाइल है. चीन-अमरीका-रूस के बीच एक तरह से एक आर्म्स रेस शुरू हो गई है.
चीन अमरीका से चिंतित है, अमरीका रूस की परमाणु क्षमता से चिंतित है तो रूस चीन के उभरते हुए स्वरूप से चिंतित है.
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