'बिना प्रमाण आरोप न लागाएं'- हरीश रावत

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उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी के नेता हरक सिंह रावत पर लगे बलात्कार के आरोप वापस लिए जाने और इस मामले में प्रदेश के मुख्यमंत्री हरीश रावत का नाम घसीटे जाने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा है कि उनका नाम राजनीतिक कारणों से लिया जा रहा है.
बुधवार को एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि बिना प्रमाण के उन पर कोई आरोप न लगाए जाएं. उन्होंने यह भी कहा कि ज़रूरत पड़ी को वे जांच के लिए तैयार हैं.
शिकायतकर्ता महिला ने नौएडा से प्रसारित होने वाले एक चैनल पर बुधवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत पर आरोप लगाया था कि मुख्यमंत्री के लोगों ने उन्हें डराया धमकाया है.

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हरक सिंह के पीआरओ विजय सिंह चौहान ने बीबीसी को बताया था कि हरक सिंह पर बलात्कार का आरोप लगाने वाली शिकायतकर्ता महिला ने अब यह आरोप वापस ले लिया है.
बीते शुक्रवार की रात दिल्ली के सफ़दरजंग एनक्लेव थाने में एक 32 वर्षीय महिला ने हरक सिंह रावत पर बलात्कार का आरोप लगाया था. राजनीतिक रूप से संवेदनशील इस मामले पर दिल्ली पुलिस के अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं थे.
शिकायतकर्ता का कहना था कि नौकरी दिलाने का झांसा देकर हरक सिंह रावत ने दिल्ली के ग्रीनपार्क स्थित अपने घर में उनका बलात्कार किया.
विजय सिंह चौहान के अनुसार शिकायतकर्ता महिला ने 2003 में भी हरक सिंह रावत पर यौन शोषण का आरोप लगाया था.

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उस दौरान नारायण दत्त तिवारी सरकार में हरक सिंह मंत्री थे. महिला ने उन पर अपने नवजात बच्चे का पिता होने का आरोप लगाया था.
मामले के तूल पकड़ने के बाद हरक सिंह को इस्तीफ़ा देना पड़ा था, हालांकि बाद में सीबीआई जांच में उन्हें क्लीन चिट मिल गई.
एक बार फिर हरक सिंह पर आरोप लगते ही राज्य में राजनीतिक भूचाल आ गया क्योंकि उन्हें इस साल मार्च में कांग्रेस में हुई बग़ावत का मुख्य कारक माना जाता है.
उत्तराखंड की हरीश रावत सरकार में मंत्री हरक सिंह उन नौ विधायकों में शामिल थे जिन्होंने वित्त विधेयक पर राज्य सरकार के ख़िलाफ़ मतदान किया था.
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