'ये गंगा उल्टी ही बहती रहे तो बेहतर'

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आपने मारधाड़ से भरपूर वो फ़िल्में ज़रूर देखी होंगी, जिनमें तोपें गरज रही हैं, टैंक अपनी नालों से आग उगल रहे हैं.

लड़ाकू विमान सैकड़ों बम गिरा रहे हैं. सैनिक एक दूसरे को गोलियों से छेद रहे हैं, नेता लोगों के मुंह से झाग निकल रही है, इत्यादि, इत्यादि.

अब एक काम करें, ऐसी किसी भी फ़िल्म को उलटा चला दें. आप देखेंगे कि गोला आगे जाकर फटने के बजाए वापस तोप और टैंक के मुंह में जा रहा है.

विमानों से गिरते बम, नीचे गिरने की बजाए ऊपर जाकर विमान से चिपक रहे हैं. एक दूसरे पर बंदूकें ताने सैनिक आगे बढ़ने की बजाए, उन्हीं क़दमों से पीछे की तरफ़ जा रहे हैं और नेताओं के मुंह से उड़ने वाली झाग वापस उनके मुंह में जमा हो रही है.

अब जरा आंखें बंदकर सोचें कि आपके आसपास कौन कौन सी फ़िल्म आजकल उल्टी चल रही है?

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एक दूसरे को किसी भी मंडप पर देखकर मुंह फेर कर निकल जाने वाले या फिर, किसी अख़बार से आंखें छुपाने वाले नवाज़ शरीफ़ और नरेंद्र मोदी, आगे बढ़कर झप्पम झप्पी क्यों हो रहे हैं?

जबकि हमारी नस्लें तो पाकिस्तान और भारत के नेताओं को उधार की मुस्कुराहट सजाए, फोटो खिंचवाते देखने की आदी हैं ना.

पहले गाली, फिर पाकिस्तान के फार्मूले पर चलने वाला भारतीय इलेक्ट्रानिक मीडिया और पहले मुंह बिगाड़कर, फिर भारत का नाम लेने वाला पाकिस्तानी मीडिया, इतना ठंडा ठंडा क्यों चल रहा है? क्या इन्हें आग लगाने वाली रेटिंग नहीं चाहिए?

पठानकोट एयरबेस पर चरमपंथी हमले की जिम्मेदारी सबसे पहले अपने सिर मढने वाले हिजबुल मुजाहिदीन के सैयद सलाउद्दीन आल पार्टी हुरियत कांफ्रेंस के मौलवी उमर फ़ारुख़ की पहले की तरह सराहना क्यों नहीं कर रहे?

वह क्यों कह रहे हैं कि भारत और पाकिस्तान चरमपंथियों की चाल में फंसने के बजाए शांति की पगडंडी पर चलते रहें, इसी में दक्षिण एशिया का भला है.

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एक दूसरे को शैतान और मध्यपूर्व में चरमपंथ की फैक्ट्री कहे बगैर एक दूसरे का नाम नहीं लेनेवाले ईरानी और अमरीकी इन दिनों हाथों में हाथ दिए मुस्कुरा क्यों रहे हैं?

और ईरान और अमरीका की दुश्मनी पर कल तक बिगुल बजाने वाले इसराइली और सऊदी, आज अमरीका और ईरान को इतनी बुरी तरह क्यों घूर रहे हैं?

ताइवान को कहीं से भी एक और बंदूक मिलने पर हवा में मुक्के चलाने वाले चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ताईवान की पहली महिला राष्ट्रपति साय वेंग को चुनाव जीतने पर बधाई क्यों भेज रहे हैं?

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जिनपिंग पहले की तरह क्यों नहीं कह रहे हैं कि ताईवान चीन का अटूट हिस्सा है और रहेगा? ये संसार में हो क्या रहा है, हर फ़िल्म उल्टी क्यों चल रही है?

गंगा उल्टी क्यों बह रही है? मेरी समझ में तो नहीं आ रहा है, आपकी समझ में आ रहा है क्या? काश, गंगा उल्टी ही बहती रहे.

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