एएमयू पोस्टर विवाद: योगी सरकार के मंत्री बोले मंजूर नहीं 'तालिबानी सोच', होगी कड़ी कार्रवाई

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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रोक्टर प्रोफ़ेसर मोहम्मद वसीम अली ने बताया है कि कुलपति प्रोफ़ेसर तारिक़ मंसूर के ख़िलाफ़ लगाए गए पोस्टर हटा दिए गए हैं. ये पोस्टर 23 और 24 अगस्त के बीच की रात में लगाए गए थे.

प्रोक्टर वसीम अली के मुताबिक यूनिवर्सिटी के कुलपति ने उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री 'कल्याण सिंह ने निधन पर शोक व्यक्त किया' था. ये पोस्टर इसके बाद ही लगाए गए थे और इनमें कुलपति के शोक जाहिर करने को 'शर्मनाक़' बताया गया था.

इन पोस्टरों की जानकारी सामने आने के बाद से अलीगढ़ से लेकर लखनऊ और दिल्ली तक बयानों का दौर शुरू हो गया और एक नया विवाद शुरू हो गया.

उत्तर प्रदेश सरकार ने इसे 'माहौल बिगाड़ने की कोशिश' बताते हुए पोस्टर लगाने वालों को चेतावनी दी है और कहा है कि यूनिवर्सिटी में 'तालिबानी मानसिकता' नहीं चलने दी जाएगी.

वहीं भारतीय जनता पार्टी ने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 'देश और समाज विरोधी लोगों से निपटना जानते हैं.'

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उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का लंबी बीमारी के बाद शनिवार को निधन हो गया था. 89 वर्ष की उम्र में आखिरी सांस लेने वाले कल्याण सिंह अलीगढ़ के रहने वाले थे और उन्होंने अपनी राजनीति की शुरुआत भी यहीं से की थी.

कल्याण सिंह के निधन के बाद अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के कुलपति ने शोक जाहिर किया था. विवाद की वजह बने पोस्टर इसी के बाद लगाए गए.

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पोस्टर में क्या लिखा था?

यूनिवर्सिटी के प्रोक्टर प्रोफ़ेसर वसीम अली ने बताया, "ये पोस्टर यूनिवर्सिटी की जामा मस्जिद की बाहरी दीवार पर लगाए गए थे. दो-तीन पोस्टर एक दूसरी जगह ज़मीन पर मिले थे. मैं अपने सूत्रों के जरिए पता कर रहा हूं कि ये पोस्टर किसने लगाए थे. "

उन्होंने आगे कहा, "जब ये (पोस्टर लगाना) मेरी जानकारी में आया तो मैंने पोस्टर हटवा दिए."

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक पोस्टर में लिखा था, "अपराधी के लिए दुआ करना ना काबिल-ए-माफी अपराध है. "

पोस्टर में लिखा था, "उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के निधन पर एएमयू के वीसी का शोक संवेदना जाहिर करना न सिर्फ़ शर्म का मामला है बल्कि इससे हमारे समुदाय की धार्मिक भावनाओं को भी चोट पहुंचती है. "

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पोस्टर में आरोप लगाया गया, "कल्याण सिंह न सिर्फ़ बाबरी मस्जिद ध्वंस के मुख्य दोषी हैं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं करने के भी अपराधी हैं. "

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सरकार की चेतावनी

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री मोहसिन रज़ा ने इस मामले को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी.

उन्होंने कहा कि कुलपति ने 'हमारी संस्कृति' के मुताबिक व्यवहार किया. लेकिन ऐसे पोस्टर लगाना माहौल को दूषित करने की कोशिश है.

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उन्होंने कहा, " ये हिंदुस्तान की यूनिवर्सिटी है. यहां तालिबान नहीं हैं. ये माहौल को दूषित करने की कोशिश है. अगर वहां (यूनिवर्सिटी में) कुछ लोग तालिबानी सोच के हैं तो हम उनका इलाज उसी के मुताबिक करेंगे."

मंत्री ने कहा, "इस मामले की जांच की जाएगी और कड़ी कार्रवाई की जाएगी ताकि ये मामला दूसरों के लिए मिसाल बन सके."

उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी इस मामले में कड़ी प्रतिक्रिया दी है.

वीडियो कैप्शन, पीएम मोदी ने एएमयू के बारे में क्या-क्या कहा?

बीजेपी ने क्या कहा?

भारतीय जनता पार्टी ने भी इस मामले में कड़ी प्रतिक्रिया दी है.

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पार्टी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, "मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अच्छी तरह से जानते हैं कि देश विरोधी और समाज विरोधी लोगों से कैसा बर्ताव करना है. ये लोग प्रधानमंत्री मोदी के विकास की योजना को रोकना चाहते हैं लेकिन इन्हें कभी कामयाबी नहीं मिलेगी."

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कल्याण सिंह का अलीगढ़ से नाता

कल्याण सिंह का जन्म अलीगढ़ ज़िले की अतरौली तहसील के मढ़ौली गाँव में पाँच जनवरी 1935 को हुआ था.

वे साल 1967 में जनसंघ के टिकट पर अतरौली सीट से पहली बार विधानसभा पहुँचे और साल 1980 तक लगातार इस सीट से जीतते रहे.

अयोध्या में 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद ध्वंस के समय वो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे. वो दो बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे.

उनका निधन 21 अगस्त को लनखऊ में हुआ और उनका अंतिम संस्कार 23 अगस्त को बुलंदशहर के नरौरा में किया गया.

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