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विकास दुबे ज़मानत पर कैसे था? सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूछा
- Author, सुचित्र मोहंती
- पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिन्दी के लिए
विकास दुबे और उनके सहयोगियों के कथित एनकाउंटर पर सवाल उठाने वाली याचिका पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई.
इस मामले की सुनवाई कर रहे मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे ने इस पूरे मामले में उत्तर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाते हुए 'इसे सिस्टम की विफ़लता' बताया है.
नामी वकील प्रशांत भूषण ने भी पीयूसीएल की ओर से मुठभेड़ पर सवाल उठाए हैं.
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि "हैदराबाद एनकाउंटर और विकास दुबे एनकाउंटर केस में एक बड़ा अंतर है. वे एक महिला के बलात्कारी और हत्यारे थे जिनके पास हथियार नहीं थे. ये (दुबे और उनके सहयोगी) पुलिसकर्मियों के हत्यारे थे."
इस दौरान यूपी सरकार की तरफ़ से कोर्ट में मौजूद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि 'मुठभेड़ सही थी.'
इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "मगर राज्य सरकार का काम क़ानून-व्यवस्था बनाये रखना है जिसके लिए ज़रूरी है कि अपराधियों को गिरफ़्तार किया जाये, उन पर मुक़दमा चलाया जाये और क़ानून से उन्हें सज़ा मिले."
कोर्ट में उत्तर प्रदेश पुलिस के डीजी का पक्ष रख रहे वकील हरीश साल्वे ने कहा, "पुलिसकर्मियों के भी कुछ अधिकार हैं. दुबे ने पुलिस वालों की हत्या की. ये हैदराबाद केस से बिल्कुल अलग मामला है. किसी दुर्दांत अपराधी के ख़िलाफ़ भारी पुलिस बल के प्रयोग के लिए क्या पुलिस को गुनहगार ठहराया जा सकता है. हम पुलिस का मनोबल नहीं गिरा सकते."
अगली सुनवाई बुधवार को
इसपर मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "अगर क़ानून व्यवस्था को मज़बूत किया जाये तो कभी ऐसी नौबत नहीं आयेगी कि पुलिसवालों का मनोबल कम हो."
अदालत ने विकास दुबे पर संगीन अपराधों में नाम दर्ज होने के बाद भी ज़मानत दिये जाने को लेकर हैरानी जताई.
मुख्य न्यायाधीश ने कहा, 'हमें इस बात से हैरानी है कि इतने आपराधिक मामले सिर पर दर्ज होने वाला व्यक्ति ज़मानत पर रिहा था और उसने आख़िरकार ऐसा कर दिया. हमें सभी आदेशों की एक सटीक रिपोर्ट दें. यह सिस्टम के फ़ेलियर को दर्शाता है.'
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एस ए बोबडे ने कहा कि 'यह केवल एक घटना नहीं है जो दांव पर है. पूरी व्यवस्था दांव पर है.' उत्तर प्रदेश सरकार ने हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज की अगुआई में जाँच शुरू की है.
लेकिन इस मामले में अब सर्वोच्च अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता वाली समिति से जाँच कराने के निर्देश दिये हैं और यूपी सरकार जाँच कमेटी के पुनर्गठन पर सहमत भी हो गई है.
इस मामले में अब अगली सुनवाई बुधवार को होगी.
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