#BoysLockerRoom मामले में एक किशोर को हिरासत में लिया गया

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    • Author, सुशीला सिंह
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • पढ़ने का समय: 5 मिनट

भारत में सोशल मीडिया पर पिछले दो दिन से #BoysLockerRoom ट्रेंड कर रहा है.

फ़ोटो शेयरिंग सोशल नेटवर्किंग साइट इंस्टाग्राम पर बने इस चैट समूह में लड़के, लड़कियों की फ़ोटो पोस्ट कर रहे हैं, अभद्र टिप्णणियां कर रहे हैं और रेप करने की बात कह रहे हैं.

इस मामले में दिल्ली महिला आयोग के दखल देने के बाद दिल्ली पुलिस के साइबर सेल विभाग ने इस मामले में एक किशोर को गिरफ्तार किया है.

समाचार एजेंसी एएनआी के अनुसार साइबर सेल विभाग ने कहा है कि "#BoysLockerRoom इंस्टाग्राम ग्रुप चैट मामले में एक छात्र को गिरफ्तार किया गया है. छात्र का मोबाइल फ़ोन ज़ब्त कर लिया गया है और इसकी जांच की जाएगी."

"इस ग्रुप में शामिल क़रीब सभी 21 लोगों की पहचान कर ली गई है. इस सभी से पूछताछ की जाएगी."

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इससे पहले दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने ट्वीट कर इंस्टाग्राम और दिल्ली पुलिस को नोटिस भेजा था और इसमें शामिल लड़कों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग की थी.

ट्वीट में उन्होंने लिखा था कि इंस्टाग्राम पर कुछ लड़कों ने 'बॉयज़ लॉकर रूम' नाम का एक ग्रुप बनाया है जिस पर वो नाबालिग़ लड़कियों की आपत्तिजनक तस्वीरें शेयर कर रहे हैं और नाबालिग़ लड़कियों का रेप करने की योजनाएं भी बना रहे हैं.

कुछ लड़कियों ने सोशल मीडिया पर इस ग्रुप चैट के कुछ स्क्रीनशॉट शेयर किए थे जिसके बाद ये मामला सामने आया. स्वाति मालीवाल ने उन्हीं स्क्रीनशॉट को शेयर करते हुए इस मामले में पुलिस से तुरंत एफ़आईआर दर्ज कर एक्शन लेने की बात की थी.

स्वाति मालीवाल के ट्वीट के बाद दिल्ली पुलिस भी फ़ौरन हरकत में आ गई दिखती है. समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार साइबर क्राइम सेल ने मामले का संज्ञान लेते हुए जाँच शुरू कर दी है.

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मानसिकता बदलना ज़रूरी

सोशल मीडिया में इस ग्रुप को ले कर काफी चर्चा है. कई लोग इसकी आलोचना कर रहे हैं और चिंता जता रहे हैं.

ट्विटर पर @Tripathiharsh02 लिखते हैं कि "क़ानून सख़्त बनाए जाने चाहिए लेकिन लोगों की मानसिकता बदलनी भी ज़रूरी है. महिला को एक वस्तु की तरह देखना बंद किया जाना चाहिए. युवाओं को समझाकर ही उनकी ये सोच बदली जा सकती है."

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@MarketerAditi लिखती हैं कि "भारत में #BoysLockerRoom की कहानी ने मुझे डरा दिया है. 16 साल के लड़के महिलाओं को रेप की धमकी दे रहे हैं. वो क्या सीख रहे हैं? उन लोगों के बारे में कुछ कीजिए जो महिलाओं को वस्तु के तौर पर पेश करते हैं और नीचा दिखाते हैं और महिलाओं से इस तरह का बर्ताव करते हैं."

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क्या कहता है क़ानून?

साइबर एक्सपर्ट पवन दुग्गल का कहना है कि लॉकडाउन के दौरान बच्चे न तो अपने घरों से बाहर निकल पा रहे हैं और न ही वो अपने माता-पिता से ज्यादा बात करते हैं, ऐसे में इंटरनेट ही उनका स्रोत रहा है और बीते 40 दिनों में संभव है कि ज़्यादातर बच्चे डार्क वेबसाइट पर गए हों.

पवन दुग्गल का कहते हैं, "अब तक जो जानकारी सामने आई है उसके अनुसार BoisLockerRoom से जुड़े लोग नाबालिग़ लग रहे हैं. लेकिन वो वयस्क हुए तो इस मामले में क़ानून को लेकर कोई दिक्क़त ही नहीं है. जब भी इंटरनेट पर लड़कियों या महिलाओं की तस्वीरों को लेकर इस तरह का अश्लील कंटेट बनाते हैं या इस तरह की गैंगरेप की धमकियां देते हैं, तो ये सारे मामले आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत आ जाते हैं. इसमें तीन साल सज़ा और पाँच लाख तक का जुर्माना हो सकता है."

"इसमें हम माइनर लड़कियों की मॉर्फ़ तस्वीरें भी देख सकते हैं जो चाइल्ड पोर्नोग्राफ़ी में आती हैं. जो कि घिनौना अपराध है. इसमें आईटी के सेक्शन 67बी के तहत पाँच साल की सज़ा और दस लाख का जुर्माना है."

भारतीय दंड संहिता के अनुसार इस तरह का अपराध करने वाले के ख़िलाफ़ 354ए और कहीं न कहीं 292 के प्रावधान भी लगाए जा सकते हैं.

पवन दुग्गल के मुताबिक़ यह मामला गहरे आपराधिक षडयंत्र का हिस्सा भी हो सकता है और इसमें भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी क़ानून के प्रावधान लागू हो सकते है.

उनके अनुसार यह मामला लड़कियों की मॉर्फ़ तस्वीरें बना कर झूठे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड बनाने का भी है.

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पवन दुग्गल कहते हैं कि "इसके पीछे दो मक़सद हो सकते हैं, एक तो लोगों को धोखा दिया जाये और दूसरा लड़की विशेष की इज्ज़त या साख पर नकारात्मक प्रभाव डाला जा सके."

वो बताते हैं कि ये अपराध भारतीय दंड संहिता के सेक्शन 468 और 469 के प्रावधान के तहत भी आते हैं.

468 में झूठे रिकॉर्ड का प्रकाशन या प्रसारण करना शामिल है जिसमें सात साल की सज़ा और जुर्माना का प्रावधान है वहीं 469 में झूठे रिकॉर्ड का प्रकाशन शामिल होता है जिससे किसी की साख पर नकारात्मक प्रभाव डाला जा सके.

पवन दुग्गल के मुताबिक़ अगर इस मामले में शामिल लोगों की उम्र 18 साल से कम है तो उन्हें जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत सज़ा दी जा सकती है.

वो कहते हैं कि पुलिस को इस मामले में इंस्टाग्राम से जानकारी लेनी पड़ेगी और चूंकि सूचना प्रौद्योगिकी क़ानून के तहत इंस्टाग्राम नेटवर्क सर्विस प्रोवाइडर है, उसे जानकारी देनी पड़ेगी.

पुलिस को जहां से लॉग-इन हुआ है उसके आईपी एड्रस मिल जाते हैं तो वो विभिन्न सर्विस प्रोवाइडर के ज़रिए व्यक्ति विशेष तक भी पहुंच सकती है.

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बच्चों की नाज़ुक स्थिति

मनोवैज्ञानिक डॉ पूजाशिवम जेटली कहती हैं, "ये घटना काफ़ी दुखद है कि इस उम्र के बच्चे इस तरह की चैटिंग कर रहे हैं. किशोरावस्था की उम्र में बच्चों में शारीरिक और मानसिक कई तरह के बदलाव होते हैं और उस समय बच्चा एक असमंजस की स्थिति में होता है सही और ग़लत की समझ नहीं होती है तो इस वजह से वो हर चीज़ की तरफ़ प्रभावित हो जाते हैं और बुरी चीज़ से ज़्यादा होता है."

"साथ ही कोई भी चीज़ जो उन्हें पावरफुल फ़ील कराएं, जिसमें रोमांच हो या इस उम्र में बच्चे प्रयोगात्मक भी होते हैं इसलिए बच्चे ऐसी चीजें कर जाते है जो सही या ग़लत हो सकती हैं."

डॉ पूजाशिवम मानती हैं कि जिस तरह से बच्चे रेप और अश्लील बातें इस समूह में लिख रहे हैं उन्हें ये पता भी नहीं है कि वो क्या लिख रहे हैं और इसका क्या असर हो सकता है.

वो कहती हैं, "इटंरनेट का एक्सपोशर होना और ऐसे कार्यक्रम जिसमें हिंसा, गाली-गलौज, यौन हिंसा दिखाई जाती है तो इन बच्चों को लगता है कि कोई भी कुछ कर सकता है और कह सकता है और ये सामान्य है."

वो कहती हैं कि ज़रूरी है कि अभिभावक बच्चों की गतिविधियों पर नज़र रखें और उन से खुलकर बात करें.

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