नागरिकता बिल पर असम में विरोध भड़का, गुवाहाटी में कर्फ़्यू, 10 ज़िलों में इंटरनेट बंद
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असम में नागरिकता संशोधन विधेयक पर बढ़ते विरोध को देखते हुए गुवाहाटी में कर्फ़्यू लगा दिया गया है और 10 ज़िलों में इंटरनेट पर पाबंदी लगा दी गई है.
असम पुलिस के महानिदेशक भाष्कर ज्योति महंता ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा कि गुवाहाटी में शाम 6.15 बजे से कर्फ़्यू लगा दिया गया जो गुरुवार सुबह 7 बजे तक जारी रहेगा.
हालाँकि समाचार एजेंसी एएनआई ने गुवाहाटी के पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार के हवाले से बताया है कि कर्फ़्यू तब तक जारी रहेगा जब तक कि हालात सामान्य नहीं हो जाते.
असम सरकार ने एक सरकारी आदेश जारी कर बताया है कि 10 ज़िलों में शाम 7 बजे से 24 घंटे तक मोबाइल डेटा और इंटरनेट सेवाएँ बंद रहेंगी.
आदेश में लिखा गया है कि ये क़दम "राज्य की शांति को नष्ट करने में मीडिया के दुरुपयोग को रोकने और क़ानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए उठाया गया है".
जिन ज़िलों में इंटरनेट बंद कर दिया गया है उनके नाम हैं - लखीमपुर, तिनसुकिया, धेमाजी, डिब्रूगढ़, सराइदेव, सिबसागर, जोरहाट, गोलाघाट, कामरूप (मेट्रो) और कामरूप.
ये फ़ैसले ऐसे समय लिए गए जब असम में हज़ारों की संख्या में प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर विधेयक का विरोध किया.
इस दौरान कई जगहों पर पुलिस के साथ उनकी झड़प हुई. पुलिस ने स्थिति पर नियंत्रण के लिए आँसू गैस और लाठी चार्ज का इस्तेमाल किया.
पीटीआई के अनुसार असम सरकार ने सेना की दो टुकड़ियों की माँग की है और उन्हें बोंगाइगाँव और डिब्रूगढ़ में तैयार रखा गया है.
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क्यों हो रहा है विरोध
असम में ये कहकर नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध किया जा रहा है कि इससे असम समझौते का उल्लंघन होता है.
असम समझौता राज्य के लोगों की सामाजिक-सांस्कृतिक और भाषाई पहचान को सुरक्षा प्रदान करता है.
ये समझौता 15 अगस्त 1985 को भारत सरकार और असम आंदोलन के नेताओं के बीच हुआ था.
समझौता असम में छह वर्ष तक चले आंदोलन के बाद हुआ जिसकी अगुआई छात्र कर रहे थे.
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उनकी माँग थी कि अवैध प्रवासियों की पहचान कर उन्हें निर्वासित किया जाए.
असम समझौते के मुताबिक प्रवासियों को वैधता प्रदान करने की तारीख़ 25 मार्च 1971 है, लेकिन नागरिकता संशोधन विधेयक में इसे 31 दिसंबर 2014 माना गया है.
असम में सारा विरोध इसी नई कट-ऑफ़ डेट को लेकर है.
नागरिकता संशोधन विधेयक में नई कट-ऑफ़ डेट की वजह से उन लोगों के लिए भी मार्ग प्रशस्त हो जाएगा जो 31 दिसंबर 2014 से पहले असम में दाख़िल हुए थे.
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