प्रेस रिव्यू: गोवा में 'काला पत्थर', निर्देशक अडानी और जिंदल
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द इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक, साल 2016-17 में एक करोड़ 20 लाख टन कोयला गोवा के मरमुगाओ बंदरगाह पर उतारा गया और इसे वहां से गोवा के पावर स्टेशनों और कर्नाटक की रिफ़ाइनरी तक ले जाया गया.
साल 2020 तक गोवा में उतारे जाने वाले कोयला की मात्रा कितनी होगी, इसे यूं समझिए कि एक फुटबॉल के मैदान से भरा ढाई करोड़ टन कोयला आसमान में तीन किलोमीटर लंबा पहाड़ जितना बना देगा.
आधिकारिक रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2030 तक ये मात्रा हर साल पांच करोड़ टन होगी जिसका सीधा असर लोगों के सांस लेने पर दिखाई देगा. कोयला उतारने का काम गोवा में बड़े तौर पर जो उद्योग घराने कर रहे हैं, उनमें अडानी ग्रुप, वेदांता, जेएसडब्ल्यू स्टील शामिल हैं.
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इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी पड़ताल में पाया कि कोयले से भरे ट्रक गांवों और शहरों में रिहाइशी इलाकों के लोगों को खतरे में डाल रहे हैं. कोयले से निकलने वाली धूल लोगों को सांस संबंधी दिक्कत, खेतों की फ़सल, वनों और यहां तक कि टाइगर रिजॉर्ट के लिए खतरनाक साबित होगी.
सेंट्रल गोवा में धान की खेती करने वाले डॉर्विन ब्रिगेंज़ा बताते हैं, ''हम गोवा पर गर्व करते हैं. वजह है यहां के बीच, सुंदरता और इकोलॉजिकल स्टेटस. बहुत से युवाओं को मौके की कमी न होने के चलते अपना घर छोड़ना पड़ा. लेकिन अब जब ये कोयले के कॉरिडोर बन गए हैं, अब हमारी पहचान खोने की भी आशंका है. लोग गोवा घूमने आते हैं. ये सिर्फ हमारी दिक्कत नहीं है, ये आपकी भी है. अगर गोवा कोयला हब बन गया तो बहुत देर हो जाएगी. कोई भी ब्लैक क्रिसमस नहीं मनाना चाहेगा. ''
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द टाइम्स ऑफ इंडिया की ख़बर के मुताबिक, आरुषि हत्याकांड में तलवार दंपति की रिहाई के बाद हेमराज की पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला किया है.
हेमराज की पत्नी खुमकला ने कहा, ''हम अपने गांव से दिल्ली आने-जाने की हैसियत नहीं रखते हैं लेकिन हम सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे. हम अपने पति को इंसाफ दिलाने के लिए लड़ रहे हैं.''
हेमराज की भाई की पत्नी ने सवाल किया कि क्या तलवार दंपति के रिहा होने के बाद सीबीआई की कोई ज़िम्मेदारी नहीं बनती है.
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नवभारत टाइम्स की ख़बर के मुताबिक, राजस्थान में लोक सेवकों के विरुद्ध मुक़दमा दर्ज करने से पहले सरकारी इजाज़त ज़रूरी करने संबधी विधेयक पर विरोध का सामना कर रही वसुंधरा राजे सरकार बैकफुट पर आ गई है.
राजे सरकार ने मंगलवार को इस बिल को सेलेक्ट कमेटी को सौंप दिया है. 15 सदस्यों की टीम को अगले सत्र में अपनी रिपोर्ट पेश करनी होगी.
बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने इस कदम की तारीफ करते हुए कहा कि बिल को सेलेक्ट कमेटी को भेजा जाना होशियारी भरा कदम है. राजे ने अपने लोकतांत्रिक स्वभाव का परिचय दिया है.
मंगलवार को इस बिल को लेकर विधानसभा में हंगामा हुआ था.
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'मुगल लुटेरे थे, हुमायूं का मकबरा तोड़ो'
दैनिक भास्कर की ख़बर के मुताबिक, शिया वक्फ बोर्ड ने प्रधानमंत्री मोदी को चिट्ठी लिखकर दिल्ली स्थिति हुमायूं मकबरे को तोड़कर कब्रिस्तान बनाए जाने की वकालत की है.
शिया वक्फ बोर्ड ने कहा है कि 35 एकड़ में फैले हुमायूं के मकबरे की ज़मीन मिल जाने से कब्रिस्तान के लिए ज़मीन की किल्लत दूर होगी.
शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने पीएम को लिखी चिट्ठी में मुगलों को लुटेरा बताया.
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