प्रेस रिव्यू: त्रिपुरा में ख़बर कवर करने गए टीवी पत्रकार की हत्या
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इंडियन एक्सप्रेस अख़बार में ख़बर छपी है कि अगरतला में एक स्थानीय टीवी न्यूज चैनल के पत्रकार की अपहरण के बाद हत्या कर दी गई.
शांतनु भौमिक का उस वक्त अपहरण हो गया था, जब वह पश्चिमी त्रिपुरा में इंडिजीनस फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) और सीपीएम के ट्राइबल विंग टीआरयूजीपी के बीच संघर्ष को कवर कर रहे थे.
पुलिस के मुताबिक 'दिनरात' चैनल के पत्रकार शांतनु पर चाकू से हमला किया गया था. उन्हें अगरतला मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया. त्रिपुरा पत्रकार संघ ने घटना की सीबीआई जांच की मांग की है.
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हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर कहती है कि राजस्थान सरकार गायों के लिए ऑनलाइन बाज़ार शुरू करने जा रही है.
अख़बार के मुताबिक एक ऐसा पोर्टल बनाने की तैयारी है, जिसके ज़रिये लोग गायों की ऑनलाइन ख़रीद-फरोख़्त कर सकें. ओएलएक्स की तर्ज़ पर बनाई जाने वाली इस वेबसाइट में तस्वीरें, उत्पादकता, मूल्य और मालिक का पता होगा.
ख़बर के अनुसार राजस्थान के गौ कल्याण मंत्री ओताराम देवासी ने कहा, "हम चाहते हैं कि किसानों की आमदनी बढ़े और एक भी गाय लावारिस न छोड़ी जाए. इससे किसानों को अपने पशु का सही मूल्य मिलेगा और बिचौलियों की भूमिका खत्म हो जाएगी."
इस पोर्टल को अगले छह महीनों के अंदर लॉन्च कर दिया जाएगा.
दैनिक भास्कर की ख़बर कहती है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने दिल्ली सरकार को यह देखने का आदेश दिया कि कहीं अज़ान से शोर तो नहीं हो रहा.
ख़बर के मुताबिक अब सरकार को पूर्वी दिल्ली की मस्जिदों में जाकर जांच करनी होगी कि वहां लगे स्पीकर्स की आवाज़ तय सीमा से ज़्यादा तो नहीं है.
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एनजीटी ने यमुना में बिखरी पड़ी गणेश प्रतिमाओं पर भी जवाब तलब किया गया है.
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक पश्चिम बंगाल में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन को मुहर्रम के बाद कराने के आदेश को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट ने ममता सरकार को कड़ी फटकार लगाई है.
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हाई कोर्ट ने कहा है कि जब आप दावा कर रहे हैं कि राज्य में सांप्रदायिक सद्भाव है तो आप खुद दो समुदायों के बीच विभेद पैदा करने की कोशिश क्यों कर रहे हैं.सरकार से अदालत ने पूछा है कि मुहर्रम का जुलूस और दुर्गा विसर्जन एकसाथ क्यों नहीं हो सकते.
कोर्ट ने टिप्पणी की है पहले ऐसे हालात नहीं बने थे. सलाह देते हुए अदालत ने कहा कि उन्हें सद्भाव में साथ-साथ रहने दें, उनके बीच लकीर न खींचें.
इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना से वांछित परिणाम नहीं मिल पा रहे.
अख़बार कहता है कि अभी तक की जानकारी बताती है कि जुलाई 2017 के पहले हफ्ते तक जिन 30.67 लाख लोगों को ट्रेनिंग दी गई थी, उनमें से 10 फ़ीसदी से भी कम को प्सेलमेंट के ऑफ़र मिले हैं.
ख़बर के मुताबिक सरकार अब ज़िला स्तर पर योजना बनाने पर ध्यान केंद्रित करने जा रही है.
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