वो तीन मुद्दे जो डोनाल्ड ट्रंप के लिए बन सकते हैं ख़तरे की घंटी

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इमेज कैप्शन, सर्वेक्षणों से पता चलता है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट आई है
    • Author, एंथनी जर्चर
    • पदनाम, उत्तरी अमेरिका संवाददाता
  • पढ़ने का समय: 6 मिनट

पिछले साल जनवरी में व्हाइट हाउस में लौटने के बाद से अमेरिकी जनता के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता लगातार कम होती जा रही है.

हालांकि कुछ हद तक यह अमेरिकी राष्ट्रपति के दूसरे कार्यकाल के लिए सामान्य बात है, लेकिन ट्रंप की लोकप्रियता में शुरुआती गिरावट महंगाई और बुनियादी ज़रूरतों पर बढ़ते ख़र्च को लेकर जनता की निरंतर असंतुष्टि को भी दिखाती है.

ये ऐसे मुद्दे थे जिन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी को चुनावी जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी.

चुनावों का विश्लेषण करने वाली वेबसाइट 'द डाउनबैलॉट' के आंकड़ों के अनुसार साल 2025 में हुए विशेष चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने साल 2024 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान उन्हीं ज़िलों में हुए चुनावों की तुलना में औसतन 13 फ़ीसदी बेहतर प्रदर्शन किया.

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ईरान में चल रहे युद्ध ने अमेरिका की आर्थिक चिंताओं को और भी बढ़ा दिया है.

सर्वेक्षण कंपनी इप्सोस ने पाया कि अमेरिकी जनता के 43 फ़ीसदी लोगों ने ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में अर्थव्यवस्था को संभालने के उनके तरीके को सही माना था.

23 जून 2025 तक, यह संख्या घटकर 35 फ़ीसदी हो गई और साल के बाक़ी समय में यह इसी स्तर के आस-पास बनी रही.

ईरान युद्ध के तीन सप्ताह बाद, पेट्रोल की कीमतें बढ़कर औसतन लगभग 4 अमेरिकी डॉलर प्रति गैलन हो गई हैं.

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ट्रंप के पास राजनीतिक ताक़त

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इमेज कैप्शन, कई लोगों को चिंता है कि ईरान युद्ध की वजह से अमेरिका में महंगाई और बढ़ सकती है (तेहरान में अमेरिका और इसराइल के हमले की फ़ाइल फ़ोटो)
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यह आंकड़ा व्हाइट हाउस में जो बाइडन के चार साल के कार्यकाल के दौरान के किसी भी आंकड़े से कम था, जब अमेरिकियों को कोविड महामारी के बाद महंगाई का सामना करना पड़ा था.

आर्थिक चिंताओं ने साल 2024 में डेमोक्रेटिक पार्टी की हार और पिछले एक साल से राष्ट्रपति पद और कांग्रेस के दोनों सदनों पर रिपब्लिकन पार्टी के कब्ज़े में योगदान दिया.

अब ऐसा दिखता है कि इसका असर ट्रंप की लोकप्रियता पर पड़ रहा है.

राजनीतिक विश्लेषक नेट सिल्वर के किए गए एक सर्वेक्षण के औसत के अनुसार, अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ट्रंप को 52 फ़ीसदी समर्थन हासिल था.

हालांकि यह उस तरह का 'राजनीतिक हनीमून' नहीं था जिसका आनंद कई पूर्व राष्ट्रपतियों ने उठाया था.

लेकिन एक विवादास्पद चुनाव के बाद अधिकांश अमेरिकियों के समर्थन ने ट्रंप को चुनावी जनादेश का दावा करने और इमिग्रेशन, टैरिफ़, सरकारी कटौती और टैक्स सुधार पर अपने व्यापक राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने की अनुमति दी.

हालांकि, 28 फरवरी को, ईरान युद्ध की शुरुआत में केवल 42 फ़ीसदी अमेरिकियों की राष्ट्रपति के प्रति सकारात्मक राय थी. इस सप्ताह, यह आंकड़ा और गिरकर 40 फ़ीसदी हो गया है.

लोगों की राय

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इमेज कैप्शन, गुरुवार को कंजर्वेटिव पॉलिटिकल एक्शन कॉन्फ्रेंस में रिपब्लिकन नेशनल कमेटी के पूर्व अध्यक्ष माइकल व्हाटली

अमेरिकी कांग्रेस के लिए हुए मध्यावधि चुनावों से महज सात महीने पहले मौजूदा राष्ट्रपति ट्रंप के लिए यह एक ख़तरनाक स्थिति है. ईरान युद्ध जितना लंबा खिंचेगा, और वैश्विक अर्थव्यवस्था में जितने संकट खड़े होंगे, महंगाई जितनी बढ़ेगी, जोखिम उतना ही अधिक हो सकता है.

इसी सप्ताह टेक्सस के पास डलास में आयोजित कंजर्वेटिव पॉलिटिकल एक्शन कॉन्फ्रेंस (सीपीएसी) में दक्षिणपंथी राजनेताओं, कार्यकर्ताओं और अत्यधिक जागरूक मतदाताओं का एक सम्मेलन था.

इसमें नवंबर के चुनावों में दांव पर लगी चीजें चर्चा का आम विषय थीं.

उत्तरी कैरोलिना से सीनेट उम्मीदवार और रिपब्लिकन नेशनल कमेटी के पूर्व अध्यक्ष माइकल व्हाटली ने कहा, "हम वामपंथियों को इस चुनाव चक्र में जीतने और उस एजेंडे को छीनने नहीं दे सकते जिसके लिए हम हर दिन लड़ रहे हैं."

उन्होंने चेतावनी दी कि डेमोक्रेटिक पार्टी के सत्ता में वापस आने के साथ ही उनके लिए "महाभियोग, झूठे आरोप, जांच और एक बेकाबू एजेंडा ही सब कुछ होगा."

इसके बावजूद कि जनता का एक बड़ा हिस्सा शुरू से ही ईरान में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप के ख़िलाफ़ था, युद्ध की शुरुआत से ही राष्ट्रपति की लोकप्रियता रेटिंग में कोई अचानक गिरावट नहीं आई है.

प्यू रिसर्च सेंटर के संकलित आंकड़ों के अनुसार, आर्थिक चिंताओं के बावजूद ट्रंप के राजनीतिक समर्थकों ने उनका साथ देना जारी रखा है.

ईरान पर ट्रंप के फ़ैसलों से कितने लोग सहमत

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इमेज कैप्शन, गुरुवार को सीपीएसी में पहुंचे ईरानी मूल के अमेरिकी ट्रंप का समर्थन करते हुए

टेक्सस में सीपीएसी में यह निश्चित रूप से देखने को मिला है कि पार्टी के वफादार समर्थकों का साथ अमेरिका को विदेशी मसलों से बाहर निकालने के ट्रंप के चुनावी वादों को नज़रअंदाज़ करता है.

अमेरिका में पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के बारे में पॉल हीरे ने कहा, "अभी कुछ महंगाई झेलना बाद में बहुत बड़ी कीमत चुकाने से बेहतर है. मुझे नहीं लगता कि आप चाहेंगे कि उस क्षेत्र में एक और देश के पास परमाणु हथियार हों, इसलिए आपको यह कीमत चुकानी ही पड़ेगी."

हाल ही में हुए क्विनिपियाक सर्वेक्षण में पाया गया कि 86 फ़ीसदी रिपब्लिकन ईरान में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का समर्थन करते हैं और 80 फ़ीसदी ट्रंप के इस मामले को संभालने के तरीके को सही मानते हैं.

जबकि अमेरिका के सभी रजिस्टर्ड वोटरों के बीच यह आंकड़ा क्रमशः 39 फ़ीसदी और 34 फ़ीसदी है.

डेमोक्रेटिक पार्टी ने ट्रंप के व्हाइट हाउस में लौटने के बाद से उनके हर कदम का व्यापक रूप से विरोध किया है. लेकिन अब निष्पक्ष मतदाता भी उनके ख़िलाफ़ होते दिख रहे हैं.

2024 में ट्रंप की जीत की प्रमुख वजहों में से एक थी निष्पक्ष मतदाताओं को अपने पक्ष में करना.

जब तक मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियाँ नहीं बदलतीं, ऐसे निष्पक्ष लोग नवंबर में उनकी पार्टी की संभावित हार में योगदान दे सकते हैं.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.