आम चुनाव 2024: अगर आपका वोट कोई पहले ही डाल गया हो तो क्या करें?

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भारत में आम चुनाव का ऐलान जल्दी होने वाला है. माना जा रहा है कि अगले दो महीने में 18वीं लोकसभा के चुनाव हो जाएंगे.
ऐसे में मान लीजिए एक ज़िम्मेदार नागरिक के नाते आप मतदान के दिन अपना वोट डालने पहुंचें और वहां आपको पता चलता है कि आपका वोट किसी ने पहले ही डाल दिया है. बेशक आप इससे चौंक जाएंगे.
इसे धारा 49(पी) के तहत वोट का चोरी होना कहा जाता है. चुनाव आयोग ने साल 1961 में इस धारा को संशोधित करके शामिल किया था.
ऐसे में अगर आपका वोट चोरी हो जाता है तो आप क्या करेंगे और इस स्थिति में आपको क्या करना चाहिए?
हम आपको बताते हैं कि ऐसी स्थिति में आपको क्या करना चाहिए.
वोट चोरी होने की शिकायत कहां कर सकते हैं?

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दरअसल, भारतीय चुनाव आचरण अधिनियम-1961 की धारा 49 पी के तहत ऐसी स्थिति के लिए प्रावधान निर्धारित हैं, ताकि असली मतदाता को निराश न होना पड़े.
अगर आपके वोट डालने से पहले ही किसी ने आपका वोट डाल दिया है तो आप इसके ख़िलाफ़ पोलिंग स्टेशन के पीठासीन अधिकारी के पास अपील कर सकते हैं.
बस आपको ये ख़्याल रखना है कि आप ही असली मतदाता हैं. यह साबित करने के लिए आपके पास वोटर आईडी कार्ड और चुनाव आयोग की ओर से जारी बूथ पर्ची होनी चाहिए.
इसके अलावा पीठासीन अधिकारी आपसे कुछ सवाल पूछ सकते हैं. उन सवालों के संतोषजनक जवाब देने पर पीठासीन अधिकारी आपको वोट डालने की अनुमति दे सकते हैं.
यहां यह भी जान लेना ज़रूरी है कि आपकी शिकायत ग़लत पाए जाने पर पीठासीन अधिकारी आपके ख़िलाफ़ शिकायत भी दर्ज करा सकता है.
लेकिन ऐसा होने पर भी आप ईवीएम मशीन में अपना वोट नहीं डाल पाएंगे. आप बैलेट पेपर के ज़रिए अपना वोट डालेंगे. इस प्रक्रिया को टेंडर वोट भी कहते हैं.
कैसे डाल सकते हैं वोट?

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आपको जो बैलेट पेपर मिलेगा, उसमें सभी उम्मीदवारों के नाम और चुनाव चिन्ह होंगे. आपको अपनी पसंद के उम्मीदवार के सामने क्रास का निशान लगाकर वोट डालना होगा.
इसके बाद बैलेट पेपर को मोड़कर आपको पीठासीन अधिकारी को सौंपना होगा. वे उसे एक लिफाफे में डालकर एक अलग बक्से में रखेंगे.
यहां यह जानना भी दिलचस्प होगा, आपका वोट केवल और केवल अपने लोकतांत्रिक अधिकार को पूरा करने का संतोष दे सकता है.
इस वोट से चुनाव में हार जीत का फ़ैसला नहीं होगा. क्योंकि टेंडर वोट की कभी गिनती नहीं होती है.
टेंडर वोट की गिनती किन परिस्थितियों में होती है?

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भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एन गोपालस्वामी ने टेंडर वोट के बारे में बीबीसी को बताया कि भारतीय चुनाव आचरण अधिनियम-1961 के तहत 49पी प्रावधान में ऐसे वोट डालने का प्रावधान है. लेकिन गोपालस्वामी ने यह भी स्पष्ट किया है कि अगर दो उम्मीदवारों को एकसमान मत मिले तो भी टेंडर्ड वोटों की गिनती नहीं होगी.
उनके अनुसार, ''ऐसी स्थिति में विजेता का फ़ैसला टॉस के ज़रिए होता है. टॉस जीतने वाले उम्मीदवार को विजेता घोषित किया जाता है. टॉस हारने वाले उम्मीदवार के पास अदालत में जाने का विकल्प होता है. वह अपनी अपील में अदालत का ध्यान टेंडर वोट की ओर दिलाते हुए यह दावा कर सकता है कि ये वोट उसके पक्ष में होंगे.''
ऐसी स्थिति में क्या होगा? ये जानना भी बेहद दिलचस्प है.
पोलिंग स्टेशन में पीठासीन अधिकारी ने यह पुष्टि की है कि आप वास्तविक मतदाता हैं इसलिए ईवीएम में डाला गया वोट बोगस वोट माना जाएगा. इसलिए अदालत बोगस वोट का पता लगाने का आदेश दे सकती है.
ऐसी स्थिति में, चुनाव आयोग फॉर्म-17 ए दस्तावेज़ को खोलेगी, जिसमें मतदान डालने वाले मतदाताओं की विस्तृत जानकारी होती है. हर चुनाव क्षेत्र के रिटर्निंग अधिकारी के पास फ़ॉर्म -17 ए होता है.
टेंडर वोट और चुनाव परिणाम

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संसदीय चुनाव में, आम तौर पर ज़िलाधिकारी ही, रिटर्निंग अधिकारी होते हैं. यानी फॉर्म-17 ए से ये पता चल सकता है कि आपका वोट कब और किस सीरियल नंबर से डाला गया.
सीरियल नंबर की पहचान के बाद बोगस वोट को डिलीट किया जाएगा यानी बोगस वोट के हटाए जाने के बाद, जिसे ज़्यादा वोट मिलेंगे, उसे विजेता घोषित किया जाएगा.
यहां ये जानना दिलचस्प है कि सील बंद फॉर्म -17 ए को, अदालत के आदेश के बिना किसी दूसरी वजह से नहीं खोला जा सकता है.
अगर किसी चुनावी क्षेत्र में हार-जीत का अंतर बहुत हो तो किसी का ध्यान टेंडर्ड वोट की ओर नहीं जाता है. लेकिन अगर विजेता का फ़ैसला टॉस से हो या फिर गिनती के वोट से हो तो टेंडर्ड वोट का हवाला देते हुए हारने वाला उम्मीदवार अदालत में अपील कर सकता है.
ऐसी स्थिति में टेंडर वोट के ज़रिए केवल बोगस वोट की पहचान की जाती है. उसे गिनती से हटाया जाता है.यानी एक बात साफ़ है कि यहां भी टेंडर्ड वोटों की गिनती नहीं होती है.
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