टी-20 महिला वर्ल्ड कप: भारतीय टीम की पाकिस्तान पर जीत, मगर कौन सी कमज़ोरी सामने आई
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- Author, मनोज चतुर्वेदी
- पदनाम, खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
- पढ़ने का समय: 6 मिनट
भारत ने आख़िरकार आईसीसी महिला टी-20 वर्ल्ड कप में में पहली जीत हासिल कर ली है.
छह अक्तूबर को दुबई में खेले गए मैच में भारत ने पाकिस्तान को छह विकेट से हराया. इस जीत से भारत के ग्रुप ए में दो अंक हो गए हैं और वह चौथे स्थान पर है.
भारत के सामने इस मैच में अपने रनरेट को बेहतर करने का मौका था, क्योंकि न्यूजीलैंड से बुरी तरह हारने के बाद रनरेट -2.90 हो गया था.
भारत को रन रेट पॉजिटिव करने के लिए 106 रन के लक्ष्य को 11.2 ओवर में प्राप्त करना था.
लेकिन भारत के धीमे खेल के बाद मिली जीत से रनरेट -1.217 ही हो सका है. अब अगर आगे जाकर रन रेट से फैसला हुआ तो भारतीय टीम दिक़्क़त में आ सकती है.
हरमनप्रीत कौर ने खेली कप्तानी वाली पारी
हरमनप्रीत कौर पहले मैच की तरह इस मैच में तीसरे नंबर पर खेलने की बजाय चौथे नंबर पर खेलने आईं.
उन्होंने फातिमा सना की ओर से लगातार दो गेंदों पर जेमिमा रोड्रिग्ज और रिचा घोष के विकेट निकालने के बाद अकेले अपने दम पर मोर्चा संभाला और टीम को जीत तक पहुंचा दिया.
हरमनप्रीत इकलौती भारतीय बल्लेबाज रहीं, जिसने सौ से ज्यादा के स्ट्राइक रेट से रन बनाए.
उन्होंने 120.83 की स्ट्राइक रेट से खेलकर 24 गेंदों में 29 रन बनाए. पर वह दुर्भाग्यवश विजयी रन नहीं बना सकीं.
वह जीत के लिए दो रन रह जाने पर ऑफ स्टंप से बाहर की गेंद को खेलने के प्रयास में गफलत में पड़ने पर गिर पड़ीं और उन्हें गर्दन में लगी चोट की वजह से बाहर जाना पड़ा.
उनकी जगह आई संजना ने आते ही चौका लगाकर जीत दिला दी.
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श्रेयांका और अरुंधति ने किया प्रभावित
श्रेयांका और अरुंधति ने क्रमश: दो और तीन विकेट निकालकर पाकिस्तान की पारी को 105 रन पर सीमित करने में अहम भूमिका निभाई.
अच्छी लंबाई होने के साथ श्रेयांका को अपने हाई आर्म एक्शन की वजह से अच्छी उछाल मिलती है.
इसके अलावा वो क्रीज का भी बहुत अच्छा इस्तेमाल करती हैं.
उन्होंने क्रीज का अच्छा इस्तेमाल करके ओपनर मुनीबा को स्टंप कराया. उन्होंने गेंद को थोड़ा पीछे से फेंका, जिसकी वजह से मुनीबा का बल्ला जल्दी चल जाने से विकेट के पीछे कैच निकला, जिसे रिचा घोष ने बेहतरीन अंदाज में पकड़कर पाकिस्तान को करारा झटका दिया.
श्रेयांका ने चार ओवरों में 12 रन देकर दो विकेट निकाले.
अरुंधति रेड्डी पिछले साल डब्ल्यूपीएल में हासिल किए अनुभव का यहां अच्छा इस्तेमाल करती नज़र आईं. उन्होंने रेणुका की ओर से तैयार किए माहौल का भरपूर फायदा उठाया.
उन्होंने लगातार कसी हुई गेंदबाजी करके अपना अटैक विकेट पर ही रखा और वह 19 रन देकर तीन विकेट लेकर मैच में भारत की सफलतम गेंदबाज रहीं.
इस प्रदर्शन पर उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया.
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स्मृति और शेफाली नहीं दिखीं रंगत में
भारत की अधिकांश जीतों में स्मृति मंधाना और शेफाली वर्मा की ओपनिंग साझेदारी की भूमिका अहम रही है.
लेकिन दोनों के खेलने के अंदाज से लगा कि दोनों लय में नहीं हैं. इसमें धीमे विकेट और धीमे मैदान की भूमिका का भी योगदान रहा.
स्मृति मंधाना को पेस गेंदबाजी के ख़िलाफ़ अच्छा खेलने के लिए जाना जाता है. पर धीमे विकेट पर स्पिनरों के ख़िलाफ़ खेलने में उन्हें थोड़ी दिक़्क़त होती है.
वह पहले मैच की तरह ही इस मैच में भी स्पिनर का शिकार बनीं. वह 16 गेंदों में सात रन ही बना सकीं.
जहां तक बात शेफाली की है तो वह चौके और छक्के लगाने के लिए जानी जाती हैं. लेकिन विकेट धीमा होने की वजह से उन्हें चौके और छक्के लगाने में दिक्कत हो रही थी.
इस कारण उनकी पारी उम्मीदों के मुताबिक नहीं हो सकी. उन्होंने 32 रनों की पारी ज़रूर खेली पर इसके लिए 35 गेंदें खेल लीं.
संजय मांजरेकर कहते हैं कि भारतीय टीम को चौकों और छक्कों पर निर्भर रहने के बजाय एक-दो रन लेकर स्कोर बोर्ड को आगे बढ़ाए रखना सीखना होगा. इसके लिए खिलाड़ियों की फिटनेस बहुत मायने रखती है.
इस मामले में शेफाली बहुत निराश करती हैं.
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भारत ने पॉवरप्ले में की बेहतर गेंदबाज़ी
असल में रेणुका की ताकत गेंद को स्विंग कराना है पर न्यूजीलैंड की ओपनरों ने आगे निकलकर खेलने की रणनीति से उन्हें गेंद स्विंग कराने का मौका ही नहीं दिया था.
पर रेणुका ने पाकिस्तान के ख़िलाफ़ अच्छी स्विंग गेंदबाजी करके भारत को पहले ही ओवर में गुल फिरोजा के विकेट के रूप में सफलता दिला दी.
रेणुका के साथ दीप्ति और अरुंधति रेड्डी ने भी कसी गेंदबाजी करके पाकिस्तान की बल्लेबाजों पर दवाब बनाए रखा.
इस कारण पाकिस्तान पॉवरप्ले के पहले छह ओवरों में दो विकेट पर 29 रन ही बना सकी.
पाकिस्तान को थामने में दीप्ति के विकेट पर लगातार अटैक करने से भी रन बनाने में मुश्किल हुई.
ओमेमा सोहेल लगातार स्वीप शॉट खेलने का प्रयास कर रहीं थीं और गेंद सीधी पड़ने पर वह चूकीं और एलबीडब्ल्यू हो गई.
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फातिमा सना नहीं उठा पाईं मौके़ का फायदा
पाकिस्तान की कप्तान फातिमा सना को अटैकिंग क्रिकेटर के तौर पर जाना जाता है. वह अपने पहले मैच में श्रीलंका के खिलाफ 20 गेंदों में 30 रनों की पारी खेलकर आई थीं.
भारत के ख़िलाफ़ उन्हें पारी की शुरुआत में ही जीवनदान मिल गया. अरुंधति रेड्डी की गेंद पर गली में खड़ी आशा शेभना ने आसान सा कैच छोड़ दिया.
फातिमा सना ने इस जीवनदान का जश्न आशा के अगले ही ओवर की पहली पांच गेंदों पर दो चौकों से 12 रन बनाकर मनाया. यह वह समय था कि सना अपने आक्रामक अंदाज से भारतीय गेंदबाजों पर दवाब बनाती दिख रहीं थीं.
लेकिन आशा ने इस मुश्किल मौके़ पर अपनी धड़कनों को काबू में रखा और गेंद को तेजी से लेग स्पिन कराया और गेंद बल्ले का किनारा लेकर विकेट के पीछे गई और रिचा घोष ने शानदार कैच पकड़कर सना के खतरा बनने के मंसूबों पर पानी फेर दिया.
आशा ने भले ही सना को ख़तरा नहीं बनने दिया पर इससे पहले वह मुनीबा का भी आसान सा कैच छोड़ चुकी थीं.
किसी मैच में एक ही खिलाड़ी के दो आसान कैच टपकाने का सहजता से नहीं लिया जा सकता है. कई बार गेंद से अच्छा प्रदर्शन का असर खराब कैचिंग से खत्म हो जाता है.
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भारत को ओवर रेट पर ध्यान देने की ज़रूरत
भारतीय टीम प्रबंधन को ओवर रेट पर काम करने की जरूरत है.
भारत के लगातार दूसरे मैच में निर्धारित समय से ज्यादा लेने की वजह से आख़िरी ओवर में छह फील्डर सर्किल के भीतर रखने पड़े.
यह स्थिति उस समय अजीब लगती है, जब आपके पांच प्रमुख गेंदबाजों में से तीन स्पिनर हैं.
यह सही है कि पाकिस्तान इस स्थिति का न्यूजीलैंड की तरह फायदा नहीं उठा सकी. न्यूजीलैंड ने आखिरी ओवर में 11 रन बनाए थे. पाकिस्तान ने आखिरी ओवर में आठ रन बनाए.
भारत के अगर चार फील्डर आखिरी ओवर में होते तो आखिरी गेंद पर लगे चौके को रोका जा सकता था.
कई बार कुछ रन ही मुश्किल बन जाते हैं, इसलिए इस बारे में सुधार करना बेहद ज़रूरी है.
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