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भारतीय हॉकी टीम के पेरिस ओलंपिक का टिकट पाने में जापानी बाधा
- Author, मनोज चतुर्वेदी
- पदनाम, वरिष्ठ खेल पत्रकार, बीबीसी हिंदी के लिए
भारत एशियाई खेलों की पुरुष हॉकी में ख़िताब के क़रीब है.
सेमी फ़ाइनल में दक्षिण कोरिया के ख़िलाफ़ कड़े इम्तिहान में खरा उतरकर भारत ने अपने को पेरिस ओलंपिक का टिकट कटाने के और क़रीब पहुँचा दिया है.
उन्हें अब फ़ाइनल में जापानी बाधा पार करनी होगी.
जापान को अपने चहेते दर्शकों के बीच खेल रहे चीन पर 3-2 से फतह हासिल करने में एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ा.
लेकिन भारत को जापान पर पूल मुक़ाबले में फ़तह करने का मनोवैज्ञानिक लाभ मिलेगा.
ढिलाई देने से बढ़ सकती हैं भारत की मुश्किलें
भारत ने सेमी फ़ाइनल में दक्षिण कोरिया के ख़िलाफ़ पहले ही क्वार्टर में 3-0 की बढ़त लेने के बाद ढिलाई दी, इस तरह की स्थिति से बचना होगा.
सेमी फ़ाइनल के तीसरे क्वार्टर में जुंग ने हैट्रिक गोल से 3-4 स्कोर करके भारतीय धड़कनों को बढ़ा दिया था.
ये बढ़त ऐसी थी, जो कभी भी ख़त्म हो सकती थी. दोनों ही टीमें जीत पाने के लिए जी-जान से जुटीं हुई थीं.
पर भारतीय टीम आख़िरी में श्रीजेश के अनुभव के लाभ से बच गई थी.
मौजूदा हॉकी में आमतौर पर डिफ़ेंस के समय खेल गोलकीपर ही संचालित करता है.
श्रीजेश अनुभव की वजह से डिफ़ेंडरों को सही पोजिशन पर पहुँचने के निर्देश देते रहे.
इसका भारत को फ़ायदा मिला. लेकिन हर बार इस तरह की स्थिति से नहीं बचा जा सकता है.
अभिषेक जैसे प्रयास की फ़ाइनल में भी ज़रूरत पड़ेगी.
उसे खेल समाप्ति से छह मिनट पहले दक्षिण कोरियाई सर्किल के टॉप पर लूज गेंद मिली.
उन्होंने उसे क़ब्ज़े में लेकर बैंक हैंडर से करारा शॉट लगाकर गोल भेद दिया और इससे भारत की 5-3 की बढ़त हो जाने से जीत पाने का भरोसा हो गया.
अभिषेक का यह इस टूर्नामेंट का आठवाँ गोल रहा.
भारतीय टीम में गोल जमाने की क्षमता वाले कई खिलाड़ी हैं.
इसका टीम को फ़ायदा मिलेगा. सेमी फ़ाइनल में भारत के लिए हार्दिक सिंह, मनदीप सिंह, ललित उपाध्याय, अमित रोहिदास और अभिषेक ने गोल जमाए.
इस तरह की क्षमता वाली टीमों के खिलाफ विपक्षी टीमों के डिफ़ेंस को खिलाड़ियों को रोकने की योजना बनाने में दिक़्क़त होती है. जापान को भी इस समस्या से गुज़रना होगा
भारत को दवाब में ग़लतियों से बचना होगा
क्रेग फुल्टोन के कोच बनने के बाद से भारतीय टीम ने स्ट्रक्चर बनाने पर ख़ास ज़ोर दिया है.
इसके अलावा पैडी अपटोन के आने से यह माना जा रहा था कि भारतीय खिलाड़ी मानसिक तौर पर मज़बूत हो गए हैं.
पूल मुक़ाबलों के दौरान इस मामले में भारतीय खिलाड़ी बेहतर भी नज़र आए पर शायद इसकी वजह किसी मैच में टफ़ परीक्षा नहीं होना था.
इस मुक़ाबले में दक्षिण कोरिया के दवाब बनाने पर भारतीय खिलाड़ी ग़लतियाँ करते नज़र आए.
इस तरह की ग़लती की वजह से ही दक्षिण कोरिया को तीसरे क्वार्टर के सातवें मिनट में पेनल्टी कॉर्नर मिला.
जुंग इसे भी गोल में बदलने में सफल हो गए. यह गोल उनका हैट्रिक पूरी करने वाला रहा. जापानी टीम भी इस तरह की ग़लतियों का फ़ायदा उठाने की क्षमता रखती है.
भारत को आक्रामक शुरुआत से दवाब बनाना होगा
भारत ने जिस तरह से दक्षिण कोरिया के ख़िलाफ़ आक्रामक शुरुआत से बढ़त बनाई थी.
उसी प्रदर्शन को फ़ाइनल में भी दोहराना होगा.
सही मायनों में पाँच साल पहले जकार्ता में सेमी फ़ाइनल में की गई ग़लती को सुधारना होगा.
भारत शुरुआत से ही हमलावर रुख़ अपनाकर खेल पर दबदबा बनाने का माद्दा रखता है.
यह बात वह यहाँ पूल मैचों और सेमी फ़ाइनल में दिखा चुका है.
ज़रूरत सिर्फ़ इस सिलसिले को आख़िर तक बनाए रखने की है.
जकार्ता वाली ग़लती दोहराने से बचना ज़रूरी
हमें अच्छे से याद है कि जकार्ता एशियाई खेलों के सेमी फ़ाइनल में मलेशिया के ख़िलाफ़ भारत ने यदि आख़िरी मिनट में गोल खाकर मुक़ाबले को पेनल्टी शूटआउट में नहीं जाने दिया होता तो कहानी कुछ और होती.
भारत पर उस समय बने दवाब की प्रमुख वजह सरदार सिंह और सुरेंद्र की ग़लतियाँ थी और फिर पीला कार्ड मिलना था.
इसने मलेशिया को खेल पर दवाब बनाने का मौक़ा दिया था.
इसी तरह भारत ने पहले क्वार्टर में दबदबा बनाने के बाद दूसरे क्वार्टर में ढिलाई छोड़कर दक्षिण कोरिया को खेल में वापसी करने का मौक़ा दे दिया.
दक्षिण कोरिया ने भारत की इस ग़लती का भरपूर फ़ायदा उठाया.
उसने दूसरे क्वार्टर के पहले पाँच मिनट में दो गोल उतारकर भारतीय खिलाड़ियों के पसीने निकाल दिए.
इस समय लग रहा था कि भारतीय टीम पूरी तरह से दवाब में आ गई है. वह दवाब दूर करने के लिए गेंद पर नियंत्रण नहीं रख पा रही है.
अमित रोहिदास जैसा प्रदर्शन दोहराना होगा
दक्षिण कोरिया ने दूसरे क्वार्टर में जिस आक्रामक अंदाज़ में हमले बोले, उससे लग रहा था कि उसे रोकने में हमारा डिफ़ेंस सक्षम नहीं है.
इस दौरान भारतीय डिफ़ेंस में दरारें भी नज़र आने लगीं. लेकिन कोरिया के दो गोल जमाने के बाद भारतीय टीम नींद से जागती दिखी.
उन्होंने गेंद पर नियंत्रण रखने के लिए ज़ोर लगाना शुरू किया.
खेल के 24वें मिनट में एक काउंटर अटैक पर भारत पेनल्टी कॉर्नर को पाने में सफल हो गया.
हरमनप्रीत के मैदान में नहीं होने पर इसे लेने अमित रोहिदास गए.
उन्होंने गोल भेदकर भारत को दवाब से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई. इसके बाद भारतीय टीम अपना स्वाभाविक खेल खेलने लगी.
जापान टीम भी काउंटर अटैक बोलने में विश्वास रखती है. उसे गोल जमाने का सिलसिला बनाए रखकर रोकना सही रणनीति होगी.
भारत की जापान पर रही है श्रेष्ठता
जापान ने पिछले कुछ सालों में अपने प्रदर्शन को बहुत सुधारा है. वह पिछले खेलों की विजेता भी है.
उसे मज़बूत डिफ़ेंस करने वाली टीम के तौर पर जाना जाता है.
लेकिन भारत के ख़िलाफ़ उसका रिकार्ड बहुत कमज़ोर है. दोनों के बीच खेले गए 92 मैचों में से 82 भारत ने जीते हैं और 6 हारे हैं. दोनों के बीच 4 मैच ड्रा रहे हैं.
भारत के इस तरह से खेलने से उसके ख़िलाफ़ पेनल्टी कार्नरों में कमी आई है.
इस तरह जापान को रोकने में मदद मिल सकती है, क्योंकि उसने चीन के ख़िलाफ़ जीत में तीन में से दो गोल पेनल्टी कार्नर पर जमाए थे.
इसके अलावा भारत के पास हरमनप्रीत जैसे मैच का रुख़ मोड़ने वाले ड्रेग फ्लिकर हैं, जो तुरुप का इक्का साबित हो सकते हैं.
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