ट्रंप ने कनाडा, ग्रीनलैंड और पनामा नहर के बाद मैक्सिको की खाड़ी पर दिया बड़ा बयान, क्या है पूरा मामला?
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एक और प्रेस कॉन्फ्रेंस और डोनाल्ड ट्रंप का एक और विवादास्पद बयान.
मंगलवार को ट्रंप ने मैक्सिको की खाड़ी का नाम बदलकर अमेरिका की खाड़ी करने की बात कही.
ट्रंप ने फ़्लोरिडा में घोषणा की, "बहुत जल्द हम बदलाव की घोषणा करने जा रहे हैं...क्योंकि वो हमारा ही है... हम मैक्सिको की खाड़ी का नाम बदलकर अमेरिका की खाड़ी करने जा रहे हैं.''
"अमेरिका की खाड़ी...कितना सुंदर नाम है. और यही सही है."
उन्होंने अपने प्रस्ताव के बारे में अधिक जानकारी दिए बिना मैक्सिको के बारे में बात करना जारी रखा, "लाखों लोगों को अमेरिका में घुसने की अनुमति देना बंद करना चाहिए."
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ट्रंप के बयान पर मैक्सिको ने क्या कहा?
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बाद में नवनिर्वाचित राष्ट्रपति ने मैक्सिको और कनाडा पर टैरिफ़ लगाने की अपनी धमकी भी दोहराई.
ट्रंप ने यह नहीं बताया कि वह मैक्सिको की खाड़ी का नाम कैसे और कब बदलेंगे, लेकिन उनकी टिप्पणियों के तुरंत बाद, रिपब्लिकन सांसद मार्जोरी टेलर ग्रीन ने कहा कि वह मैक्सिको की खाड़ी का नाम बदलने के लिए जल्दी ही एक विधेयक पेश करेंगी.
टेलर ग्रीन ने एक्स पर लिखा, "राष्ट्रपति ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शानदार शुरुआत हुई है."
लेकिन क्या किसी अंतरराष्ट्रीय महासागर, सागर या खाड़ी का नाम बदलना संभव है?
पर सवाल ये है कि मैक्सिको की खाड़ी का मालिक कौन है?
मैक्सिको की खाड़ी समुद्र में 16 से 20 लाख वर्ग किलोमीटर कवर करती है. ये पूर्वी मैक्सिको, दक्षिणपूर्वी अमेरिका और पश्चिमी क्यूबा के समुद्र तटों तक फैली, अटलांटिक महासागर और कैरेबियन सागर के बीच स्थित एक महासागरीय बेसिन है.
मैक्सिको के पाँच राज्य के समुद्र तट इस खाड़ी पर हैं. ये राज्य हैं - तमाउलिपास, वेराक्रूज़, टबैस्को, कैम्पेचे और युकाटन.
अमेरिकी राज्य फ्लोरिडा, अलबामा, मिसिसिपी, लुइज़ियाना और टेक्सास और क्यूबा के पिनार डेल रियो और आर्टेमिसा प्रांत के समुद्र तट भी इसी खाड़ी पर हैं.
तेल का भंडार
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ये खाड़ी दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल उत्पादक क्षेत्रों में से एक है. अमेरिका के कुल कच्चे तेल उत्पादन का 14 फ़ीसदी और प्राकृतिक गैस उत्पादन का 5 फ़ीसदी हिस्सा इसी खाड़ी से आता है.
मैक्सिको के लिए भी ये खाड़ी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि देश का अधिकांश तेल यहीं से निकाला जाता है.यही तेल मैक्सिको की अर्थव्यवस्था में एक बड़ी हिस्सेदारी रखता है.
'यूनाइटेड नेशन्स कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ़ द सी' जैसे संगठनों के अंतर्गत अमेरिका और मैक्सिको, अमेरिका और क्यूबा, मैक्सिको और क्यूबा के बीच अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा परिसीमन समझौते क़ायम हैं.
अंतरराष्ट्रीय हाइड्रोग्राफिक संगठन (आईएचओ) नाम के सर्वोच्च अंतरराष्ट्रीय प्राधिकरण ने भी अमेरिका, मैक्सिको और क्यूबा के बीच मैक्सिको की खाड़ी के सीमा परिसीमन को परिभाषित किया है.
इसे मैक्सिको की खाड़ी क्यों कहा जाता है?
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16वीं सदी के यूरोपीय नक्शों पर इस खाड़ी को सबसे पहले मैक्सिको की खाड़ी का नाम दिया गया था.
फ़्लोरिडा की अख़बार सेंट अगस्टीन रिकॉर्ड में सुसान पार्कर ने लिखा है , "1580 के दशक में (अंग्रेजी खोजकर्ता) फ्रांसिस ड्रेक के कैरीबियाई अभियानों के मानचित्रकार बैपटिस्ट बोज़ियो ने अपने मानचित्र पर 'मैक्सिको की खाड़ी' नाम का इस्तेमाल किया.
उनके इस नक्शे का शीर्षक था - व्यू ऑफ़ इंटायर रूट ऑफ़ सर फ़्रांसिस ड्रेक्स वोयाज टू वेस्ट इंडीज़
पार्कर आगे लिखती हैं, "डी ब्राई के 1591 के मानचित्र में भी मैक्सिको की खाड़ी के नाम का इस्तेमाल किया गया है."
1630 के एक अन्य मानचित्र में इस जल क्षेत्र को "न्यू स्पेन की खाड़ी" कहा गया.
लेकिन मैक्सिको की खाड़ी वह नाम है जो 400 से अधिक वर्षों से सबसे अधिक बार उपयोग किया जाता रहा है.
क्या नाम बदलना संभव है?
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ट्रंप को मैक्सिको की खाड़ी का नाम बदलने के लिए मैक्सिको और क्यूबा से मंजूरी लेना लाज़िमी होगा.
मैक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम ने बुधवार को ट्ंप के प्रस्ताव का जवाब देते हुए कहा, "हम मैक्सिको-अमेरिका की खाड़ी क्यों नहीं कहते? यह सुनने में अच्छा लग रहा है."
लेकिन मैक्सिको के अर्थव्यवस्था मंत्री मार्सेलो एबरार्ड ने कहा कि इस सागर को 'मैक्सिको की खाड़ी ही कहा जाता रहेगा."
एब्रार्ड ने घोषणा की, "हम हर दिन ऐसे बयानों का जवाब नहीं दे सकते.अगर हम अगले 30 वर्षों की बात करें तो इसे मैक्सिको की खाड़ी ही कहा जाता रहेगा. हम नाम बदलने की बहस में पड़ना ही नहीं चाहते. हम तो बस दोनों देशों के बीच संबंधों को पटरी पर रखना चाहते हैं."
खाड़ी का नाम बदलने के लिए ट्रंप को अंतरराष्ट्रीय हाइड्रोग्राफिक संगठन, समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन और भौगोलिक नामों पर संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों के समूह (UNGEGN) सहित कई अंतरराष्ट्रीय निकायों से मूल्यांकन और अनुमोदन की भी ज़रूरत होगी.
इसके अलावा एक नए नाम का अर्थ है कि तीनों देशों को अपने आधिकारिक मानचित्रों और कानूनों में बदलाव करना होगा ताकि नए नाम की कानूनी वैधता स्थापित हो सके.
क्या ट्रंप एकतरफा नाम बदल सकते हैं?
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नाम बदलने को लेकर मैक्सिको और क्यूबा के विरोध के बावजूद डोनाल्ड ट्रंप चाहें तो अपनी इच्छा पूरी कर सकते हैं. लेकिन इस सूरत में बाक़ी देश इस नए नाम को मान्यता नहीं देंगे.
अमेरिका में सरकार के पास जगहों का नाम बदलने की कानूनी व्यवस्था है. इसके लिए यूनाइटेड स्टेट्स बोर्ड ऑन ज्योग्राफिक नेम्स (बीजीएन) की एक सरकारी संस्था है.
बोर्ड अमेरिका में भौगोलिक नामों पर अंतिम फ़ैसला लेता है.
बोर्ड भौगोलिक स्थानों के नाम तय नहीं करता. लेकिन यह अमेरिका की संघीय एजेंसियों, राज्य या स्थानीय सरकारों और जनता द्वारा प्रस्तावित नए नामों को मंजूरी देने या न देने पर अंतिम फ़ैसला करता है.
अगर ट्रंप की मंशा पूरी हुई तो तो वे किसी स्थान के नाम में परिवर्तन करने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति नहीं होंगे.
साल 2015 में बीजीएन ने उत्तरी अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी माउंट मैकेनली का नाम बदलकर माउंट डेनाली करने के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा के अनुरोध को मंजूरी दी थी.
सदियों से अलास्का के मूल निवासी इसे माउंट डेनाली ही कहते आए थे.
इस पर्वत का नाम ओहायो के एक सियासतदान विलियम मैकिनले के सम्मान में रखा गया था. मैकिनले 1896 में अमेरिकी राष्ट्रपति चुने गए थे. उनके दूसरे कार्यकाल के सिर्फ छह महीने बाद उनकी हत्या कर दी गई थी.
मैककिनले ने कभी अलास्का में कदम नहीं रखा था. बराक ओबामा ने कहा कि वो इस चोटी का नाम इसलिए बदल रहे हैं ताकि नेटिव इंडियन्स के साथ संबंधों में सुधार आ सके.
वैसे ट्रंप ये भी कह चुके हैं कि वह माउंट डेनाली के नाम दोबारा माउंट मैककिनले कर देंगे.
अगर वाकई बीजीएन ने मैक्सिको की खाड़ी का नाम बदलने के ट्रंप के संभावित अनुरोध को मंजूरी दे दी तो यह पहली बार नहीं होगा जब मैक्सिको और अमेरिका के बीच नामों को लेकर मतभेद हुआ हो.
अमेरिकी राज्य टेक्सास और मैक्सिको के चिहुआहुआ, कोहुइला, नुएवो लियोन और तमाउलिपास राज्यों के बीच सरहद का काम करने वाली नदी को दोनों देश अलग-अलग नाम से पुकारते हैं.
अमेरिका इसे रियो ग्रांडे कहता है और मैक्सिको रियो ब्रावो.
(ये आर्टिकल बीबीसी की स्पेनिश भाषा की वेबसाइट बीबीसी मुंडो से ली गई है)
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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