तुर्की कैसे ईरान युद्ध की आंच से बचने की कोशिश कर रहा है

इमेज कैप्शन, तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन कह चुके हैं कि उनका देश उस जाल में नहीं फंसेगा जिसमें कुछ लोग उन्हें फंसाना चाहते हैं
    • Author, अज़रा चेलन
    • पदनाम, बीबीसी मॉनिटरिंग
  • पढ़ने का समय: 6 मिनट

अमेरिका और इसराइल के ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध शुरू करने के बाद से तुर्की ने सतर्क रुख़ अपनाया है.

तुर्की के अधिकारियों ने अमेरिका या तेहरान को सीधे तौर पर दोषी ठहराए बिना संघर्ष से जुड़े जोखिमों के बारे में चेतावनी दी है.

28 फ़रवरी को अमेरिका और इसराइल के हमलों के बाद अपने पहले बयान में, तुर्की के विदेश मंत्रालय ने सभी पक्षों से "हमलों को तुरंत रोकने" का आह्वान किया और मध्यस्थता की पेशकश की.

तुर्की ने अब तक यही रुख़ बनाए रखा है.

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एक अप्रैल को तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने कहा, "हमारी प्राथमिकता यह है कि देश सुरक्षित रहे. हम तुर्की को इस संकट से बचाने के लिए दृढ़ संकल्प हैं."

आधिकारिक बयानों और मीडिया रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि तुर्की इस रुख़ को बरकरार रखेगा और अगर युद्ध जारी रहता है तो इसके बुरे प्रभावों से दूर रहने की कोशिश करेगा.

तुर्की का रुख़ क्या है?

इमेज स्रोत, Karim JAAFAR / AFP via Getty Images

इमेज कैप्शन, तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान 19 मार्च, 2026 को दोहा में क़तर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान

तुर्की के अधिकारियों ने मध्यस्थता के साथ-साथ देश को युद्ध से दूर रखने की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया है.

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जब युद्ध के दौरान ईरान की चौथी बैलिस्टिक मिसाइल हवा में ही मार गिराई गई, तो तुर्की के रक्षा मंत्रालय ने घोषणा की कि "सभी ज़रूरी क़दम उठाए गए हैं."

25 मार्च को अर्दोआन ने कहा था, "हम उस जाल में नहीं फंसेंगे जिसमें कुछ लोग हमें फंसाना चाहते हैं. हम सावधानी, दूरदर्शिता और शांति के साथ इस मसले का समाधान करेंगे. साथ ही भाईचारे और अच्छे पड़ोसी के सिद्धांतों का पालन करेंगे."

एक अन्य भाषण में अर्दोआन ने कहा कि "तुर्की अपनी शांतिपूर्ण विदेश नीति बनाए रखेगा."

तुर्की ने ईरान और अमेरिका दोनों के साथ संपर्क बनाकर रखा है, लेकिन सरकारी मीडिया के अनुसार अधिकारियों ने 'शांति कूटनीति' के बारे में अधिक जानकारी नहीं दी है.

तुर्की के विदेश मंत्री ने 28 मार्च को कहा कि उनका देश युद्ध को जल्द से जल्द ख़त्म करने के लिए बातचीत जारी रखेगा.

तुर्की सरकार के क़रीबी माने जाने वाले प्रमुख लेखक अब्दुलकादिर साल्वी ने 30 मार्च को हुर्रियत अख़बार में लिखा, "तुर्की ने मध्य पूर्व में ईरान और खाड़ी देशों के बीच एक बड़े युद्ध को टाल दिया है."

ईरान के हमलों के बाद साल्वी ने अपने लेखों में खाड़ी देशों से तनाव न बढ़ाने का आह्वान किया.

तुर्की के हित किस प्रकार दांव पर लगे हैं?

इमेज स्रोत, Turkish Foreign Ministry / Handout/Anadolu via Getty Images

इमेज कैप्शन, तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान (बाएं से दूसरे) 29 मार्च, 2026 को इस्लामाबाद में. इस दिन तुर्की-मिस्र-पाकिस्तान-सऊदी अरब के विदेश मंत्री ईरान युद्ध पर चर्चा के लिए पाकिस्तान की राजधानी पहुंचे थे

तुर्की की सावधानी उसकी सुरक्षा संबंधी चिंताओं के साथ-साथ ईरान और अमेरिका दोनों के साथ संबंध बनाए रखने की आवश्यकता से जुड़ी है.

तुर्की और ईरान एक लंबी सरहद साझा करते हैं. स्थानीय मीडिया में ये सवाल भी उठे हैं कि कहीं युद्ध के कारण बड़ी संख्या में प्रवासी तुर्की की ओर रुख़ न करें. हालांकि, अभी तक इनकी संख्या बहुत अधिक नहीं रही है.

विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि यह युद्ध क्षेत्र में इसराइल के प्रभाव को बढ़ा सकता है और उनके अनुसार, तुर्की के साथ संघर्ष को जन्म दे सकता है.

अर्दोआन ने हमेशा इस संघर्ष के लिए इसराइल को दोषी ठहराया है और अमेरिका की सीधी आलोचना करने से परहेज़ किया है.

एक अप्रैल को अर्दोआन ने कहा कि इस अवैध युद्ध के लिए इसराइली सरकार ज़िम्मेदार है और यह युद्ध नेतन्याहू के राजनीतिक जीवन को लंबा खींचने के लिए लड़ा जा रहा है.

तुर्की सरकार के क़रीबी माने जाने वाले विश्लेषकों का मानना ​​है कि इसराइल ने अमेरिका को इस युद्ध में घसीटा है, लेकिन हाल के दिनों में तुर्की के मीडिया में राष्ट्रपति ट्रंप की आलोचना बढ़ गई है.

तुर्की और अमेरिका के बीच संबंध भी तनावपूर्ण हैं. अर्दोआन और ट्रंप के बीच सौहार्दपूर्ण संबंधों के बावजूद, तुर्की अमेरिका से रूसी एस-400 रक्षा प्रणाली की खरीद पर लगे प्रतिबंध को हटाने का प्रयास कर रहा है और एफ़-35 लड़ाकू विमान ख़रीदने में भी रुचि रखता है.

ये प्रतिबंध अमेरिका ने रूस से रक्षा उपकरणों की ख़रीद को रोकने के लिए लगाए हैं.

तुर्की के विश्लेषक और आम जनता क्या कहते हैं?

इमेज स्रोत, Fatemeh Bahrami/Anadolu via Getty Images

इमेज कैप्शन, 7 अप्रैल, 2026 को तेहरान में, अमेरिका और इसराइल के हमले में निशाना बनाए गई शरीफ़ यूनिवर्सिटी ऑफ़ टेक्नोलॉजी में हुई तबाही.

तुर्की के ज़्यादातर विश्लेषकों ने सरकार की नीति का समर्थन किया है. पत्रकार मूरत यातकिन ने 29 मार्च को कहा कि अर्दोआन सरकार हमलों की निंदा करते हुए दोनों पक्षों से संपर्क साध रही है और ख़ुद को संघर्ष से दूर रख रही है.

उन्होंने इससे पहले अपनी वेबसाइट पर एक पोस्ट में लिखा था कि "तुर्की का हित देश के अस्तित्व में निहित है, न कि इस संघर्ष में भाग लेने में."

स्तंभकार नबी मेस ने एक अप्रैल को लिखा था कि "तुर्की को अपनी रणनीतिक स्वायत्तता और राजनयिक स्वतंत्रता बनाए रखनी चाहिए."

दक्षिणपंथी समाचार पत्र करार के स्तंभकार मंसूर अकगुन ने लिखा, "क्षेत्र के अंदर और बाहर सहयोगी होना तुर्की की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है. तुर्की को मिस्र, पाकिस्तान, चीन और रूस के अलावा ट्रंप प्रशासन के साथ भी संबंध बनाए रखने चाहिए."

तुर्की में हुए ओपिनियन पोल भी सरकार की सतर्क रणनीति के पक्ष में हैं. रिसर्च फ़र्म मेट्रोपोल के प्रमुख उज़ैर संकार ने 28 मार्च को लिखा कि तुर्की के 68 प्रतिशत लोगों का मानना ​​है कि तुर्की को तटस्थ रहना चाहिए.

इसी सर्वेक्षण में, 22.6 प्रतिशत लोगों का मानना ​​था कि तुर्की को ईरान का समर्थन करना चाहिए, जबकि 1.2 प्रतिशत लोगों का मानना ​​था कि तुर्की को अमेरिका और इसराइल का समर्थन करना चाहिए.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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