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एक्टर विजय की रैली में भगदड़ कैसे मची? ग्राउंड रिपोर्ट
- Author, मुरलीधरन काशी विश्वनाथन
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, तमिल सेवा
- पढ़ने का समय: 7 मिनट
रेवती का घर ठीक उस जगह के सामने है, जहां शनिवार को करूर के वेलुचामिपुरम में कलाकार से राजनेता बने विजय की प्रचार बस रुकी थी.
वो कहती हैं कि शनिवार शाम सात बजे का वह भयावह मंज़र वो अब तक नहीं भूल पाई हैं.
रेवती कहती हैं, "सवेरे से ही यहां भीड़ हो गई थी लेकिन तीन बजे के बाद भीड़ और बढ़ने लगी. जब शाम सात बजे के क़रीब विजय यहां पहुंचे तो उनकी गाड़ी के पीछे भारी भीड़ थी."
"सड़क की एक तरफ गाड़ी लगाने के लिए वहां खड़े लोगों से कहा गया कि वे दूसरी तरफ़ चले जाएं. लेकिन दूसरी तरफ़ पहले से ही बड़ी संख्या में लोग थे. जब दोनों तरफ की भीड़ एक ही जगह पर आ गई तो स्थिति बिगड़ गई."
रेवती बताती हैं कि इस इलाके़ में कुचले जाने की वजह से कई बच्चे और महिलाएं मारे गए हैं.
जिस तरफ विजय की गाड़ी खड़ी थी, वहां भी कई लोग हताहत हुए हैं.
'लोग टिन के छत पर चढ़ गए'
इस घटना के एक प्रत्यक्षदर्शी वेंकटेश कहते हैं, कि जैसे ही विजय पहुंचे और उन्होंने बोलना शुरू किया, भीड़ बढ़ने लगी.
वो कहते हैं, "जब उन्होंने बोलना शुरू किया तो कुछ लोग पास की टिन की छत पर चढ़ गए. नीचे खड़ी महिलाएं दूसरी ओर खिसकने लगीं. उन्हें डर था कि छत गिर जाएगी. उसी वक़्त टिन की छत गिर भी गई. इससे वहां अफ़रा-तफ़री मच गई और लोग गली की ओर भागने लगे. भागते-भागते कई लोग गिर गए और अन्य लोग उनपर चढ़ते हुए भागने लगे."
वो कहते हैं, "इससे कन्फ़्यूज़न फैल गया. हमें लगा कि जो लोग गिर गए हैं वे बेहोश हो गए हैं, लेकिन असल में वो मर चुके थे."
दक्षिण भारतीय सिनेमा में एक जाना-माना चेहरा विजय, अब राजनेता बन चुके हैं. वो तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) पार्टी के अध्यक्ष हैं.
विजय हर शनिवार ज़िले-ज़िले जाकर पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों से मुलाक़ात कर रहे हैं. इस सप्ताह उनका कार्यक्रम नमक्कल और करूर में था.
बीबीसी को पता चला कि शनिवार दोपहर 12 बजे विजय के वेलुचामिपुरम में भाषण देने की घोषणा की गई थी. इस कारण सुबह से ही यहां भीड़ जुटने लगी थी. शाम चार बजे के बाद यहां भीड़ तेज़ी से बढ़ी.
जिस जगह पर विजय भाषण देने वाले थे वहां पहले ही बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए थे. उनकी गाड़ी के पीछे भी बड़ी संख्या में कार्यकर्ता थे.
भारी भीड़ के बीच कार्यकर्ताओं को विजय की गाड़ी के लिए रास्ता देना था. इस वजह से वहां भीड़ का दबाव और बढ़ गया.
'विजय को देखने आए लोग दूसरी तरफ बढ़ने लगे'
विजय की बस जहां रुकी थी, वहां पास ही एक जनरेटर रखा गया था और उसे अस्थायी तौर पर एल्यूमिनियम की चादर से ढंका गया था.
जैसे-जैसे भीड़ बढ़ी, लोग उसपर चढ़ने लगे. इसके अलावा पास की दुकानों की अस्थायी छतों पर भी लोग चढ़ने लगे. उनके बोझ से ये छतें टूट गईं जिस कारण लोग नीचे गिर पड़े.
गोमती शनिवार को हुई इस घटना की एक और चश्मदीद हैं. वो भीड़ की एक और वजह बताती हैं.
वो कहती हैं, "जब विजय करूर के इस इलाक़े में दाख़िल हुए तो गाड़ी के अंदर की लाइटें जल रही थी. लेकिन जैसे ही गाड़ी पुलिस स्टेशन के पास पहुंची, उन्होंने गाड़ी की लाइटें बंद कर दी और गाड़ी का शीशा भी ऊपर कर दिया."
"भीड़ में कई लोग केवल विजय को देखने के लिए आए थे. लेकिन जब वो लोग उन्हें देख नहीं पाए तो वो उस जगह की तरफ बढ़ने लगे जहां विजय भाषण देने वाले थे. इस जगह पर पहले ही काफी भीड़ थी. इस तरह दो तरफ इकट्ठा हुई भीड़ के आपस में टकराने से लोग एकदूसरे पर गिरने लगे और कई लोग कुचले गए."
जब शनिवार शाम वेलुचामिपुरम में विजय ने भाषण देना शुरू किया, उस समय पास की सीवेज ड्रेन का ऊपरी हिस्सा टूट गया और कई लोग नीचे गिर गए.
इस कारण वहां तनाव हो गया और भगदड़ जैसी स्थिति हो गई. कुछ लोग गिरे हुए लोगों के ऊपर से ही भागने लगे.
वेलुचामिपुरम के रहने वाले जस्टिन सवाल करते हैं, "यहां खड़े होने तक की जगह नहीं थी. विजय की गाड़ी के लिए भी जगह नहीं थी. जहां दस हज़ार लोगों की जगह थी वहां तीस हज़ार लोग आ गए तो क्या होगा?"
रैली की जगह को लेकर उठ रहे सवाल
विजय की पार्टी टीवीके की तरफ़ से किसी ने अब तक यह नहीं बताया कि चूक क्यों हुई. लेकिन सोशल मीडिया पर कुछ कार्यकर्ता आरोप लगा रहे हैं कि वहां सुरक्षा के इंतज़ाम पर्याप्त नहीं थे.
वहीं कुछ का कहना है कि विजय ने जिस जगह के लिए गुज़ारिश की थी उन्हें वहां के लिए इजाज़त नहीं दी गई. साथ ही उनके वहां पहुंचते ही बिजली काट दी गई.
विजय ने अपनी गाड़ी खड़ी करने के लिए करूर बस स्टैंड चौराहा और लाइट हाउस चौराहा समेत चार जगहों के लिए गुज़ारिश की थी. लेकिन उन्हें करूर से इरोड जाने वाली सड़क पर वेलुचामिपुरम में भाषण देने की अनुमति दी गई.
हालांकि पुलिस ने इन आरोपों से इनकार किया है. अधिकारियों का कहना है कि टीवीके की सहमति के बाद ही उन्हें वेलुचामिपुरम में सभा करने की इजाज़त दी गई थी.
रविवार को करूर में पत्रकारों से बात करते हुए अतिरिक्त एडीजीपी लॉ एंड ऑर्डर, डेविडसन देवसिरवधम ने कहा कि टीवीके ने कार्यक्रम के लिए जिन जगहों की मांग की गई थी, उन्हें अलॉट नहीं किया जा सकता था.
डेविडसन देवसिरवधम ने कहा, "उन्होंने लाइट हाउस चौराहे के पास की जगह मांगी थी. लेकिन ये जोखिम-भरा क्षेत्र था. इसकी एक वजह ये है कि यहां एक तरफ पेट्रोल पंप और दूसरी तरफ नदी और पुल था."
उन्होंने बताया, "उन्होंने कहा था कि अगर लाइट हाउस चौराहे के पास जगह नहीं है तो उन्हें कार्यक्रम के लिए एक फार्मर्स मार्केट एरिया की जगह दी जाए. वो भी एक बहुत संकरी जगह है. लेकिन इस तरह के कार्यक्रमों के लिए वेलुचामिपुरम एक अप्रूव्ड जगह है. इसलिए उनकी सहमति से ये जगह उन्हें दी गई."
साथ ही अतिरिक्त एडीजीपी ने बताया कि इस रैली के लिए उतनी सुरक्षा दी गई थी जितनी ज़रूरी थी.
बिजली कटने का भी आरोप
बिजली कटौती के आरोपों पर बिजली विभाग ने जवाब दिया है.
विभाग के एक अधिकारी ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा कि कुछ लोग बिजली के तारों के पास के पेड़ों पर चढ़ गए थे, इसलिए अस्थायी रूप से बिजली सप्लाई काट दी गई थी.
उन्होंने बताया कि पुलिस ने उन लोगों को पेड़ों से उतारा जिसके बाद बिजली सप्लाई फिर बहाल कर दी गई थी.
उनका कहना है कि ये सब विजय के वहां पहुंचने से पहले हुआ था.
इस हादसे में मारे गए 40 लोगों में से अधिकतर के शव उनके परिजनों को सौंप दिए गए हैं.
बीबीसी हिन्दी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित