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युमनाम खेमचंद कौन हैं जिन्होंने मणिपुर के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है
- Author, दिलीप कुमार शर्मा
- पदनाम, गुवाहाटी से बीबीसी हिंदी के लिए
- पढ़ने का समय: 10 मिनट
बीजेपी विधायक युमनाम खेमचंद ने बुधवार शाम को मणिपुर के लोक भवन में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.
इससे कुछ घंटे पहले गृह मंत्रालय ने एक नोटिफ़िकेशन जारी करके मणिपुर से तुरंत राष्ट्रपति शासन हटाने की घोषणा की थी.
युमनाम खेमचंद सिंह को मंगलवार को ही मणिपुर बीजेपी के विधायक दल का नेता चुना गया था.
बीजेपी मणिपुर ने एक्स पर पोस्ट करके उनके शपथ ग्रहण के कार्यक्रम की जानकारी दी थी.
इसमें लिखा था, "उनके अनुभवी और दूरदर्शी नेतृत्व में, मणिपुर शांति, विकास और सुशासन के रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए तैयार है, जिससे राज्य में स्थिरता और प्रगति का एक नया दौर शुरू होगा."
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युमनाम खेमचंद ने बुधवार को ही राज्य के गवर्नर अजय कुमार भल्ला को बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के गठन का समर्थन पत्र सौंपा था.
इस दौरान उनके साथ बीजेपी के महासचिव तरुण चुघ, पूर्वोत्तर राज्यों के कोर्डिनेटर संबित पात्रा समेत बाक़ी एनडीए के नेता भी थे.
कैसे आगे आया युमनाम खेमचंद का नाम
पिछले साल 8 दिसंबर को सोशल मीडिया पर साझा की गई एक तस्वीर मणिपुर में लोगों के चर्चा का विषय बन गई थी.
दरअसल यह तस्वीर उखरूल ज़िले के एक कुकी गांव की थी जहां बीजेपी नेता युमनाम खेमचंद सिंह एक रिलीफ़ कैंप के बाहर एक छोटी बच्ची को गोद में उठाए हुए थे.
यह बच्ची कुकी जनजाति की थी. तीन मई 2023 को राज्य में भड़की जातीय हिंसा के बाद से यह पहला मौका था जब किसी मैतेई नेता ने विस्थापित कुकी लोगों के बीच जाकर उनकी तकलीफ़ों को जानने की कोशिश की थी.
बीते 21 महीनों में न किसी नेता ने ऐसा क़दम उठाया था और न ही राज्य में इस तरह की तस्वीर किसी ने देखी थी.
तीन फ़रवरी को जब मणिपुर के अगले सीएम के तौर पर नई दिल्ली में बीजेपी नेताओं की बैठक के बाद 62 साल के खेमचंद के नाम की घोषणा हुई तो फिर से उस तस्वीर की चर्चा होने लगी.
मणिपुर की मौजूदा हालत में खेमचंद ही एक ऐसे मैतेई नेता हैं जिनकी कुकी-ज़ो समुदाय के वर्गों के बीच आज भी स्वीकार्यता है.
हालांकि राज्य में व्यापक हिंसा और दोनों समुदाय के सैकड़ों लोगों की मौत के बाद नफ़रत और सामाजिक अलगाव ने भरोसे को पूरी तरह ख़त्म कर दिया है.
मणिपुर की राजनीति को कई दशकों से कवर करने वाले वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप फंजौबम ने बीबीसी न्यूज़ हिंदी से कहा, "बीजेपी में खेमचंद सिंह के नाम पर आम सहमति थी. इसकी प्रमुख वजह यह है कि पार्टी को पता था कि मौजूदा हालात में खेमचंद ही एकमात्र ऐसे नेता हैं जिनके नाम पर कुकी समुदाय सबसे कम विरोध करेगा. दूसरी बड़ी वजह यह है कि मणिपुर में खेमचंद बीजेपी के साथ-साथ आरएसएस के भी बहुत भरोसेमंद आदमी माने जाते हैं."
उनके अनुसार, मणिपुर में बीते करीब एक साल से राष्ट्रपति शासन लगा है जिससे बीजेपी को बाहर निकलना था.
वो कहते हैं," बीते कुछ महीनों में बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने नई दिल्ली और मणिपुर में अपने नेताओं के साथ नई सरकार के गठन को लेकर जो बैठक की थी उसमें सीएम के तौर पर खेमचंद ही सबसे ज़्यादा फिट बैठ रहे थे. वह कुकी-ज़ो के साथ नगा लोगों के समीकरण में भी ज़्यादा ठीक नज़र आए. पिछले दिसंबर में नगा बहुल उखरूल ज़िले में कुकी जनजाति के राहत शिविर में खेमचंद का दौरा उनके इस नए राजनीतिक नेतृत्व का ही संकेत था."
खेमचंद ने उस दौरान कुकी बच्ची के साथ तस्वीर साझा करते हुए लिखा था, "शांतिपूर्ण और प्रगतिशील मणिपुर के लिए यह ज़रूरी है कि हम एकता बनाए रखें. शांति और सद्भाव के माहौल में एक साथ रहें. हम सब मिलकर हर तरह की हिंसा को छोड़ दें और अपने राज्य के लिए आपसी समझ, सम्मान और स्थायी विकास की दिशा में काम करें."
कुकी आदिवासी संस्था कुकी इनपी ने क्या कहा?
मणिपुर में कुकी आदिवासी लोगों की प्रमुख संस्था कुकी इनपी के प्रवक्ता लुन किपगेन इस बात को मानते हैं कि युमनाम खेमचंद सिंह बाकी मैतेई नेताओं में से एक लिबरल नेता माने जाते हैं. लेकिन हिंसा के दौरान वो खेमचंद की भूमिका पर सवाल भी उठाते है.
वो कहते हैं, "भले ही खेमचंद सिंह लिबरल हैं लेकिन जब बीरेन सिंह अपने पावर का ग़लत इस्तेमाल कर रहे थे, तब ये लिबरल लोग कहां थे? लिहाज़ा सीएम के तौर पर खेमचंद सिंह, बीरेन या विश्वजीत कोई भी हो सकता है, इससे कुकी-ज़ो समुदाय को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता क्योंकि वे सभी एक ही समुदाय के हैं."
कुकी इनपी के प्रवक्ता लुन के अनुसार, कुकी-ज़ो समुदाय के लोग मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम से हैरान हैं.
वो कहते हैं, "भारत सरकार ने कुकी-ज़ो और मैतेई के बीच भरोसे की कमी को दूर किए बिना ही सरकार को फिर से बहाल करने का फै़सला किया है. जबकि हमें पहले ही अलग कर दिया गया है. ऐसा लगता है कि कुकी-ज़ो विधायकों को अहम पोर्टफ़ोलियो देना नॉर्मल स्थिति का संकेत नहीं है, बल्कि यह लीडरशिप का जबरन समझौता और राज्य में बीजेपी पार्टी की इज़्ज़त बचाने की कोशिश है."
हालांकि, गौर करने वाली बात यह है कि मंगलवार को नई दिल्ली में जब बीजेपी विधायक दल की बैठक में खेमचंद सिंह को निर्विरोध नेता चुना गया उस दौरान पार्टी के 7 कुकी-ज़ो विधायकों में से पांच मौजूद थे.
मणिपुर प्रदेश बीजेपी के एक नेता ने नाम प्रकाशित नहीं करने की शर्त पर बताया कि इस नई 'लोकप्रिय सरकार' में कुकी और नगा लोगों को सही प्रतिनिधित्व देने के लिए दो डिप्टी चीफ़ मिनिस्टर बनाने की बात पर विचार किया गया है.
शपथ ग्रहण समारोह के दौरान कुकी-ज़ो बहुल कांगपोकपी विधानसभा क्षेत्र की विधायक नेमचा किपगेन ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली.
पिछली सरकार में मंत्री रहीं नेमचा की शादी थांगबोई किपगेन से हुई है, जो कुकी नेशनल फ्रंट नाम के चरमपंथी संगठन के चेयरमैन हैं. फिलहाल यह संगठन 2008 से केंद्र सरकार के साथ सस्पेंशन ऑफ़ ऑपरेशन समझौते के तहत है.
बीरेन सिंह के साथ ही राजनीति में हुई थी एंट्री
खेमचंद ने 2002 में पूर्व मुख्यमंत्री बीरेन सिंह के साथ डेमोक्रेटिक रिवोल्यूशनरी पीपल्स पार्टी के हिस्से के तौर पर अपना राजनीतिक करियर शुरू किया था.
दरअसल यह वो समय था जब भारत सरकार ने नगा विद्रोही समूह एनएससीएन-आईएम के साथ 1997 के सीज़फ़ायर को आगे बढ़ाने का फै़सला लिया था.
उस दौरान इस फै़सले के विरोध में मैतेई समूहों ने एक आंदोलन खड़ा किया था जिसमें खेमचंद और बीरेन सिंह ने प्रमुख भूमिका निभाई थी.
उसके बाद ही डेमोक्रेटिक रिवोल्यूशनरी पीपल्स पार्टी का गठन किया गया. उस आंदोलन से चर्चा में आए बीरेन सिंह 2002 में उस पार्टी से विधायक चुने गए थे, बाद में वो कांग्रेस में शामिल हो गए.
लेकिन खेमचंद 2013 में बीजेपी में शामिल हुए और 2017 में सिंगजामेई सीट से पार्टी के टिकट पर मणिपुर विधानसभा में एंट्री की.
उन्हें राज्य में पहली बीजेपी सरकार का पहला विधानसभा अध्यक्ष बनाया गया था. फिर 2022 में जब बीजेपी दूसरी बार सत्ता में आई तो खेमचंद को कैबिनेट मंत्री बनाया गया.
उस दौरान भी जब सीएम की कुर्सी को लेकर बीरेन सिंह और बिस्वजीत सिंह के बीच अंदरूनी कलह शुरू हुई थी तो एक विकल्प तौर पर खेमचंद का नाम ही सामने आया था जिसकी बड़ी वजह उनके आरएसएस के साथ मज़बूत रिश्तों को बताया जाता है.
ताइक्वांडो में ब्लैक बेल्ट
पेशे से एक शिक्षक होने के साथ ही युमनाम खेमचंद सिंह पारंपरिक ताइक्वांडो कला शैली में 5वीं डैन ब्लैक बेल्ट प्राप्त करने वाले पहले भारतीय हैं.
उन्हें 30 दिसंबर 2025 को सियोल में संगठन के कार्यालय में ग्लोबल ट्रेडिशनल ताइक्वांडो फे़डरेशन उपाध्यक्ष मायोंग सुक से 5वां डैन प्रमाणपत्र मिला था.
हालांकि खेमचंद हमेशा प्रचार-प्रसार से दूर एक साधारण व्यक्ति के तौर पर रहना पसंद करते हैं.
यही वजह है कि खेमचंद राज्य में उथल-पुथल माहौल के दौरान सार्वजनिक बयान देने से बचते हुए खुद को लाइमलाइट से दूर रखा.
मणिपुर की राजनीति को समझने वाले वरिष्ठ पत्रकार समीर के पुरकायस्थ कहते हैं, "मणिपुर में मौजूदा उथल-पुथल और हिंसा के कारण जो भौगोलिक और राजनीतिक अलगाव हुआ है, उसे ठीक करने के लिए राज्य में एक सरकार का होना बेहद ज़रूरी है. उस लिहाज़ से खेमचंद सिंह इस समय सही विकल्प हैं."
वो कहते हैं, "बीजेपी ने खेमचंद का चयन काफ़ी सोच-विचार कर किया है. मौजूदा हालात में पार्टी को राज्य चलाने के लिए एक ऐसे नेता की ज़रूरत थी जो मैतेई घाटी और कुकी पहाड़ियों में हिंसा की वजह से बड़े पैमाने पर विस्थापन, राहत कैंप और जो गहरा अविश्वास पैदा हुआ है, उसे ठीक कर सके. क्योंकि पार्टी को अगले साल विधानसभा चुनाव में भी उतरना है."
उनके अनुसार, "नई सरकार एक ऐसे राज्य में काम करेगी जो अब भी सामाजिक रूप से बंटा हुआ है, जहां विस्थापित आबादी है, कुछ हिस्सों में आवाजाही पर पाबंदी है. जहां अपनों को खोने का दर्द है और लोग न्याय मिलने की उम्मीद लगाए हुए हैं. ऐसा प्रदेश जहां पीड़ितों की अलग-अलग दर्दनाक कहानियां हैं. नई सरकार का पहला काम इन सभी लोगों के भरोसे को फिर से कायम करना होगा."
इंफ़ाल वेस्ट जिले में कीशमथोंग विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक सपम निशिकांत सिंह ने कहा, "युमनाम खेमचंद एक बहुत अनुभवी नेता हैं और उनका हमारे पहाड़ी कुकी भाइयों के साथ भी अच्छा तालमेल है. राज्य के हर समुदाय में उनकी स्वीकार्यता है और वो अपने राजनीतिक अनुभव के बूते मौजूदा हालात को सामान्य करने में सक्षम हैं."
राष्ट्रपति शासन की मियाद 13 फ़रवरी तक
पिछले साल 13 फ़रवरी को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था जिसकी मियाद ख़त्म होने में अब महज़ सात दिन का समय बचे हैं.
बीजेपी विधायक दल के नेता के रूप में चुने जाने के बाद खेमचंद के नाम को मणिपुर में बीजेपी (एनडीए) के सहयोगी दलों के विधायकों द्वारा औपचारिक रूप से समर्थन दिए जाने की उम्मीद है, जिसमें नेशनल पीपल्स पार्टी (एनपीपी), नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) के विधायक शामिल हैं.
इस समर्थन के संदर्भ में राजधानी इंफाल में अलग-अलग बैठकों का आयोजन हो रहा है.
60 सदस्यों वाली मणिपुर विधानसभा अभी सस्पेंडेड एनीमेशन में है और जिसका कार्यकाल 2027 तक रहेगा यानी बिना नए चुनावों के सरकार को फिर से बहाल किया जा सकता है.
भारतीय संविधान के तहत, सस्पेंडेड एनीमेशन राज्य विधानसभा की एक अस्थायी स्थिति है, जहां राष्ट्रपति शासन लगने के बाद विधानसभा को भंग नहीं किया जाता है, बल्कि ये असक्रिय हो जाती है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.