You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
लीबिया के पूर्व नेता मुअम्मर ग़द्दाफ़ी के बेटे की 'गोली मारकर हत्या', पश्चिमी देशों से थी क़रीबी और बाघ पालने के शौकीन
ख़बर है कि लीबिया के पूर्व नेता कर्नल मुअम्मर ग़द्दाफ़ी के बेटे सैफ़ अल-इस्लाम ग़द्दाफ़ी की गोली मारकर हत्या कर दी गई है.
लीबियाई न्यूज़ एजेंसी ने उनकी टीम के प्रमुख के हवाले से ये ख़बर दी.
सैफ़ अल-इस्लाम ग़द्दाफ़ी को कभी अपने पिता का उत्तराधिकारी माना जाता था.
उनके वकील ने एएफ़पी समाचार एजेंसी को बताया कि चार लोगों की एक टीम ने ज़िंतान शहर में उनके घर पर हमला कर उनकी हत्या कर दी.
हालांकि अभी यह साफ़ नहीं है कि इस हमले के पीछे कौन था.
हालांकि उनकी मौत को लेकर उनकी बहन ने अलग ही दावा किया.
उन्होंने लीबियाई टीवी को बताया कि सैफ़ अल-इस्लाम की मौत लीबिया-अल्जीरिया सीमा के पास हुई.
सैफ़ अल-इस्लाम ग़द्दाफ़ी को लंबे समय तक अपने पिता के बाद देश का सबसे प्रभावशाली नेता माना जाता था जिनका लोगों के मन में ख़ौफ़ था.
उनके पिता मुअम्मर ग़द्दाफ़ी ने 1969 से 2011 तक लीबिया पर शासन किया था और बाद में विद्रोह के दौरान उन्हें सत्ता से हटाकर मार दिया गया था.
1972 में जन्मे सैफ़ अल-इस्लाम ने साल 2000 से ग़द्दाफ़ी शासन के पतन तक पश्चिमी देशों के साथ लीबिया के रिश्ते सुधारने में अहम भूमिका निभाई थी.
सैफ़ अल-इस्लाम ग़द्दाफ़ी पर सरकार विरोधी प्रदर्शनों को कुचलने में बड़ी भूमिका निभाने का आरोप लगा और मुअम्मर ग़द्दाफ़ी की मौत के बाद उन्हें ज़िंतान शहर में एक प्रतिद्वंद्वी मिलिशिया ने लगभग छह साल तक क़ैद में रखा.
2015 में सुनाई गई मौत की सज़ा
अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) 2011 में लीबिया में हुए विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए उनके ख़िलाफ़ मानवता के ख़िलाफ़ अपराधों का मुक़दमा चलाना चाहता था.
2015 में एक लीबियाई अदालत ने उन्हें इन अपराधों का दोषी ठहराकर उनकी ग़ैरमौजूदगी में उन्हें मौत की सज़ा सुनाई.
हालांकि सरकार में उनका कोई औपचारिक पद नहीं था, फिर भी सरकार की नीतियां बनाने में उनकी अहम भूमिका थी और वो कई बार बड़े स्तर पर हो रही बातचीत में देश का प्रतिनिधित्व करते थे.
इनमें वो समझौते भी शामिल थे जिनके तहत उनके पिता को लीबिया का परमाणु कार्यक्रम रोकना पड़ा था.
इन समझौतों के बाद इस उत्तरी अफ़्रीकी देश पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हटाए गए और कुछ लोगों ने ग़द्दाफ़ी को बदलते हुए लीबिया का सुधारवादी चेहरा माना.
ग़द्दाफ़ी हमेशा यह कहते रहे कि वे अपने पिता से सत्ता विरासत में नहीं लेना चाहते. उनका कहना था कि सत्ता की बागडोर कोई खेत नहीं है जिसे विरासत में लिया जाए.
हालांकि 2021 में उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव लड़ने का ऐलान किया था, लेकिन ये चुनाव बाद में अनिश्चितकाल के लिए टाल दिए गए.
बाघ पालने के शौकीन
सैफ़ अल-इस्लाम ग़द्दाफ़ी अच्छी अंग्रेज़ी बोलते थे और स्टाइलिश तरीक़े से रहते थे, इस कारण से उन्हें लीबिया सरकार का सुधारवादी चेहरा माना जाता था.
सैफ़ बाघ पालने के शौक़ीन थे. रेगिस्तान में बाज़ से शिकार करना उन्हें पसंद था. ये अरब राजघरानों का पुराना शौक़ है. वे शौकिया चित्रकार भी थे.
2008 में उन्होंने लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से पीएचडी ली. उन्होंने राजनीतिक सुधार की बात की थी. यही विषय उन्होंने अपनी डॉक्टरेट में रखा था.
जब प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई में उनकी भूमिका सामने आई, तो लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स के निदेशक हॉवर्ड डेविस ने इस्तीफ़ा दे दिया. इसकी वजह बना सैफ़ की ओर से लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स को मिला तीन लाख पाउंड का दान.
चैरिटी से मिले फ़ंड पर सवाल उठे. क्या सैफ़ की पीएचडी चोरी की हुई थी, इस पर जांच हुई. लेकिन फ़ैसला हुआ कि डिग्री नहीं छीनी जाएगी, क्योंकि थीसिस में जगह-जगह सुधार की ज़रूरत बताई गई थी.
लीबिया को पश्चिमी देशों के क़रीब कैसे लाए?
सैफ़ ने लीबिया को पश्चिमी देशों के क़रीब लाने में बड़ी भूमिका निभाई.
ऐसा कहा जाता है कि सैफ़ ने अपने पिता के पैसे से पश्चिमी देशों के साथ संबंध सुधारे. इसके अलावा, उन्होंने अपने पिता से परमाणु हथियार कार्यक्रम छोड़ने के लिए बातचीत की.
बाद में उन्होंने छह बुल्गारियाई डॉक्टरों की रिहाई में मदद की, जिन पर लीबिया के अस्पताल में बच्चों को एचआईवी संक्रमित करने का आरोप था. ऐसे क़दम उन्हें पश्चिमी देशों के क़रीब ले आए.
सैफ़ का लंदन में घर भी था. वे ब्रिटेन की राजनीति से जुड़ी हस्तियों से मुलाक़ात करते थे, शाही परिवार से भी उनके संपर्क थे.
उन्होंने ड्यूक ऑफ़ यॉर्क (ब्रिटेन के शाही परिवार में एक उच्च-स्तरीय उपाधि है, जो 15वीं शताब्दी से ब्रिटिश सम्राट के दूसरे पुत्र को दी जाती है) से दो बार मुलाक़ात की, एक बार बकिंघम पैलेस में और दूसरी बार त्रिपोली में.
पश्चिम के ताक़तवर लोग सैफ़ से इसलिए भी क़रीबी बनाना चाहते थे, क्योंकि लीबिया के पास तेल का बड़ा भंडार था.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.