प्रदीप शर्मा: 'एनकाउंटर स्पेशलिस्ट', राजनेता से लेकर आजीवन कारावास तक
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महाराष्ट्र के पूर्व पुलिस अधिकारी और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के नाम से मशहूर प्रदीप शर्मा को बॉम्बे हाई कोर्ट ने उम्र कैद की सजा सुनाई है.
उन्हें ये सज़ा साल 2009 में राम नारायण गुप्ता उर्फ लखन भैया के फर्जी मुठभेड़ मामले में दी गई है.
उन्हें तीन सप्ताह के अंदर खुद को सरेंडर करने का समय दिया गया है.
शर्मा करीब 25 साल की नौकरी के बाद पिछले कुछ सालों से राजनीति में सक्रिय होने की कोशिश कर रहे थे.
लेकिन कोर्ट के फ़ैसले से उनकी राजनीतिक कोशिशों को झटका लगा है.
कौन हैं प्रदीप शर्मा?
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प्रदीप शर्मा ने पुलिस की नौकरी से सेवानिवृत्ति के बाद राजनीतिक संभावना तलाशते हुए नालासोपारा में शिवसेना के टिकट पर विधान सभा चुनाव लड़ा था.
शर्मा परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के आगरा का रहने वाला है. हालाँकि, प्रदीप शर्मा के पिता महाराष्ट्र के धुले ज़िले में बस गए थे और वे एक शिक्षक थे.
शर्मा की प्राथमिक शिक्षा से लेकर एमएससी तक की पढ़ाई धुले में ही हुई. अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद वह एमपीएससी में चयनित होकर पुलिस सेवा में शामिल हो गए.
पुलिस सेवा के आकर्षण के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया था, "जब हम धुले में थे, तो एक इंस्पेक्टर हमारे पड़ोस में रहता था. हम उसे तब देखते थे जब हम छोटे थे. वह वर्दी में बाइक से चलते थे. पुलिस सेवा के प्रति आकर्षण का एक कारण यह भी था."
1983 का पुलिस बैच
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महाराष्ट्र में पुलिस का 1983 राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों का बैच सबसे मशहूर हुआ. इस बैच में प्रफुल्ल भोसले, विजय सालस्कर, रवींद्र आंग्रे और असलम मोमिन जैसे 'एनकाउंटर स्पेशलिस्ट' कहे जाने वाले पुलिस अधिकारी थे.
प्रदीप शर्मा भी इसी बैच से हैं. इस बैच ने नासिक पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में प्रशिक्षण के बाद 1984 से पुलिस सेवा शुरू की.
प्रदीप शर्मा को पहली बार मुंबई के माहिम पुलिस स्टेशन में पुलिस सब-इंस्पेक्टर के रूप में नियुक्त किया गया था. इसके बाद वह स्पेशल ब्रांच में चले गए. इसके बाद उन्होंने उपनगरीय मुंबई पुलिस स्टेशनों के प्रमुख, अपराध खुफिया में वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक जैसे विभिन्न पदों पर कार्य किया.
मीडिया में इस बात की खूब चर्चा रही कि प्रदीप शर्मा का 26/11 मुंबई हमले में मारे गए पुलिस अधिकारी विजय सालस्कर से विवाद था.
विजय सालस्कर से विवाद
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इस संबंध में प्रदीप शर्मा ने न्यूज चैनल टीवी 9 मराठी से बात करते हुए अपना पक्ष रखा था.
शर्मा ने कहा, "शहीद विजय सालस्कर मेरे सबसे अच्छे दोस्त थे. हम 1983 में पुलिस प्रशिक्षण के लिए एक ही दस्ते में थे. प्रशिक्षण में, सरनेम के पहले अक्षर से दस्तों का गठन किया जाता है. उनका सरनेम सालस्कर है और मेरा सरनेम शर्मा है, इसलिए हम एक ही दस्ते में थे. हम एक साल तक साथ रहे. मुंबई आने के बाद भी हम कई सालों तक साथ रहे. हमने क्राइम ब्रांच में भी साथ काम किया. हमने कुछ बड़े ऑपरेशन भी साथ में किए."
शर्मा कहते हैं, "मुझे आज भी विजय सालस्कर के साथ किया गया काम याद है. मैं आज भी विजय सालस्कर को सबसे बड़े सूचना नेटवर्क वाला अधिकारी मानता हूं. उनके पास मुझसे सौ गुना ज़्यादा नेटवर्क था."
"सालस्कर और मेरी आपस में नहीं बनती, ऐसा मीडिया में बढ़ा चढ़ाकर बताया गया. जबकि ऐसा कुछ भी नहीं था. हमारे झगड़े सिर्फ़ सूचनाओं को लेकर होते थे. अगर उसके पास ख़बर होती तो मैं उन्हें फंसाता था, उन्हें अपनी तरफ़ लाने की कोशिश करता था."
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साल 2009 में राम नारायण गुप्ता उर्फ लाखन भैया की हत्या के मामले में प्रदीप शर्मा को गिरफ़्तार किया गया था.
उनके साथ कुल 13 पुलिस अधिकारियों को गिरफ़्तार किया गया था.
हालांकि, ठाणे सेंट्रल जेल में चार साल बिताने के बाद प्रदीप शर्मा को 2013 में रिहा कर दिया गया.
उन्हें इसी मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई है.
अंबानी मामला
उद्योगपति मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के बाहर बम रखने और मनसुख हिरेन हत्याकांड में भी प्रदीप शर्मा का नाम सामने आया था.
इस मामले में एनआईए ने उन्हें गिरफ़्तार भी किया था.
25 फरवरी 2021 को एंटिला इलाके में विस्फोटकों से भरी एक एसयूवी मिली थी.
इस कार के मालिक और उद्योगपति मनसुख हिरेन का शव 5 मार्च को ठाणे के पास मिला था.
शर्मा पर मनसुख हिरेन की हत्या में पुलिसकर्मी सचिन वाज़े की मदद करने का आरोप है.
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