दवा प्रतिरोधी मलेरिया का ख़तरा

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दक्षिण पूर्वी एशिया में दवा-प्रतिरोधी मलेरिया का तेज़ी से प्रसार हो रहा है और अब यह कंबोडिया-थाईलैंड सीमा तक पहुंच गया है.
वैज्ञानिकों का कहना है कि दवा-प्रतिरोधी मलेरिया को रोकने के लिए "कड़े कदम" उठाने की ज़रूरत है.
वैज्ञानिकों ने <link type="page"><caption> 'न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ़ मेडिसिन'</caption><url href="http://www.nejm.org/" platform="highweb"/></link> में बताया है कि मलेरिया के बढ़ते मामलों से मलेरिया नियंत्रण के प्रयासों को गहरा झटका लगा है.
प्रतिरोधक क्षमता
एक अध्ययन में एशिया और अफ़्रीका के 10 देशों के 1000 मलेरिया मरीजों के खून के नमूनों का परीक्षण किया गया था.
इसमें पाया गया कि पश्चिमी और उत्तरी कम्बोडिया, थाईलैंड, वियतनाम और पूर्वी म्यांमार में परजीवियों ने मलेरिया के सबसे प्रभावकारी दवा अर्टीमिज़ीनिन्स के ख़िलाफ़ प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर ली है.
हालांकि अफ्रीका के तीन देशों केन्या, नाइजीरिया और कांगो में प्रतिरोधी मलेरिया के साक्ष्य नहीं मिले.

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यूनिवर्सिटी ऑफ़ ऑक्सफ़ोर्ड के प्रोफेसर निकोलस व्हाईट ने कहा, "प्रतिरोधक मलेरिया का असर दक्षिण पूर्वी एशिया के अधिकांश हिस्से में है. हम जितना उम्मीद करते थे, यह उससे भी बदतर है. इस दिशा में कुछ करना है तो हमें जल्दी कार्रवाई करनी होगी.''
उन्होंने कहा, ''आगे इसके प्रसार को रोकना बहुत हद तक संभव है, लेकिन मलेरिया नियंत्रण के परंपरागत तरीके पर्याप्त नहीं होंगे. हमें और अधिक कड़े कदम उठाने की ज़रूरत है और बिना देरी किए इसे दुनिया भर में सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में तरजीह देने की ज़रूरत है."
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