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शुक्रवार, 05 अगस्त, 2005 को 15:48 GMT तक के समाचार
 
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अफ्रीकी रवैए पर जी-4 को अफ़सोस
 
सुरक्षा परिषद
अफ्रीकी देश वीटो का अधिकार चाहते हैं
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता के मामले में अफ्रीकी देशों के रूख़ पर भारत ने अफ़सोस प्रकट किया है.

अफ्रीकी संघ और जी-4 के देशों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विस्तार के मसौदे पर सहमति व्यक्त करनी थी लेकिन ऐसा नहीं हो सका है.

अफ्रीकी संघ के देशों की इथियोपिया की राजधानी आदिस अबाबा में हुई बैठक में साझा प्रस्ताव के मसौदे पर सहमति नहीं बन सकी.

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नवतेज सरना ने कहा है कि भारत अफ्रीकी देशों के साथ संपर्क बनाए रखेगा ताकि "आपसी समझ को बढ़ावा दिया जा सके."

 आदिस अबाबा के सम्मेलन में मसौदे पर सहमति नहीं हो पाना हमारे लिए अफ़सोस की बात है
 
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता

सरना ने कहा है कि ताज़ा घटनाक्रम के बाद भारत के विदेश मंत्री नटवर सिंह ने जी-4 के सदस्य देशों--ब्राज़ील, जर्मनी और जापान--के विदेश मंत्रियों से बातचीत की है.

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, "आदिस अबाबा के सम्मेलन में मसौदे पर सहमति नहीं हो पाना हमारे लिए अफ़सोस की बात है."

53 अफ्रीकी देशों के संघ ने जी-4 के इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है कि दो अफ्रीकी देशों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता बिना वीटो के दी जाए.

आदिस अबाबा की बैठक में अफ्रीकी देश अपनी माँग पर क़ायम रहे कि उन्हें भी वीटो का अधिकार मिलना चाहिए, इस बैठक में तय किया गया कि एक दस सदस्यीय समिति इस मामले में पर आगे विचार-विमर्श करेगी.

मदद ज़रूरी

संयुक्त राष्ट्र में भारत के दूत निरूपन सेन ने कहा है कि भारत अफ्रीकी देशों के साथ बातचीत जारी रखेगा क्योंकि "उनकी मदद के बिना राजनीतिक तौर पर इस प्रस्ताव को आगे बढ़ा पाना मुश्किल है."

 हमें अफ्रीकी देशों से इस तरह के फ़ैसले की आशा नहीं थी लेकिन हम उनके साथ बातचीत जारी रखेंगे
 
संयुक्त राष्ट्र में जापानी दूत

संयुक्त राष्ट्र में जापान के दूत केनज़ो ओशिमा ने भी अफ्रीकी देशों के निर्णय पर अफ़सोस प्रकट किया है, उन्होंने कहा, "हमें अफ्रीकी देशों से इस तरह के फ़ैसले की आशा नहीं थी लेकिन हम उनके साथ बातचीत जारी रखेंगे."

भारत सहित जी-4 के देशों को आशा थी कि अफ्रीकी देशों का समर्थन मिलने से संयुक्त राष्ट्र महासभा में होने वाले मतदान में बहुमत जुटाना आसान हो जाएगा लेकिन अब मामला पेचीदा होता दिख रहा है.

संयुक्त राष्ट्र के विस्तार को लेकर महासभा में तीन प्रस्ताव सामने आ सकते हैं, पहला जी-4 देशों का जिसमें भारत, जर्मनी, ब्राज़ील और जापान हैं, दूसरा अफ्रीकी संघ का जिसमें सदस्यों की संख्या 53 है, और तीसरा पाकिस्तान, चीन और इटली जैसे देशों के गुट यूएफ़सी का.

यूनाइटिंग फॉर कानसेंसस यानी यूएफ़सी सुरक्षा परिषद के व्यापक विस्तार का विरोध कर रहा है.

संयुक्त राष्ट्र महासभा के अध्यक्ष जिन पिंग का कहना है कि आने वाले दिनों में वे इन तीनों गुटों के बीच आपसी बातचीत आयोजित करने पर विचार कर रहे हैं.

 
 
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