अमेरिका से बातचीत की चर्चाओं के बीच ईरान में क्या चल रहा है?, लीज़ डूसेट, मुख्य अंतरराष्ट्रीय संवाददाता
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इमेज कैप्शन, ईरान में हर दिन चौराहों पर लोग इकट्ठा होकर देश के प्रति एकजुटता प्रदर्शित करते हैं
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के युद्धविराम की समय सीमा बढ़ाने की घोषणा पर ईरान के सोशल मीडिया पर प्रवक्ताओं की ओर से जो शुरुआती प्रतिक्रिया आईं उसे लेकर आशंकाएं और उम्मीद दोनों थी.
ईरान के मुख्य वार्ताकार के सलाहकार मेहदी मोहम्मदी ने इसे निरर्थक बताते हुए कहा कि यह एक चाल है, ताकि अचानक हमले के लिए समय लिया जा सके.
यह अमेरिका की कूटनीति को लेकर ईरान में गहरे अविश्वास को दिखाता है.
पिछले साल और इस साल हुई पिछले दौर की बातचीत, अचानक हुए इसराइल-अमेरिका के हमलों से पटरी से उतर गई थी.
इस युद्धविराम के तहत ईरान की भी अपनी कुछ प्रतिबद्धताएं हैं. लेकिन वह साफ़ कर रहा है कि वह रणनीतिक होर्मुज़ स्ट्रेट को अपनी शर्तों पर तब तक नहीं खोलेगा, जब तक अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकाबंदी नहीं हटाता और जब्त किए गए जहाज़ को रिहा नहीं करता.
यही इस समय की राजनीतिक गतिरोध की वजह है और यह साफ़ नहीं है कि यह गतिरोध कैसे और कब सुलझेगा.
यहां ईरानियों से बात करने पर अलग-अलग राय सुनने को मिलती है, जो स्वाभाविक है.
सरकार की अपील पर एकजुटता दिखाने के लिए हर रात इस शहर के मुख्य चौराहों पर जुट रहे हैं और वो डटे हुए हैं.
वहीं कुछ लोग कहते हैं कि वे बस अपनी ज़िंदगी आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. वो सालों से असफल परमाणु बातचीत, बढ़ती क़ीमतों, कड़ी होती सुरक्षा और निगरानी और अपनी ज़िंदगी व भविष्य पर लगे कई प्रतिबंधों से थक चुके हैं.
लेबनान में तैनात एक और फ़्रांसीसी सैनिक की मौत
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इमेज कैप्शन, 16 अप्रैल को दक्षिणी लेबनान में गश्त करते यूनिफिल सैनिक (फ़ाइल फोटो)
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि हिज़्बुल्लाह लड़ाकों द्वारा गंभीर रूप से घायल किए जाने के बाद संयुक्त राष्ट्र मिशन के तहत लेबनान में तैनात एक दूसरे फ्रांसीसी सैनिक की मौत हो गई है.
एक्स पर जारी एक बयान में मैक्रों ने कहा, “कॉर्पोरल एनिसे गिरार्दिन को कल देश लाया गया था और आज सुबह उनकी मौत हो गई.”
शनिवार को दक्षिणी लेबनान में संयुक्त राष्ट्र मिशन यूनिफिल के साथ तैनात एक फ्रांसीसी सैनिक की, गश्ती दल पर गोलीबारी के बाद मौत हो गई थी. मैक्रों ने इस हमले के लिए हिज़्बुल्लाह को ज़िम्मेदार ठहराया, हालांकि ईरान समर्थित इस सशस्त्र समूह ने घटना से किसी भी संबंध से इनकार किया है.
वहीं लेबनान में दो और शांति सैनिक घायल हुए हैं.
मैक्रों ने पहले कहा था कि वह हिज़्बुल्लाह और इसराइल के बीच युद्धविराम का “पूरी तरह” समर्थन करते हैं और उन्हें फिक्र है कि सैन्य अभियानों के जारी रहने से यह पहले ही कमज़ो हो सकता है.
उन्होंने हिज़्बुल्लाह से हथियार छोड़ने और इसराइल से लेबनान की संप्रभुता का सम्मान करने का आह्वान किया.
वहीं लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने फ़्रांस के दूसरे सैनिक के मारे जाने की निंदा की है.
ट्रंप ने कहा- शुक्रवार तक ईरान के साथ हो सकती है बातचीत
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इमेज कैप्शन, मंगलवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम को बढ़ाने की घोषणा की थी
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ शांति वार्ता का दूसरा दौर शुक्रवार तक शुरू होने की उम्मीद है.
ये जानकारी न्यूयॉर्क पोस्ट के ज़रिए सामने आई है.
पाकिस्तानी अधिकारियों ने न्यूयॉर्क पोस्ट को बताया कि अगले “36 से 72 घंटे” के भीतर बातचीत हो सकती है.
जब पोस्ट ने इस बारे में ट्रंप से पूछा, तो अमेरिकी राष्ट्रपति ने टेक्स्ट मैसेज में जवाब दिया, “यह संभव है! राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप.”
मंगलवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की थी कि वह ईरान के साथ युद्धविराम को बढ़ाएंगे ताकि ईरान को युद्ध खत्म करने के लिए कोई प्रस्ताव तैयार करने के लिए ज़्यादा समय मिल सके.
सीज़फ़ायर के बीच लेबनान में इसराइली हमला, दो की मौत
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इमेज कैप्शन, इसराइली हमले में तबाह हुआ लेबनान का एक इलाक़ा (फ़ाइल फोटो)
लेबनान की सरकारी नेशनल न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक, दक्षिणी लेबनान के अल-तिरी गांव में एक कार पर हुए इसराइली हमले में दो लोगों की मौत हुई है.
एक दिन पहले, इसराइली सेना ने लेबनान के लोगों को लितानी नदी, वादी अल-सलूकी और वादी अल-सलहानी से दूर रहने की चेतावनी दी थी. इसराइली सेना का कहना है कि वहां "हिज़्बुल्लाह की आतंकवादी गतिविधियां" चल रही हैं.
इसराइल और लेबनान के बीच 16 अप्रैल को युद्धविराम की घोषणा की गई थी, जो 10 दिनों तक चलना है. गुरुवार को अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन में राजदूत स्तर की बातचीत भी होने वाली है.
हिज़्बुल्लाह और इसराइल, दोनों ने एक-दूसरे पर युद्धविराम समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है.
इसराइली सेना ने पहले कहा था कि हिज़्बुल्लाह ने दक्षिणी लेबनान में इसराइली सेना पर हमला किया.
पीएम मोदी पर विवादित बयान के बाद कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे को चुनाव आयोग का नोटिस
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इमेज कैप्शन, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (फ़ाइल फोटो)
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के एक विवादित बयान पर चुनाव आयोग ने नोटिस जारी किया है.
न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के मुताबिक चुनाव आयोग ने खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “आतंकवादी” कहे जाने का संज्ञान लिया है और उन्हें 24 घंटे के भीतर अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया है."
उन्होंने आगे लिखा, “खड़गे जी द्वारा माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “आतंकवादी” कहना सिर्फ एक टिप्पणी नहीं है, बल्कि पूरे देश का गंभीर अपमान है. ऐसा शर्मनाक आचरण सामान्य नहीं माना जा सकता. हमने आयोग से तुरंत संज्ञान लेने का आग्रह किया है.”
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कल यानी मंगलवार को चेन्नई में कहा था, “ये एआईएडीएमके के लोग, जो खुद अन्नादुरई की तस्वीर लगाते हैं, वे मोदी के साथ कैसे जा सकते हैं? वह एक टेररिस्ट हैं. उनकी पार्टी समानता और न्याय में विश्वास नहीं करती. ये लोग उनके साथ जुड़ रहे हैं, इसका मतलब है कि वे लोकतंत्र को कमज़ोर कर रहे हैं.”
खड़गे की सफ़ाई
हालांकि बीजेपी नेताओं के विरोध के बाद, कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि ये झूठ है, "मैंने पीएम के ख़िलाफ़ नहीं बोला. प्रधानमंत्री नेताओं और उम्मीदवारों को डरा रहे हैं, और इसी संदर्भ में मैंने कहा था कि ‘टैक्स टेररिज़्म’ हो रहा है."
"ईडी छापे मार रही है, आयकर विभाग छापे मार रहा है, सीबीआई छापे मार रही है. यह ‘टेररिज़्म’ प्रधानमंत्री ही करा रहे है. मैंने उन्हें आतंकवादी नहीं कहा, वह लोगों को डराने के लिए इस तरह का माहौल बना रहे हैं."
"वह छापों के जरिए लोगों को चुप कराने की कोशिश कर रहे हैं और चुनाव में उन्हें हराने की कोशिश कर रहे हैं. चेन्नई में मैंने यही कहा था.”
वहीं कांग्रेस नेता बीके हरिप्रसाद ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का बचाव किया है.
उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, “खड़गे साहब ने किसी भी कोड ऑफ़ कंडक्ट का उल्लंघन नहीं किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो ‘मन की बात’ के तहत राजनीतिक भाषण दिया, पहले चुनाव आयोग को उनके ख़िलाफ़ एक्शन लेना चाहिए. जहां तक खड़गे साहब के बयान की बात है, उन्होंने ‘टैक्स टेररिज़्म’ की बात की थी.”
लेबनान के राष्ट्रपति बोले- सीज़फ़ायर की समयसीमा बढ़ाने के लिए बातचीत जारी
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इमेज कैप्शन, लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने बताया कि इस बातचीत में क़ैदियों की वापसी भी शामिल है (फ़ाइल फोटो)
लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ़ औन ने कहा है कि इसराइल और लेबनान के बीच युद्धविराम की समयसीमा बढ़ाने के लिए बातचीत जारी है.
यह बयान गुरुवार को वॉशिंगटन में दोनों देशों के बीच होने वाली दूसरी दौर की बातचीत से पहले आया है.
दोनों देशों के बीच फ़िलहाल 10 दिन के अस्थायी युद्धविराम लागू है. ये सीज़फ़ायर 16 अप्रैल को लागू हुआ था.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में औन ने कहा कि जारी बातचीत, “इसराइली हमलों के पूरी तरह रोकने, लेबनानी क्षेत्रों से इसराइली सेना की वापसी, कैदियों की वापसी, अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर सेना की तैनाती और इस युद्ध में हुए नुक़सान के पुनर्निर्माण की शुरुआत पर आधारित है.”
औन ने कहा कि, "बातचीत को लेकर लेबनान का रुख़ साफ है, कोई रियायत नहीं, कोई मोलभाव नहीं और कोई आत्मसमर्पण नहीं. हम वही करेंगे जो लेबनान की संप्रभुता और सभी लेबनानी नागरिकों के हितों को सुनिश्चित करे."
उनके ऑफ़िस की ओर से जारी पोस्ट में कहा गया है कि अमेरिका का समर्थन लेबनान को एक ऐसा अवसर प्रदान करता है जिसे हमें गंवाना नहीं चाहिए.
युद्धविराम को लेकर ईरान के विदेश मंत्रालय का अब आया ये बयान
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इमेज कैप्शन, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से बढ़ाए गए युद्धविराम को लेकर प्रतिक्रिया दी है.
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की ओर से युद्धविराम के अनुरोध के बाद ईरान “राजनीतिक घटनाक्रम पर क़रीबी नज़र बनाए हुआ है.”
ईरान के सरकारी इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज़ एजेंसी यानी आईआरएनए ने ये जानकारी दी है.
टेलीग्राम पर एक पोस्ट में आईआरएनए ने बक़ाई के हवाले से कहा कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा की रक्षा के लिए ज़रूरी और उचित कदम उठाएगा.”
मंगलवार रात, ट्रंप ने पाकिस्तान के अनुरोध पर युद्धविराम बढ़ाने की घोषणा की थी और ईरान की सरकार को “गंभीर रूप से घायल” बताया था.
अमेरिका के साथ आगे की बातचीत की संभावना पर बक़ाई ने कहा, “कूटनीति, राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा को सुनिश्चित करने का एक साधन है, और जब भी हमें लगेगा कि इस साधन का उपयोग करने के लिए ज़रूरी और उचित परिस्थितियां मौजूद हैं, हम इसका इस्तेमाल करेंगे.”
कार्टून: नारी और वीआईपी
इमेज कैप्शन, मुंबई में ट्रैफिक जाम को लेकर महिला के मंत्री पर भड़कने पर आज का कार्टून.
जहाज़ों पर हमले के बाद क्या अमेरिका-ईरान सीज़फ़ायर ख़तरे में है?, सेबेस्टियन अशर, मध्य पूर्व के विश्लेषक, बीबीसी
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इमेज कैप्शन, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज़ स्ट्रेट को बंद करने को, तेहरान के लिए एक आर्थिक आत्मघाती कदम बताया है
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के युद्धविराम की समय सीमा बढ़ाने की घोषणा के कुछ घंटों बाद, ईरान होर्मुज़ स्ट्रेट पर अपना कंट्रोल बढ़ाने में जुट गया.
ये शांति समझौते की दिशा में आगे बढ़ने में एक प्रमुख रुकावट रहा है.
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की गनबोट्स द्वारा होर्मुज़ स्ट्रेट को पार करने की कोशिश कर रहे जहाज़ों को रोकने की ख़बर है.
बुधवार को तीन कार्गो जहाज़ों पर हमले हुए और आईआरजीसी ने दो को अपने कब्ज़े में ले लिया है.
हालांकि इसमें कोई हताहत या बड़ा नुकसान नहीं बताया गया है, लेकिन यह कदम नए सिरे से हुए युद्धविराम पर और दबाव डालेगा, साथ ही ऐसा लगता है कि मौजूदा गतिरोध, संघर्ष को फिर से भड़कने का ख़तरा पैदा कर सकता है.
अपने ताज़ा बयान में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज़ स्ट्रेट को बंद करने को, ईरान के लिए एक आर्थिक तौर पर आत्मघाती कदम बताया, लेकिन ऐसा लगता है कि तेहरान इससे अमेरिका पर पड़ने वाले राजनीतिक दबाव को और ज़्यादा करने की कोशिश कर रहा है.
अमेरिकी राजदूत बोले- आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में अमेरिका भारत के लोगों के साथ
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इमेज कैप्शन, भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर (फ़ाइल फोटो)
पहलगाम हमले की पहली बरसी पर भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने मारे गए लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की.
भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने एक्स पर लिखा, “पहलगाम में हुए भयावह हमले की पहली बरसी पर हम निर्दोष पीड़ितों को याद करते हैं और उनके परिवारों के साथ शोक व्यक्त करते हैं. अमेरिका आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में भारत के लोगों के साथ खड़ा है.”
इससे पहले भारत में इसराइल के राजदूत रूवेन अज़ार ने भी संवेदना व्यक्त की.
उन्होंने हमले में मारे गए लोगों को याद किया और कहा कि 'इसराइल आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में भारत के साथ खड़ा है.'
नेपाल के गृह मंत्री सुदन गुरुंग ने इस्तीफा दिया, बताई ये वजह
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इमेज कैप्शन, सुदन गुरुंग ने सोशल मीडिया पर इस्तीफ़े की घोषणा की
नेपाल के गृह मंत्री सुदन गुरुंग ने अपनी संपत्ति के स्रोत को लेकर उठे सवालों के बाद नैतिक आधार पर अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.
गुरुंग ने सोशल मीडिया पर इसकी घोषणा करते हुए कहा कि वह खुद पर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए और पद पर रहते हुए किसी भी प्रकार के हितों के टकराव को रोकने के लिए इस्तीफा दे रहे हैं.
बीबीसी नेपाली के मुताबिक, प्रधानमंत्री की प्रेस सलाहकार दीपा दहल ने बताया कि गुरुंग ने बुधवार को प्रधानमंत्री बालेन शाह से मुलाक़ात कर उन्हें अपना इस्तीफा सौंपा.
उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री शाह ने गृह मंत्रालय को फिलहाल अपने पास रखा है.
ईरान ने 'मोसाद के लिए जासूसी करने' के आरोप में एक शख़्स को फांसी दी
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इमेज कैप्शन, ईरान में महेदी फ़रीद नाम के शख़्स को जासूसी के आरोप में फांसी दे दी गई है. मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने फांसी की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई है.
ईरान में एक शख़्स को 'इसराइल के लिए जासूसी' के आरोप में फांसी दी गई.
ईरान की न्यायपालिका के मुताबिक़, 'मेहदी फ़रीद नाम के शख़्स ने देश की संवेदनशील जानकारी इसराइली एजेंसी मोसाद को दी थी.'
ईरानी अदालत के अनुसार, "मेहदी फ़रीद पैसिव डिफ़ेंस कमेटी के मैनेजमेंट विभाग में काम करते थे, जो देश का एक अहम संगठन है. उन्होंने इंटरनेट के ज़रिए इसराइल से संपर्क किया और उनके पद की वजह से मोसाद के एक अधिकारी ने उन्हें चुना."
दूसरी ओर, मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अमेरिका-इसराइल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद फाँसी की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई है.
उनका कहना है कि मुक़दमे की प्रक्रिया और ऐसी सज़ा देना मानवाधिकारों का उल्लंघन है.
बीबीसी फ़ारसी की रिपोर्ट के मुताबिक़, युद्ध शुरू होने के बाद हुई फ़ांसी सिर्फ़ जासूसी के अभियुक्तों तक सीमित नहीं हैं. कुछ लोगों को जनवरी के विरोध प्रदर्शनों से जुड़े होने के मामले में भी फांसी दी गई.
नमस्कार!
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राजनाथ सिंह बोले- 'मध्य पूर्व में शांति के लिए भारत ने कोशिश की, लेकिन...'
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इमेज कैप्शन, भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जर्मनी के दौरे पर हैं
भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि मध्य पूर्व में शांति लाने के लिए भारत ने कोशिशें की हैं.
राजनाथ सिंह जर्मनी के दौरे पर हैं. यहां पर उनसे पूछा गया, 'क्या भारत का मध्य पूर्व संकट में शांति लाने में कोई रोल हो सकता है?'
इस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, "भारत ने कोशिश की है, लेकिन हर चीज़ का एक समय होता है. हो सकता है कि कल ऐसा समय आए जब भारत इसमें अपनी भूमिका निभाए और सफलता भी पाए. इस संभावना को नकारा नहीं जा सकता."
उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री ने दोनों पक्षों से युद्ध ख़त्म करने की अपील की है. हमारे प्रधानमंत्री का कूटनीतिक मामलों में बहुत संतुलित नज़रिया है."
राजनाथ सिंह ने कहा, "भारत जिस तरह आगे बढ़ रहा है, आपने देखा होगा कि होर्मुज़ स्ट्रेट में किसी भी देश का जहाज़ नहीं निकल पा रहा था. अगर किसी ने अपने 7-8 जहाज़ को निकाल लिए, तो वह भारत था. ऐसा नहीं है कि अमेरिका भारत को दुश्मन मानता है या ईरान भारत को दुश्मन मानता है. भारत का बहुत संतुलित नज़रिया है."
गौरतलब है कि फ़िलहाल अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान मध्यस्थता कर रहा है. हालांकि, दूसरे दौर की वार्ता पर अभी संशय बरक़रार है.
पहलगाम हमले को एक साल होने पर इसराइल ने क्या कहा?
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इमेज कैप्शन, इसराइल के विदेश मंत्री गिदोन सार और राजदूत रूवेन अज़ार ने दी प्रतिक्रिया (फ़ाइल फ़ोटो)
पहलगाम हमले के एक साल होने पर इसराइल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने बयान जारी किया है.
उन्होंने कहा कि 'इसराइल आतंकवाद के हर रूप के ख़िलाफ़ अपनी लड़ाई में मज़बूत और अडिग' है.
इसराइल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, "पहलगाम आतंकी हमले को एक साल पूरा होने पर इसराइल की ओर से हम जान गंवाने वालों को याद करते हैं और दुख में उनके परिवारों के साथ खड़े हैं."
उन्होंने आगे लिखा, "इसराइल आतंकवाद के हर रूप के ख़िलाफ़ अपनी लड़ाई में मज़बूत और अडिग है. भारत के साथ मिलकर हम इस ख़तरे का डटकर सामना करने और शांति, सुरक्षा और स्थिरता को आगे बढ़ाने के लिए अपना सहयोग और मज़बूत करेंगे."
इससे पहले भारत में इसराइल के राजदूत रूवेन अज़ार ने भी अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं. उन्होंने हमले में मारे गए लोगों को याद किया और दोहराया कि इसराइल आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में भारत के साथ खड़ा है.
'ईरान ने होर्मुज़ स्ट्रेट में एक कंटेनर जहाज़ पर फ़ायरिंग की', रिपोर्ट में दावा
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इमेज कैप्शन, यह घटना ओमान से 15 नॉटिकल मील उत्तर-पूर्व में हुई बताई जा रही है (सांकेतिक तस्वीर)
यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर (यूकेएमटीओ) के अनुसार ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने होर्मुज़ स्ट्रेट में एक कंटेनर जहाज़ पर फ़ायरिंग की है.
ब्रिटिश रॉयल नेवी की अगुवाई वाले यूकेएमटीओ ने बताया कि यह घटना ओमान से 15 नॉटिकल मील उत्तर-पूर्व में हुई.
रिपोर्ट में कहा गया है कि आईआरजीसी की एक गन बोट जहाज़ के पास आई, लेकिन कोई रेडियो चेतावनी नहीं दी गई.
इसके बाद गन बोट ने जहाज़ पर गोली चलाई, जिससे जहाज़ के कंट्रोल सेंटर को भारी नुकसान पहुंचा.
ईरानी न्यूज़ एजेंसियों ने कहा कि जहाज़ ने ईरानी सेना की चेतावनी को 'नज़रअंदाज़' किया.
आईटी कंपनियों के शेयरों में गिरावट, ये वजह सामने आई
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इमेज कैप्शन, बुधवार को शुरुआती कारोबार में एचसीएल टेक के शेयर क़रीब 10% गिर गए (फ़ाइल फ़ोटो)
भारतीय शेयर बाज़ारों में बुधवार को एचसीएल टेक समेत कई आईटी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई.
बुधवार को शुरुआती कारोबार में एचसीएल टेक के शेयर क़रीब 10% गिर गए. वजह रही कंपनी के जनवरी-मार्च तिमाही के नतीजे. कंपनी ने अगले वित्तीय वर्ष की आय का आउटलुक 1 से 4 फ़ीसद दिया है. कई विश्लेषकों ने ये ग्रोथ 4 फ़ीसद तक होने की उम्मीद जताई थी.
इस कारण निवेशकों ने नेगेटिव रिएक्शन दिया और शेयर में तेज़ गिरावट देखने को मिली.
सुबह के कारोबार में एचसीएल टेक का शेयर 9.64% गिरकर ₹1,302 तक पहुंच गया. इसका असर बाक़ी आईटी कंपनियों पर भी पड़ा और उनके शेयर भी लुढ़क गए.
शुरुआती कारोबार में इंफ़ोसिस का शेयर 2.8%, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज 1.9% और टेक महिंद्रा का शेयर 4.2% गिरा.
ट्रंप ने जिन आठ महिलाओं को रिहा करने की अपील की थी उनके बारे में ईरान क्या बोला, बीबीसी मॉनिटरिंग
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आठ ईरानी महिलाओं को ''ईरान की क़ैद से रिहा'' करने की मांग की थी. अब ईरान की न्यायपालिका ने उन रिपोर्ट्स को ख़ारिज किया है, जिनमें इन्हें जल्द फ़ांसी देने का दावा किया जा रहा था.
ईरान ने ऐसी ख़बरों को ‘दुश्मन मीडिया’ की फैलाई जा रही फ़ेक न्यूज़ क़रार दिया है.
दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप ने एक सोशल मीडिया पोस्ट को शेयर करते हुए ईरानी अधिकारियों से मांग की थी कि इन महिलाओं को जल्द रिहा किया जाए.
इस पोस्ट में इन महिलाओं की तस्वीरों के साथ लिखा गया था, "ईरान इन्हें जल्द सज़ा-ए-मौत देने की तैयारी कर रहा है." साथ ही पोस्ट में मानवाधिकार संगठनों की इस मामले में चुप्पी पर हैरानी जताई गई थी.
ईरान में न्यायपालिका से जुड़े मामले रिपोर्ट करने वाली संस्था मिज़ान न्यूज़ ने कहा, "इन महिलाओं के मामलों की सावधानी से समीक्षा करने पर पता चला कि उनमें से कुछ पहले ही रिहा हो चुकी हैं."
आगे कहा गया, "जबकि बाकी पर ऐसे आरोप हैं, जो अदालत में साबित होने पर भी उन्हें क़ैद होगी, फ़ांसी नहीं. किसी भी महिला को अब तक ऐसी सज़ा नहीं सुनाई गई है, जिससे उन्हें फ़ांसी का ख़तरा हो. ट्रंप एक बार फिर ‘फ़ेक न्यूज़’ के झांसे में आ गए."
पहलगाम हमले का एक साल, पीएम मोदी और गृह मंत्री शाह ने क्या कहा?
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इमेज कैप्शन, पीएम मोदी ने पहलगाम हमले के एक साल पूरा होने पर सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया है (फ़ाइल फ़ोटो)
पहलगाम हमले को आज एक साल हो गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि 'आतंकवादियों के नापाक मंसूबे कभी कामयाब नहीं होंगे.'
पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, "पिछले साल आज ही के दिन पहलगाम में हुए भयानक आतंकी हमले में जान गंवाने वाले निर्दोष लोगों को याद कर रहा हूं. उन्हें कभी भुलाया नहीं जाएगा. एक राष्ट्र के तौर पर, हम दुख और संकल्प में एकजुट हैं."
उन्होंने कहा, "भारत आतंकवाद के किसी भी रूप के आगे कभी नहीं झुकेगा. आतंकवादियों के नापाक मंसूबे कभी कामयाब नहीं होंगे."
गृह मंत्री अमित शाह ने भी पहलगाम हमले के एक साल होने पर एक्स पर पोस्ट किया.
अमित शाह ने लिखा, "आज के दिन हम पिछले साल हुए पहलगाम आतंकी हमले में खोई गई मासूम ज़िंदगियों को गंभीरता से याद करते हैं. अपने लोगों को खोने का दुख और पीड़ा हर भारतीय के दिल में आज भी है."
उन्होंने आगे लिखा, "आतंकवाद इंसानियत का सबसे बड़ा दुश्मन है, जिसके ख़िलाफ़ हमें एकजुट होकर लड़ना और उसे हराना है. भारत आतंकवाद और उसे पनाह देने वालों के ख़िलाफ़ अपनी सख़्त नीति जारी रखेगा."