लाइव, अमेरिका और ईरान के युद्धविराम पर इसराइल की पहली प्रतिक्रिया आई

इसराइल ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्धविराम के फ़ैसले को मान लिया है. लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि लेबनान में युद्धविराम लागू नहीं होगा.

सारांश

लाइव कवरेज

रौनक भैड़ा

  1. अमेरिका और ईरान के युद्धविराम पर इसराइल की पहली प्रतिक्रिया आई, डैनियल डी सिमोन, यरूशलम

    बिन्यामिन नेतन्याहू

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    इमेज कैप्शन, इसराइल ने कहा कि लेबनान में युद्धविराम लागू नहीं होगा (फ़ाइल फ़ोटो)

    इसराइल ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्धविराम के फ़ैसले को मान लिया है. लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि लेबनान में युद्धविराम लागू नहीं होगा.

    इसराइल ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, "हम राष्ट्रपति ट्रंप के उस फ़ैसले का समर्थन करते हैं जिसमें ईरान पर हमले दो हफ़्तों के लिए रोकने की बात कही गई है, बशर्ते ईरान तुरंत होर्मुज़ स्ट्रेट खोले और अमेरिका, इसराइल और अन्य देशों पर हमले बंद करे."

    आगे कहा गया है, "इसराइल अमेरिका की उस कोशिश का समर्थन करता है जिसमें यह सुनिश्चित करना है कि ईरान अब परमाणु हथियार, मिसाइल या आतंक का ख़तरा न बने. न अमेरिका के लिए, न इसराइल के लिए, न ईरान के अरब पड़ोसियों के लिए और न ही दुनिया के लिए."

    "अमेरिका ने इसराइल को बताया है कि वह इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है. आने वाली बातचीत में इन लक्ष्यों को अमेरिका हमसे और हमारे क्षेत्रीय सहयोगियों से साझा करेगा."

    गौरतलब है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने एक्स पोस्ट में बताया था कि 'लेबनान में भी युद्धविराम' लागू होगा. लेकिन इसराइल ने कहा है कि लेबनान में युद्धविराम लागू नहीं होगा.

  2. ईरान और अमेरिका के युद्धविराम पर इसराइल अब तक क्यों है ख़ामोश, डैनियल डी सिमोन, यरूशलम

    बिन्यामिन नेतन्याहू

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    इमेज कैप्शन, यरूशलम में अब भी मिसाइल अलर्ट और धमाकों की आवाज़ें सुनाई दी हैं (फ़ाइल फ़ोटो: बिन्यामिन नेतन्याहू)

    अमेरिका और ईरान ने युद्धविराम का एलान कर दिया है, लेकिन अभी तक इसराइल ने कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है.

    भले डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम का फ़ैसला ले लिया हो, लेकिन यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इसमें इसराइल की सहमति है या नहीं.

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने एक्स पोस्ट में बताया कि 'लेबनान में भी युद्धविराम' लागू होगा.

    जबकि यहां पर इसराइल की सेना मौजूद है, जो कहती रही है कि लेबनान से तब तक नहीं हटेंगे जब तक हिज़्बुल्लाह का ख़तरा ख़त्म नहीं हो जाता.

    इसकी संभावना कम है कि इसराइली पीएम बिन्यामिन नेतन्याहू युद्धविराम को उसी तरह 'जीत' बताएंगे जैसे अमेरिका और ईरान बता रहे हैं.

    28 फ़रवरी को युद्ध का एलान करते हुए उन्होंने कहा था, "इस अभियान का लक्ष्य ईरान के आयतुल्लाह शासन के ख़तरे को ख़त्म करना है और यह अभियान तब तक चलेगा जब तक ज़रूरी होगा."

    हालात अभी ऐसे हैं कि ईरानी सेना अब भी ख़तरा पैदा करने में सक्षम है और शासन पूरी तरह मौजूद है.

    यरूशलम में अब भी मिसाइल अलर्ट और धमाकों की आवाज़ें सुनाई दी हैं. इसराइल डिफ़ेंस फ़ोर्स ने कहा है कि ईरान से कई मिसाइलें दाग़ी गईं.

    अगर युद्ध का अंत उस '10-बिंदु प्रस्ताव' पर होता है जिसका ज़िक्र ट्रंप ने किया, तो यह ईरान की रणनीतिक जीत मानी जाएगी.

    संभव है कि नेतन्याहू की कैबिनेट के चरमपंथी सदस्य किसी भी युद्धविराम या युद्ध के अंत को मानने से इंकार कर दें. ख़ासकर, अगर इसमें लेबनान भी शामिल हो, जिससे चुनावी साल में उनके लिए राजनीतिक चुनौती पैदा हो सकती है.

  3. ईरान ने पाकिस्तान का शुक्रिया अदा करते हुए क्या घोषणा की?

    अब्बास अराग़ची

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    इमेज कैप्शन, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने कहा कि ईरान पर हमले रोके जाते हैं तो हम कार्रवाई बंद कर देंगे

    ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और फ़ील्ड मार्शल को युद्धविराम के प्रयासों के लिए धन्यवाद दिया है.

    अब्बास अराग़ची ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर बयान जारी किया. उन्होंने कहा, "ईरान की ओर से मैं अपने प्यारे भाइयों पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और फ़ील्ड मार्शल मुनीर का युद्ध ख़त्म करने के प्रयासों के लिए धन्यवाद अदा करता हूं."

    अब्बास अराग़ची का बयान

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    इमेज कैप्शन, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने एक्स हैंडल पर जारी किया बयान

    "प्रधानमंत्री शरीफ़ ने भाईचारे की अपील की, अमेरिका ने 15 बिंदुओं वाला बातचीत का प्रस्ताव दिया और राष्ट्रपति (डोनाल्ड ट्रंप) ने ईरान के 10 बिंदुओं वाले प्रस्ताव को बातचीत के आधार के रूप में स्वीकार करने की घोषणा की."

    अब्बास अराग़ची ने एलान करते हुए लिखा, "इन सबको ध्यान में रखते हुए, मैं ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की ओर से यह घोषणा करता हूं कि-अगर ईरान पर हमले रोके जाते हैं, तो हमारी ताक़तवर सेना अपनी रक्षात्मक कार्रवाई बंद कर देगी. दो हफ़्तों की अवधि के लिए होर्मुज़ स्ट्रेट से सुरक्षित आवाजाही ईरानी सेना के साथ तालमेल और तकनीकी सीमाओं को ध्यान में रखते हुए संभव होगी."

    इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने भी युद्धविराम होने पर अमेरिका और ईरान का शुक्रिया अदा किया था. उन्होंने यह भी बताया कि दोनों देशों के प्रतिनिधियों को 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में आमंत्रित किया गया है.

  4. ट्रंप की डेडलाइन ख़त्म होने से ठीक 10 मिनट पहले पाकिस्तान ने किया युद्धविराम का एलान, शरीफ़ ये बोले

    शहबाज़ शरीफ़ और डोनाल्ड ट्रंप

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    इमेज कैप्शन, शहबाज़ शरीफ़ ने एक्स पर पोस्ट करके अमेरिका और ईरान को धन्यवाद दिया

    अमेरिका और ईरान ने युद्धविराम का एलान कर दिया है. उन्होंने बताया है कि इसके लिए पाकिस्तान की ओर से मध्यस्थता हुई थी. अब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने युद्धविराम होने पर अमेरिका और ईरान का शुक्रिया अदा किया है.

    शहबाज़ शरीफ़ ने यह भी बताया है कि 10 अप्रैल को ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधि इस्लामाबाद आमंत्रित किए गए हैं, यहां अंतिम समझौते पर बातचीत होगी.

    डोनाल्ड ट्रंप ने धमकी दी थी कि अगर ईरान अमेरिका की शर्तें नहीं मानता है तो उस पर विनाशकारी हमले होंगे और उसे तबाह कर दिया जाएगा. उन्होंने ईरान को वॉशिंगटन के समयानुसार मंगलवार रात 8 बजे (भारतीय समयानुसार बुधवार सुबह 5.30 बजे) तक की डेडलाइन दी थी.

    इस डेडलाइन के ख़त्म होने से ठीक 10 मिनट पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने एक्स पर लिखा, "मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि ईरान और अमेरिका, अपने सहयोगियों के साथ तुरंत प्रभाव से लेबनान समेत हर जगह युद्धविराम पर सहमत हो गए हैं."

    "मैं इस समझदारी भरे कदम का गर्मजोशी से स्वागत करता हूं और दोनों देशों के नेतृत्व को दिल से धन्यवाद देता हूं. साथ ही मैं उनके प्रतिनिधियों को इस्लामाबाद में शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026 को आमंत्रित करता हूं ताकि सभी विवादों को खत्म करने के लिए अंतिम समझौते पर आगे बातचीत हो सके."

    उन्होंने लिखा, "दोनों पक्षों ने अद्भुत समझदारी और दूरदर्शिता दिखाई है, शांति और स्थिरता को आगे बढ़ाने में सकारात्मक रूप से जुड़े रहे हैं. हम सच्चे दिल से उम्मीद करते हैं कि इस्लामाबाद वार्ता स्थायी शांति हासिल करने में सफल होगी और आने वाले दिनों में और अच्छी खबरें साझा करने की इच्छा रखते हैं."

  5. नमस्कार!

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