छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को हाईकोर्ट ने 23 साल पुराने हत्याकांड में आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई है.
इस मामले में 2007 में अमित जोगी को ट्रायल कोर्ट ने बरी कर दिया था. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस मामले की सुनवाई 1 अप्रैल से शुरू हुई थी, जिसमें सोमवार को सज़ा का एलान किया गया.
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति अरविंद वर्मा की स्पेशल डिविज़नल बेंच ने कहा, "जब सभी अभियुक्तों के ख़िलाफ़ एक जैसे सबूत हों, तो किसी एक को बरी कर देना और बाकी को उन्हीं सबूतों के आधार पर दोषी ठहराना सही नहीं है, जब तक कि उसे छोड़ने का कोई ठोस और अलग कारण साबित न हो."
हाईकोर्ट ने कहा, "जब सभी अभियुक्तों पर एक ही अपराध में शामिल होने का आरोप हो, तो किसी एक अभियुक्त के साथ जानबूझकर अलग व्यवहार नहीं किया जा सकता."
क्या था 23 साल पुराना मामला
दरअसल, साल 2000 में छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने के बाद राज्य में 2003 में पहली बार विधानसभा चुनाव होने वाले थे. उस समय राज्य में कांग्रेस पार्टी की सरकार थी और अजीत जोगी मुख्यमंत्री थे.
इसी दौरान कांग्रेस के दिग्गज नेता विद्याचरण शुक्ल ने शरद पवार की पार्टी एनसीपी से चुनाव लड़ने का एलान किया था, जिससे कांग्रेस के वोट बैंक में बिखराव की आशंका जताई जा रही थी.
इस बीच 4 जून 2003 की रात एनसीपी के प्रदेश उपाध्यक्ष और विद्याचरण शुक्ल के क़रीबी राम अवतार जग्गी की हत्या कर दी गई.
इस मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी समेत 31 लोगों को अभियुक्त बनाया गया, जिसमें कई पुलिस अधिकारी भी शामिल थे. 31 मई 2007 को इस मामले में स्थानीय अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए अमित जोगी को बरी कर दिया था. अन्य 28 लोगों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई थी.
अदालत के फ़ैसले के ख़िलाफ़ राम अवतार जग्गी के बेटे ने पहले हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी. इस दौरान मामले की सीबीआई जांच जारी रही. दूसरी ओर, अमित जोगी चुनाव लड़ कर विधायक भी बने और पिता अजीत जोगी के निधन के बाद, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रमुख भी बन गए.
पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हाईकोर्ट को जल्दी सुनवाई का आदेश दिया, जिसके बाद सोमवार को हाईकोर्ट ने अमित जोगी को आजीवन कारावास का फ़ैसला सुनाया.