बीपीओ कारोबार में नंबर वन नहीं रहा भारत

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क्या आपको पता है कि कभी बीपीओ कारोबार में नंबर वन रहा भारत, आज पहली पायदान पर नहीं है. एक पूर्वी एशियाई देश, फ़िलीपींस, इस कारोबार में भारत से आगे निकल गया है.

आज फ़िलीपींस, दुनिया का नंबर वन बीपीओ कारोबार वाला देश है. यहां दुनिया के तमाम बड़े बैंकों, टेलीकॉम और बीमा कंपनियों के कॉल सेंटर हैं. आज कॉल सेंटर के कारोबार पर ज़ोर दे रहे देशों के लिए फ़िलीपींस एक मिसाल बन गया है.

इसकी वजह है कि यहां के युवाओं ने बड़ी तेज़ी से ख़ुद को इस कारोबार के लिए तैयार किया है. कॉल सेंटर की कामयाबी के लिए ज़रूरी है कि वहां के कर्मचारी, अपने ग्राहकों से उसकी ज़ुबान में, उसके लहजे में बात करें. ताकि, ग्राहक को ये पता न चले कि वो अपने घर से हज़ारों किलोमीटर दूर बैठे किसी इंसान से बात कर रहा है.

किसी और एशियाई देश के मुक़ाबले, फ़िलीपींस में युवा कॉल सेंटर कर्मचारियों ने ये हुनर बड़ी तेज़ी से सीखा है. वहां की बीपीओ कंपनियों के मुलाज़िमों को बोल-चाल के तमाम लहजों की बेहद सख़्त ट्रेनिंग दी जा रही है.

बड़े बैंकों के अमरीकी या ब्रिटिश ग्राहकों की बात समझने, उनके लहजे में बात करने के लिए इन्हें कड़ी मशक़्क़त करनी पड़ रही है. वजह ये कि केवल अमरीका और ब्रिटेन में ही अंग्रेज़ी बोलने के सौ से ज़्यादा लहजे हैं. न्यूयॉर्क का शहरी अलग तरह से बोलता है. वहीं किसी दक्षिण अमरीकी शहर का ग्राहक अलग तरीक़े से बात करता है.

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ऐसे में फ़िलीपींस के कॉल सेंटर में काम करने वाले युवाओं को अंग्रेज़ी बोलने के तीस से चालीस लहजों की ट्रेनिंग दी जा रही है. फ़िलीपींस की सबसे बड़ी बीपीओ कंपनी एसपीआई ग्लोबल में कर्मचारियों को अंग्रेज़ी बोलने के 35 सलीक़े सिखाए जाते हैं. जिसमें ब्रिटिश इंग्लिश से लेकर जमैकन और अमरीकी अंग्रेज़ी बोलने का लहजा शामिल है.

फ़िलीपींस में अंग्रेज़ी पढ़ने-लिखने-समझने वालों की अच्छी ख़ासी तादाद है. वहां प्राइमरी स्कूल से ही अंग्रेज़ी पढ़ाई जाती है. क़रीब सत्तर फ़ीसद फ़िलीपीनी नागरिक अंग्रेज़ी बोलते समझते हैं.

मगर, अंग्रेज़ी पढ़ना लिखना और उसे ख़ास तरह से बोलने में बहुत फ़र्क़ है. एसपीआई ग्लोबल में ट्रेनिंग मैनेजर गैरी विलेना कहते हैं कि अमरीका में ही बीसियों तरीक़े से अंग्रेज़ी बोली जाती है.

मगर, कॉल सेंटर कर्मचारियों को उन ग्राहकों की बात समझने में ज़्यादा दिक़्क़त होती है, जो ख़ुद बाहर से जाकर अमरीका में बसे हैं. जैसे चीनी या भारतीय मूल के लोग. इन लोगों की अंग्रेज़ी समझने में बहुत परेशानी होती है किसी भी बीपीओ कर्मचारी को.

कॉल सेंटर कर्मचारी कैथलीन चैन कहती हैं कि अमरीकियों से ज़्यादा दिक़्क़त उन्हें भारतीयों और चीनी मूल के लोगों से बात करने में होती है. भारतीय मूल के लोगों के लहजे को वो सबसे मुश्किल मानती हैं.

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भारतीयों का अंग्रेज़ी बोलने का लहजा सिर्फ़ फ़िलीपींस के बीपीओ कर्मचारियों के लिए दिक़्क़त तलब नहीं, ब्रिटेन में भी मुसीबत का सबब बन गया है. ब्रिटिश टेलीकॉम ने एलान किया है कि वो जल्द ही भारत में अपने सभी कॉल सेंटर बंद कर देगी.

वजह ये कि वहां के लोगों के बात करने का लहजा, ब्रिटिश टेलीकॉम के ग्राहकों को पसंद नहीं आ रहा. आज ब्रिटिश टेलीकॉम के आधे कॉल सेंटर ब्रिटेन में ही हैं. साल भर के भीतर कंपनी का इरादा अस्सी फ़ीसदी कॉल सेंटर कारोबार, ब्रिटेन में ही लाने का है. ये भारत के कॉल सेंटर्स के लिए ख़तरे की घंटी है.

लोगों के बोलने के अलग-अलग लहजों को समझना, आज बीपीओ बिज़नेस के लिए बहुत ज़रूरी है. गैरी विलेना कहते हैं कि आज बात सिर्फ़ लहजे की नहीं, ग्राहकों से बात करने की क़ाबिलियत की है. हम अलग-अलग इलाक़ों के लोगों से सही तरीक़े से बात कर लें, ये सलीक़ा आना बहुत ज़रूरी है, किसी भी कॉल सेंटर कर्मचारी के लिए.

इसीलिए, आज बीपीओ सेक्टर में ताज़ा-ताज़ा कॉलेज से निकले युवाओं की भारी डिमांड है. एसपीआई ग्लोबल को ही लीजिए. इसके दस छात्रों के बैच में से नौ 25 साल से कम उम्र के हैं. यहां तक कि ट्रेनिंग देने वाला भी महज़ 22 बरस का है.

कंपनी की लैंग्वेज ट्रेनर मारिया कॉन्स्टैनटिनो कहती हैं कि, इन युवाओं के लिए अपने लहजे को किसी ख़ास तरीक़े से अलग करके न्यूट्रल बनाना बहुत ज़रूरी है. इसके लिए हम व्याकरण के साथ-साथ बोलने के तरीक़े बताने पर ज़ोर देते हैं. साथ ही उन्हें ग्राहकों से अच्छे से बात करना भी सिखाया जाता है.

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ट्रेनिंग के ज़रिए युवाओं को कॉल सेंटर के काम के लिए तैयार करने मे फ़िलीपींस को काफ़ी कामयाबी मिली है. इसी वजह से बीपीओ कारोबार के मामले में आज ये भारत से आगे निकल गया है. आज फ़िलीपींस की बीपीओ इंडस्ट्री में क़रीब 11 लाख लोग काम कर रहे हैं. इससे देश को सालाना क़रीब 19 अरब डॉलर की आमदनी हो रही है. जानकार कहते हैं कि अगले दो सालों में फ़िलीपींस को बीपीओ कारोबार से क़रीब 26 अरब डॉलर की आमदनी होने की उम्मीद है.

इसके लिए फ़िलीपींस के बीपीओ कारोबार से जुड़े लोगों को लगातार ख़ुद को बदलते रहना होगा. आज अंग्रेज़ी बोलने के लहज़े सीख रहे हैं तो कल स्पेनिश भी सीखनी होगी.

आईबीएम ने भविष्यवाणी की है कि अगले चार सालों में अमरीका में अंग्रेज़ी से ज़्यादा स्पेनश बोलने वाले लोग होंगे. अब फ़िलीपींस के लोग जिस तरह से ख़ुद को इस कारोबार के लिए तैयार कर रहे है, उसमें स्पेनिश के लिए बदलना ज़्यादा मुश्किल काम नहीं होना चाहिए.

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24 बरस की कॉल सेंटर कर्मचारी शेह क्विडाल्ट कहती हैं कि फ़िलीपीनियों ने जब अंग्रेज़ी इतने अच्छे और इतनी तरह से बोलना सीख लिया, तो स्पेनिश क्या है. आख़िर अंग्रेज़ी भी तो उनकी मातृ भाषा नहीं. किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए फ़िलीपींस के युवा तैयार हैं.

भारत को भी इस चुनौती से निपटने की तैयारी करनी चाहिए.

(अंग्रेज़ी में मूल <link type="page"><caption> लेख यहां</caption><url href="https://bbcnews.me/capital/story/20160317-inside-the-secret-world-of-accent-training" platform="highweb"/></link> पढ़ें, जो <link type="page"><caption> बीबीसी कैपिटल</caption><url href="https://bbcnews.me/capital" platform="highweb"/></link> पर उपलब्ध है.)

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