कनाडाः पहली बार सबसे ज़्यादा एनआरआई जीते

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कनाडा में आम चुनाव के नतीजों से भारत के लिए भी खुशखबरी आई है. ये पहली बार हुआ है कि किसी देश में इतनी बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग सांसद बने हों.
338 सीटों वाली कनाडाई संसद के हाउस ऑफ कॉमंस में कुल 19 सांसद भारतीय मूल के हैं.
इनमें 15 जस्टिन ट्रूडो की अगुवाई वाली लिबरल पार्टी से, तीन कंजरवेटिव पार्टी से और एक वामपंथी दल एनडीपी से हैं.
इससे पहले की संसद में कुल आठ सांसद भारतीय मूल के थे और वो सभी कंज़रवेटिव पार्टी की टिकट पर हाउस ऑफ कॉमंस पहुंचे थे.

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कनाडा में भारतीय मूल के लोगों की संख्या कुल आबादी का करीब 3 फ़ीसदी है लेकिन संसद में उन्होंने पांच फ़ीसदी से ज़्यादा सीटों पर क़ब्ज़ा किया है.
जेएनयू में सेंटर फॉर इंटरनेशनल स्टडीज़ के प्रोफ़ेसर अब्दुल नाफ़े इसका श्रेय बहुसंस्कृति वाद और धर्मनिरपेक्षता को देते हैं.
वो कहते हैं, "भारतीय मूल के लोगों को सिर्फ भारतीय ही नहीं बल्कि अफ़गान, ईरानी, पाकिस्तानी और बांग्लादेशी लोग भी वोट देते हैं. एक झुकाव होता है. उन्हें लगता है कि वो प्रवासियों की समस्या को ठीक ढंग से समझेंगे."
जनसंख्या के अनुपात में अमरीका से ज्यादा भारतीय मूल के लोग कनाडा में हैं. प्रो अब्दुल नाफ़े इसे इस चुनाव की सबसे दिलचस्प बात मानते हैं.

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कनाडा में ब्रिटिश कोलंबिया, वैंकूवर और ओंटारियो में सिक्ख समुदाय के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं. बीते सालों में यहां प्रवासियों की तादाद बढ़ने के साथ ही उनका राजनीतिक कद भी बढ़ा है.
कनाडा में नौ साल के बाद सत्ता परिवर्तन हुआ है.
इससे पहले 2004 में लिबरल पार्टी को जीत हासिल हुई थी तब पार्टी के नेता पॉल मार्टिन प्रधानमंत्री बने थे.
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