पाकिस्तान में एक ही दिन 12 लोगों को फांसी

इमेज स्रोत, AFP
पाकिस्तान में कई ज़ेलों में बंद 12 दोषियों को मंगलवार को फांसी पर लटका दिया गया. इन्हें मौत की सज़ा सुनाई जा चुकी थी.
पाकिस्तान के आंतरिक मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार, मौत की सज़ा पर लगी रोक हटने के बाद एक ही दिन सबसे ज़्यादा लोगों को फांसी देने की यह पहली घटना है.
प्रवक्ता ने कहा, "इनमें केवल चरमपंथी ही नहीं थे, बल्कि कई अन्य अपराधी थे जिन्हें हत्या का दोषी पाया गया था."
पाकिस्तान में लोकतंत्र की बहाली के बाद साल 2008 में मौत की सज़ा पर रोक लगा दी गई थी.
अन्य क़ैदियों को भी फांसी

लेकिन प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ ने 17 दिसम्बर को पेशावर में एक स्कूल पर हुए हमले के बाद मौत की सज़ा पर लगी अनौपचारिक रोक को हटा लिया था.
पेशावर स्कूल पर हुए हमले में 132 बच्चों और नौ स्कूली कर्मचारियों की मौत हो गई थी.
रोक हटने के बाद अब तक लगभग 40 लोगों को फांसी दी जा चुकी है.
समाचार एजेंसी रायटर्स के मुताबिक़, पिछले हफ़्ते इसके तहत उन कैदियों को भी शामिल कर लिया जिन्हें मौत की सज़ा मिल चुकी है और उनकी अपील ख़ारिज़ हो गई है.
पाकिस्तानी जेलों में बंद 8,000 लोग ऐसे हैं जिन्हें मौत की सज़ा सुनाई गई है.
विरोध
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इसकी आलोचना करते हुए कहा है कि पाकिस्तान में मौत की सज़ा के कई मामले भरोसे के लायक नहीं हैं.
उनका दावा है कि कई लोगों को यातनाएँ देकर अपराध क़बूल करने के लिए मज़बूर किया जाता है.
गुरुवार को सरकार दोषी करार दिए गए सफ़कत हुसैन को फांसी देने वाली है. जबकि हुसैन के वकील का कहना है जब एक दशक पहले उन्हें गिरफ़्तार किया गया, तब वो 14 वर्ष के थे.
उन पर अपहरण और एक बच्चे की हत्या का आरोप है. उनके वकील के मुताबिक ये मामला नौ दिन तक दी गई यातनाओं के दौरान उनके कबूलनामे पर आधारित है.
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