स्कॉटलैंड: 'आज़ादी' को 'ना', अब आगे क्या?

स्कॉटलैंड में जनमत संग्रह

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स्कॉटलैंड की जनता ने ऐतिहासिक जनमत संग्रह में आज़ादी के ख़िलाफ़ राय जताई है. यानी स्कॉटलैंड ब्रिटेन का अभिन्न हिस्सा बना रहेगा.

इसके बाद अब सारा ध्यान इस बात पर होगा कि ब्रिटेन सरकार स्कॉटलैंड की संसद को और अधिकार देने का वादा किस तरह पूरा करती है.

ब्रिटेन के तीन सबसे बड़े दल सत्तारूढ़ कंज़र्वेटिव पार्टी, उसकी सहयोगी लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी और विपक्षी लेबर पार्टी स्कॉटलैंड की संसद को ज़्यादा अधिकार देने पर राजी हुई थीं.

विस्तार से पढ़िए स्कॉटलैंड जाएगा किस राह

जनमत संग्रह के प्रचार अभियान के दौरान इन दलों ने लिखित वादा किया था कि अगर बहुमत आज़ादी के ख़िलाफ़ रहा तो भी स्कॉटलैंड को ज़्यादा अधिकार दिए जाएंगे.

ब्राउन की समयसारिणी

गॉर्डन ब्राउन

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पूर्व प्रधानमंत्री और स्कॉटलैंड के सांसद गॉर्डन ब्राउन ने बदलावों के लिए एक समयसारणी बनाई थी, जिसे ब्रिटेन की सभी पार्टियों ने अपना समर्थन दिया था.

जैसे ही जनमत संग्रह का नतीजा स्पष्ट हुआ, प्रधानमंत्री डेविड केमरन ने स्कॉटलैंड को टैक्स, खर्चों और कल्याणकारी योजनाओं के ज़्यादा अधिकार देने की प्रक्रिया की निगरानी के लिए बीबीसी के पूर्व गवर्नर केविन के लॉर्ड स्मिथ की नियुक्ति कर दी.

केमरन ने कहा कि ब्राउन की समयसीमा के अनुसार विधेयक का प्रारूप अगले साल जनवरी तक तैयार हो जाएगा.

कमांड पेपर

ब्राउन के प्रस्ताव के अनुसार अक्टूबर तक ब्रितानी सरकार सभी प्रस्तावों को शामिल करते हुए एक 'कमांड पेपर' प्रकाशित करेगी.

स्कॉटलैंड में जनमत संग्रह

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25 जनवरी 2015 तक नए 'स्कॉटलैंड क़ानून' का प्रारूप प्रकाशित कर दिया जाएगा.

हालाँकि ब्रिटेन में अगले आम चुनाव मई 2015 में होने हैं, इसलिए यह विधेयक नई संसद से पहले पारित नहीं हो सकेगा.

दलों में मतभेद

स्कॉटलैंड की संसद को अभी तक बार्नेट फॉर्मूला के तहत धन मिलता है. इस फॉर्मूले के तहत स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड को विकास योजनाओं का खर्च वहां की आबादी के हिसाब से मिलता है.

स्कॉटलैंड में जनमत संग्रह

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तीनों प्रमुख दल इस फॉर्मूले को किसी न किसी रूप में कायम रखना चाहते हैं.

जबकि इस साल के शुरू में दिए इन दलों के प्रस्ताव में स्कॉटलैंड की संसद को आयकर से और अधिक कर जुटाने का अधिकार देने का वादा किया गया है. बदलाव किस हद तक होने चाहिए, इसे लेकर दलों के बीच एक राय नहीं है.

बातचीत

ब्रिटेन के राजनीतिक दलों को अपने मतभेद दूर करने होंगे और एक प्रस्ताव लाना होगा. लेकिन इस प्रक्रिया में औरों को भी शामिल करना होगा.

स्कॉटलैंड की संसद का गठन 1999 में हुआ था और इसके बाद से ही संसद को ज़्यादा अधिकार देने की मांग उठती रही है.

तो स्कॉटिश नेशनल पार्टी (एसएनपी) अब क्या करेगी?

स्कॉटलैंड में जनमत संग्रह

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अब सारी नज़रें एसएनपी के नवंबर में पर्थ में होने वाले सम्मेलन पर टिकी होंगी.

एलेक्स सेलमंड ने हालाँकि स्कॉटलैंड सरकार के प्रमुख (फर्स्ट मिनिस्टर) का कामकाज 2016 तक संभालने का वादा किया है, लेकिन विपक्षी राजनेता उन्हें निशाने पर लेते रहे हैं.

स्कॉटलैंड को अधिक अधिकार देने के बाद वेल्स और उत्तरी आयरलैंड में भी ऐसी ही मांगें ज़ोर पकड़ सकती हैं.

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