सीरिया में 'सबसे भयावह नरसंहार' का मंज़र

सीरिया में विपक्षी कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने 200 से ज्यादा लोगों की हत्या से संबंधित एक दस्तावेज तैयार किया है. इन दो सौ लोगों में महिला, पुरुष और बच्चे शामिल हैं.
विपक्षी कार्यकर्ता इसे युद्व का सबसे भयावह नरसंहार में एक बता रहे हैं.
इस महीने की शुरुवात में सरकार ने कहा था कि उसने अल-बायदा और बनियास के तीन पड़ोसी ज़िलों में चलाए गए अभियान में 'आतंकवादी लड़ाकूओं' को मारा है.
लेकिन वीडियो फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों द्वारा दिखाए गए ताज़ा सबूत इन दावों का समर्थन करते हैं कि ये इलाका इस युद्द में हुए सबसे भयानक अत्याचार का साक्षी है.
काले कपड़े में लिपटी ओम आबिद (असली पहचान छिपानी चाहती हैं) कहती है, ''हमने जो सुना और जो देखा, वो चाहे मैं कैसे भी कहूं, लेकिन फिर भी असलियत पेश नहीं कर सकेगा .''
आबिद अब बदले से डरती हैं.
'खून बिखरा हुआ था'
मई की शुरुआत में अल-बायदा में जो कुछ घटा उसे याद करके दो बच्चों की एक मां रो पड़ती है.
वे कहती हैं, ''आप ज़मीन पर चल ही नहीं सकते थे क्योंकि जहां देखों वहां शव बिखरे हुए थे, या तो वो जले हुए थे या फिर उनकी हत्या कर दी गई थी. हर तरफ खून बिखरा हुआ था.''
2 मई को सरकारी सेना और मिलिशिया ने अल-बायदा में प्रवेश किया और उसके अगले दिन पड़ोसी बनियास पर हमला कर दिया.

सरकारी सेना ने इस अभियान को 'सशस्त्र आतंकवादियों के खिलाफ हमला' बताया.
सरकारी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार इस हमले में 40 विपक्षी लड़ाकू मारे गए. लेकिन सीरियाई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और प्रत्यक्षदर्शियों का दावा था कि इस हमले में 200 से ज्यादा लोग मारे गए और सैकड़ों लापता हो गए.
इन लोगों ने इसे आम नागरिको के खिलाफ किया गया 'बर्बरपूर्ण सांप्रदायिक हमला' बताया.
वीडियो फुटेज और तस्वीरों में अधजली लाशें, लोगों के खून से सने शरीर और महिलाओं और बच्चों के शरीर पर गहरी चोट के निशान देखे जा सकते थे.
सैन्य हमला
स्वतंत्र तौर पर इन तस्वीरों की पुष्टि करना असंभव है लेकिन बीबीसी ने जिन चार महिलाओं के साथ साक्षात्कार किया, उनकी बातों से ये प्रतीत होता है कि वो वहां मौजूद थी.
ये महिलाएं बताती है कि ये इलाका एक भयानक नरसंहार का गवाह था.
इन सभी का कहना था कि ये 2 मई की सुबह गांव पर किया गया सैन्य हमला था.
हालांकि ये हमला क्यों किया गया उसे लेकर मतभेद है लेकिन दोनों पक्ष इस बात पर सहमत है कि उस दिन विद्रोही लड़ाकों ने पहले सरकारी सेना पर हमला किया था, हालांकि वहां विद्रोह की शुरुआत के बाद ही इलाके में तनाव जारी है.
अर्धसैनिक बल नेशनल डिफेंस फोर्स का समर्थन लेकर परिवारों ने भी सेना का रुप ले लिया और गांव में प्रवेश कर गए.
यहां रहने वाले लोगों का कहना था उन्होंने आगजनी, लूटपाट और हत्या के इरादे वाले इस हमले का साहसिक मुकाबला किया.
ओम आबिद का कहना था, ''उन्होंने हमें अपमानित करना शुरु किया, हमें अपशब्द कहे, घर से पुरुषों को निकालने को कहा नहीं तो मार डालने की धमकी दी.''
वीडियो फुटेज लीक

ये माना जा रहा है कि ये वीडियो एक सरकारी सैनिक ने लिया था जो लीक हो गया है.
इस वीडियो से इस बात का अंदाज़ा मिलता है इसके बाद क्या हुआ होगा.
वीडियो में सैनिकों को अल-बायदा स्कावयर पर तैनात देखा जा सकता था, कारो और घरों में आग लगी हुई थी, सड़कों पर खून बिखरा हुआ था.
इसके बाद कैमरा एक औंधे मुंह पड़े इंसान पर जाकर रुकता है जो मरा हुआ है.
उसके सिर के पीछे बड़ा सा लाल रंग का निशान बना हुआ है. इसके बाद ये फिल्म एक दुकान पर जाकर खत्म हो जाती है.
ज़मीन पर शव एक करीने से कतार में रखे हुए हैं.
ओम आबिद कहती हैं, ''अचानक हमे आग लगने की गंध आई, गांव से लोगों की आवाज़ सुनाई देने लगी.''
मैं सड़क पर भागी और देखा कि 20 से 30 लोगों के शव जमीन पर पड़े हुए थे और उन्हें गोली मारी गई थी.
इसके बाद मैने अपने पति और ससुर का शव देखा, उनके सिर पर गोली लगी थी.
शांति वार्ता
कई तस्वीरें और वीडियो बनियास में हुई इस घटना के बाद की कहानी बयान करते हैं जिसमें पुरुष, महिलाएं और बच्चों का ढ़ेर देखा जा सकता है, जिनके चेहरे, शरीर बुरी तरह से घायल हैं.
ऐसा देखकर लगता है जैसे पूरा परिवार एक साथ ही मारा गया हो.
जिन महिलाओं से भी बीबीसी की बातचीत हुई सभी ने इसी मंज़र को बयान किया.
इस युद्द का ये पहला 'नरसंहार' नहीं था और न ही आखिरी. अंतरराष्ट्रीय समुदाय में कुछ लोग अब भी इसके राजनयिक समाधान में विश्वास दिखाते है और अगले महीने होने वाली शांति वार्ता को बढ़ावा देने पर जोर डाल रहे हैं.
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