पाकिस्तान: चुनावी अखाड़े में खिलाड़ियों का दमखम

पाकिस्तान में खिलाड़ियों का चुनावी मैदान में उतरना कोई नई बात नहीं है. इस बार भी कोई खिलाड़ी बरसों बाद चुनावी मैदान में उतरा है तो कई राजनीति को अलविदा कह रहा है.
इनमें सबसे अहम इमरान खान हैं जो 15 पहले राजनीति में आए थे. वो बेहद लोकप्रिय और सत्ता के दावेदारों में बताए जाते हैं. उनके अलावा कुछ और पूर्व खिलाड़ी भी मैदान में हैं
पाकिस्तान के पूर्व हॉकी कप्तान अख्तर रसूल 16 वर्षों बाद फिर चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि उनके साथी खिलाड़ी कासिम जिया 16 वर्षों के बाद पहली बार चुनावों में हिस्सा नहीं ले रहे हैं.
पूर्व क्रिकेट सरफराज नवाज और आमिर सुहैल के चुनाव न लड़ने के फैसले के बाद इमरान अकेले पूर्व क्रिकेटर हैं जो अपनी पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ के उम्मीदवार के तौर आम चुनाव में उतरे हैं.
राजनीति के 'खिलाड़ी'
चौधरी अख्तर रसूल लाहौर से पंजाब की प्रांतीय असेंबली की सीट के लिए चुनाव लड़ रहे हैं. पीएमएल(एन) से अपने राजनीतिक सफर का आगाज करने वाले रसूल 16 वर्षों के बाद चुनावी मैदान में उतरे हैं.
वो तीन बार प्रांतीय विधानसभा में पहुंचे हैं और पंजाब सरकार में मंत्री भी रहे.
दूसरी तरफ मशहूर हॉकी खिलाड़ी कासिम जिया 1993 से लगातार पीपल्स पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे, लेकिन उनका कहना है कि इस बार उनका मूड चुनाव लड़ने का नहीं है.
वो दो बार जीत कर पंजाब असेंबली में पहुंचे हैं और एक बार विपक्ष के नेता भी रहे हैं. साथ ही वो पंजाब में पीपल्स पार्टी के अध्यक्ष भी रहे हैं.
उधर क्रिकेटर सरफराज अहमद ने 25 वर्षों के बाद दोबारा चुनावी राजनीति का रुख किया था और उन्होंने 11 मई को होने वाले चुनावों के लिए एमक्यूएम की तरफ से उस सीट से नामांकन भी दाखिल किया जहां से इमरान खान चुनाव लड़ रहे हैं.
लेकिन बाद में उन्होंने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली जिससे उनके मुताबिक उनकी पार्टी बहुत मायूस है, लेकिन उन्होंने अपने फैसले की वजह खराब सेहत को बताया.
वहीं इमरान खान पर इस बार सबकी नजरें लगी हैं. वो चार सीटों से संसदीय चुनाव लड़ रहे हैं. उन्होंने पिछली बार 2002 में चुनावों में हिस्सा लिया था और वो अपने इलाके मियांवाली से चुनाव जीत कर संसद पहुंचे थे.
पाकिस्तान की राष्ट्रीय टीम में बाएं हाथ के पूर्व सलामी बल्लेबाज आमिर सुहैल पिछले साल पाकिस्तान मुस्लिम लीग (एन) में शामिल हुए थे. लेकिन उन्होंने साफ किया कि उनका चुनावों में हिस्सा लेने का कोई इरादा नहीं है.
खिलाड़ियों को समर्थन

वरिष्ठ खेल पत्रकार जाहिद मकसूद कहते हैं कि खिलाड़ी राष्ट्रीय हीरो होते हैं. इसलिए जब वो चुनाव के मैदान में उतरते हैं तो उनके साथ लोगों का समर्थन होता है और उनका उत्साह बढ़ाते हैं.
वो कहते हैं कि अन्य खिलाड़ी भले ही खुद को राजनीति से दूर रखते हों लेकिन अगर उनके साथी चुनाव मैदान में उतरते हैं तो वो उनका प्रचार करने नहीं कतराते.
पाकिस्तानी क्रिकेटर शाहिद अफरीदी ने पिछले दिनों लाहौर में पीएनएल (एन) के अध्यक्ष नवाज शरीफ की रैली में दिखाई दिए थे, तो अब पता चला है कि वो इमरान खान के चुनाव प्रचार में भी हिस्सा लेंगे.
पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान अब्दुल हफीज कारदार राजनीति में कदम रखने वाले पहले क्रिकेटर थे. 1970 में उन्होंने पाकिस्तान पीपल्स पार्टी की तरफ से पंजाब में प्रांतीय असेंबली का चुनाव लड़ा था. जीतने के बाद वो प्रांतीय मंत्री भी बने.
































