कोरोना वायरस से पूरे इटली में मातम का माहौल
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कोरोना वायरस से चीन के बाद इटली सबसे ज़्यादा प्रभावित है. इटली का एक इलाक़ा ऐसा भी है, जहां हालात चीन के वुहान जैसे ही हो गए हैं. इस इलाक़े का नाम है 'लोंबार्डी'.
ये इलाक़ा यूरोप में इस महामारी का केंद्र बना हुआ है. लोंबार्डी में क़रीब एक करोड़ लोग रहते हैं. हालांकि यहां की कुल आबादी में इटली के मूल निवासी तकरीबन 15% हैं.
मिलान, लोंबार्डी क्षेत्र का प्रमुख शहर है. इसे इटली की वित्तीय राजधानी कहा जाता है. लोंबार्डी क्षेत्र के गवर्नर एटिलिओ फोनताना ने कहा, "इटली की वित्तीय राजधानी मिलान के आस-पास के इलाक़ों में स्थिति तेज़ी से ख़राब होती जा रही है."
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हर 100 में से 60 मामले लोंबार्डी में
पूरे इटली में अब तक कोरोना के 27,980 मामले सामने आए हैं और 2,158 लोगों की मौत हो चुकी है. बीते रविवार को इटली में एक दिन में रिकॉर्ड 368 मौते हुईं.
चौंकाने वाली बात ये है कि इटली में कोरोना की वजह से जितने लोगों की जान गई है उनमें से 67 प्रतिशत लोगों की मौत उत्तरी लोंबार्डी इलाक़े में हुई हैं. इटली के हर 100 मामलों में से 60 मामले लोंबार्डी इलाक़े से सामने आ रहे हैं.
पिछले तीन हफ़्तों में लोंबार्डी में 1200 से ज़्यादा मौते हुई हैं. बाक़ी के पूरे यूरोप में मिलाकर इतनी मौतें नहीं हुई हैं, जितनी यहां हो गई हैं.
उत्तरी लोंबार्डी इलाक़े में हालात ऐसे हो गए हैं कि अस्पतालों में बेड और बुनियादी सुविधाओं की कमी हो गई है. लोगों का इलाज अस्पताल के कॉरिडोर में किया जा रहा है.
लोंबार्डी के रिजनल गवर्नर ने निराशा जताते हुए कहा, "लोगों का इलाज करना मुश्किल है. हमारे पास इंटेंसिव केयर बेड ख़त्म होने वाले हैं. जैसे ही विदेश से रेस्पिरेटर्स लाए जाएंगे, हम इस मुसीबत का मुक़ाबला करने के लिए तैयार हो जाएंगे."
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'ऐम्बुलेंस की कमी'
वैसे तो लोंबार्डी के हेल्थ केयर सिस्टम को विश्व-स्तर का माना जाता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन लोंबार्डी की स्वास्थ्य व्यवस्था और बेहतरीन मेडिकल उपकरण की कई बार तारीफ़ कर चुका है.
लेकिन कोरोना ने वहां की स्वास्थ्य व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया है.
लोंबार्डी के वेलफेयर काउंसलर गिउलिओ ने पत्रकारों से शनिवार को बातचीत में कहा, "मिलान के आसपास के इलाक़ों में अब कोई एम्बुलेंस नहीं बची है."
इटली के प्रधानमंत्री ने रविवार को कहा कि उनकी सरकार उत्तरी इलाक़े की स्थिति पर सबसे ज़्यादा ध्यान दे रही है.
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इटली के मेडिकल चीफ़ की मौत
इटली के उत्तरी प्रांत वरेस में मेडिकल असोसिएशन के प्रमुख रॉबर्टो स्टेला की मौत कोरोना वायरस की वजह से हो गई. उनकी उम्र 67 साल थी. वरेसा, लोंबार्डी इलाक़े में पड़ता है.
इटली के स्वास्थ्य विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में मौत के आँकड़े बढ़ेंगे. इस बीच पूरे देश में कोरोना को नियंत्रित करने के लिए कुछ क़दम उठाए गए हैं. उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दो हफ़्तों में इन क़दमों से फ़ायदा मिलेगा.
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इटली की सरकार ने कुछ बड़े क़दम उठाए हैं. ये सारे क़दम तीन अप्रैल तक लागू रहेंगे. इटली में कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए पूरे देश में लॉकडाउन घोषित कर दिया गया है. इटली के लोग एक तरह से घरों में क़ैद हैं.
हाल में वहां का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें लोग अपनी-अपनी बालकनियों में गाना गा रहे हैं ताकि लोगों का हौसला कम न हो.
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इटली के प्रधानमंत्री के मुताबिक़ कम से कम 1.6 करोड़ लोगों को अलग-थलग रखा गया है और उन पर कई तरह की पाबंदिया लगाई गई हैं. जिन इलाक़ों में लॉकडाउन किया गया है उनमें लोंबार्डी के अलावा उत्तर के अन्य 14 प्रांत शामिल हैं.
इन इलाक़ों में स्कूल, जिम, म्यूज़ियम, नाइट क्लब, सिनेमा और स्काई रिसॉर्ट समेत अन्य जगहें बंद कर दी गई हैं.
नए प्रतिबंधों के तहत लोग ना लोंबार्डी के अंदर जा सकेंगे और ना बाहर आ सकेंगे. हालांकि आपात स्थिति में लोगों को छूट मिल सकती है.
लोगों से ज़्यादा से ज़्यादा घरों पर रहने के लिए कहा गया है और नियम तोड़ने वालों को तीन महीने की जेल हो सकती है.
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इटली में शादियों और अंतिम संस्कार के कार्यक्रमों को भी स्थगित कर दिया गया है.
सरकार की तरफ़ से ज़्यादा सख्त क़दम उठाने का नतीजा ये है कि एक चौथाई आबादी घरों में क़ैद है और अर्थव्यवस्था की हालत धीरे-धीरे ख़राब होती जा रही है.
उत्तरी हिस्से पर इसका ज़्यादा असर इसलिए भी पड़ा है क्योंकि ये इलाक़े देश की अर्थव्यवस्था को चलाता हैं.
देश के प्रधानमंत्री ने आधी रात को घोषणा की, "हमारे लिए अपने नागरिकों की सेहत ज़्यादा ज़रूरी है. हम समझते हैं कि इन प्रतिबंधों की वजह से लोगों का बहुत कुछ दांव पर लगेगा. किसी का ज़्यादा तो किसी का कम."
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प्रधानमंत्री ने कहा, "जब तक काम से जुड़ा कोई बहुत ज़रूरी कारण या आपात स्थिति या स्वास्थ्य कारण ना हो, तब तक इन इलाक़ों में और यहां से कोई मूवमेंट नहीं होगा."
"हम एक आपातस्थिति में हैं. ये एक राष्ट्रीय आपातकाल है. हमें वायरस को फैलने से रोकना होगा और अस्पतालों को भरने से बचाना होगा."
रोम से बीबीसी संवाददाता मार्क लोवेन कहते हैं कि क्या इटली की सरकार ने ये सारे क़दम उठाने में देरी कर दी. माना जा रहा है कि इटली में वायरस का पता चलने के कई हफ़्तों पहले ही वहां वायरस मौजूद था. अब इटली के सभी 22 क्षेत्रों में कोरोना के मामले पाए जा रहे हैं.
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