श्रीलंका में संसद भंग करना असंवैधानिक क़रार

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श्रीलंका की सुप्रीम कोर्ट ने संसद भंग करने के राष्ट्रपति के फ़ैसले को असंवैधानिक क़रार दिया है.
राष्ट्रपति मैत्रीपाल सिरिसेना ने अक्तूबर के अंत में प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे को बर्ख़ास्त कर उनकी जगह महिंदा राजपक्षे को प्रधानमंत्री बना दिया था.
उनके फ़ैसले का विरोध शुरू हुआ जिसके बाद उन्होंने संसद भंग कर दी.
सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद रनिल विक्रमसिंघे फिर से प्रधानमंत्री बन सकते हैं.

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संसद ने किया विक्रमसिंघे का समर्थन
संसद पहले ही राजपक्षे के विरोध में दो अविश्वास प्रस्ताव पास कर चुकी है. सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति के संसद भंग करने के आदेश पर अस्थायी रोक लगा दी थी जिसके बाद संसद की बैठकें बुलाई गईं.
बुधवार को संसद ने रनिल विक्रमसिंघे को प्रधानमंत्री मानते हुए उनके समर्थन में एक विश्वास मत भी पारित किया.
संसद में विक्रमसिंघे की पार्टी और उनकी सहयोगी पार्टियों का बहुमत है.

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राजनीतिक संकट जारी
श्रीलंका में राजनीतिक संकट 26 अक्तूबर को शुरू हुआ जब राष्ट्रपति सिरिसेना ने सबको चौंकाते हुए प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे को बर्ख़ास्त कर दिया.
उसके बाद से श्रीलंका में सरकार ठप्प है.
मगर पिछले सप्ताह एक दूसरी अदालत ने 122 सांसदों की याचिका पर सुनवाई करते हुए राजपक्षे के प्रधानमंत्री बनने पर रोक लगा दी.
उसके बाद अब सुप्रीम कोर्ट ने एक अन्य मामले में फ़ैसला सुनाते हुए राष्ट्रपति के संसद भंग करने को असंवैधानिक क़रार दिया है.
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