कैंसर के बदले लगभग 29 करोड़ डॉलर देगी मोन्सेंटो

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अमरीका के सैन फ्रांसिस्को में एक माली ने एक बड़ी कंपनी के ख़िलाफ लगभग 29 करोड़ डॉलर का मुकदमा जीत लिया है.

डिवेन जॉनसन की ज़िंदगी में जीत की इस खुशी से पहले कैंसर आया जो उन्हें माली की नौकरी के दौरान हुआ.

कैंसर का पहला लक्षण दिखा लाल चकते के रूप में जो उनके लगभग 80 फ़ीसद शरीर में फैल गए थे. जॉनसन तब 42 साल के थे.

साल 2012 में बेनिसिया के स्कूलों में माली का काम करने के दौरान उन्होंने पौधों में साल भर खरपतवार नाशक दवा लगाई. ये दवा थी- राउंडअप एंड रेंजर प्रो हर्बिसाइड जिसे मोन्सेंटो कंपनी बनाती है.

साल 2014 में पता चला कि उन्हें हॉजकिन लिम्फ़ोमा कैंसर है. कंपनी मोन्सेंटो के ख़िलाफ़ मुक़दमे के लिए उन्होंने साल 2015 में तैयारी शुरू की.

शोध का हवाला

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जॉनसन का दावा इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर के शोध पर आधारित था जिसमें राउंडअप हर्बिसाइड को कैंसर का कारण बताया गया है. इस हर्बिसाइड में ग्लाइफोसेट होता है जो कैंसर पैदा कर सकता है. ये एजेंसी विश्व स्वास्थ्य संगठन से संबद्ध है.

लेकिन अमरीका की पर्यावरण संरक्षण एजेंसी ने सितंबर 2017 में अपनी रिपोर्ट में कहा कि इस कैमिकल से कैंसर नहीं होता है.

इसके बाद 4 हफ़्ते तक चले ट्रायल में ज्यूरी सदस्यों ने ग्लाइफोसेट के बारे में डॉक्टरों और शोधकर्ताओं के बयान सुने.

जॉनसन की पत्नी ने भी कोर्ट में कहा था कि पति के इलाज के खर्चे के लिए उन्हें 14 घंटे काम करना पड़ता है.

अदालत का फ़ैसला

कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया कि मोन्सेंटो जॉनसन को 3 करोड़ 90 लाख डॉलर का मुआवज़ा दे और और 25 करोड़ डॉलर का हर्जाना भी भरे.

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ज्यूरी ने अपने फैसले में कहा कि मोन्सेंटो ने जॉनसन और दूसरे उपभोक्ताओं को इस हर्बिसाइड के कैंसर रिस्क के बारे में चेतावनी नहीं दी.

कंपनी ने कहा है कि वो इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील करेगी.

मोन्सेंटो ने अपने बयान में कहा, "800 से ज़्यादा शोध और रिपोर्ट बताती हैं कि ग्लाइफोसेट से कैंसर नहीं होता है और जॉनसन को भी इससे कैंसर नहीं हुआ है."

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