हिजबुल कमांडर बुरहान वानी की मौत

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भारत प्रशासित कश्मीर के अनंतनाग ज़िले में सुरक्षाबल और चरमपंथियों के बीच चली लंबी मुठभेड़ में हिजबुल मुजाहिद्दीन के एक स्थानीय कमांडर बुरहान वानी की मौत हो गई है.
कश्मीर में 24 साल के दौरान ये हिजबुल का पहला कमांडर था जिसने अपनी और अपने साथियों की हथियार लिए हुए तस्वीरें सोशल मीडिया पर लगाई थी.
पिछले हफ्ते ही उन्होंने एक वीडियो भी जारी किया था जिसमें उन्होंने कहा था कि अमरनाथ यात्रियों पर कोई हमला नहीं किया जाएगा.

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पिछले साल जिस समूह की तस्वीरें बुरहान समेत सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी उसमें से कई चरमपंथी अलग अलग मुठभेड़ों में मारे गए हैं.
इसके बाद बुरहान को खोजने के लिए सेना, सुरक्षाबलों और पुलिस का एक संयुक्त अभियान दक्षिणी कश्मीर में चलाया गया था.
कश्मीर के डीजी राजेंद्र का कहना है बुरहान की मौत सुरक्षाबलों के लिए बड़ी कामयाबी है और ये हिजबुल के लिए बड़ा धक्का है.
अलगाववादियों ने वानी की मौत के बाद शनिवार को बंद की कॉल दी है.

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राज्य में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने सूबे के दक्षिणी, उत्तरी और मध्यवर्ती क्षेत्र के कुछ इलाकों में कर्फ्यू लगा दी है.
एहतियात के तौर पर सरकार ने इंटरनेट सेवाएं स्थगित कर दी हैं और अंतर ज़िला ट्रेन सेवा भी निलंबित कर दी गई है.
यूनिवर्सिटी परीक्षाओं को भी फिलहाल टाल दिया गया है.

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जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट किया है, "बुरहान वानी पहला शख्स नहीं था जिसने बंदूक उठाई थी और वो आख़िरी भी नहीं होगा. इसीलिए हम कहते हैं कश्मीर की समस्या एक राजनीतिक समस्या है और इसका हल राजनीतिक तरीक़े से ही होना चाहिए."
उन्होंने ये भी लिखा है कि, "जब मैं मुख्यमंत्री था, बुरहान की सोशल मीडिया गतिविधियों से मुझे याद नहीं आता कि किसी चरमपंथी घटना से उसका नाम जुड़ा था. लेकिन बाद के बारे में मैं पक्के तौर पर नहीं कह सकता."
इससे पहले भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर में 25 जून को पंपोर में हुए हमले में सीआरपीएफ के आठ जवान मारे गए थे और करीब 28 घायल हुए थे
इस घटना के बाद गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने राज्य का दौरा किया था और कहा था चरपंथी ऐसी घटना को अंजाम देने के बाद जंगलों में छिप जाते हैं.
अपने दौरे के दौरान राजनाथ सिंह ने चरमपंथियों से निपटने के लिए नीति बनाने की भी बात कही थी.
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