अपना दल के लिए भी अपनी नहीं अनुप्रिया

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जब से केंद्रीय मंत्रिमंडल में विस्तार की अटकलें लगनी शुरू हुईं, तभी से अनुप्रिया पटेल को मंत्री बनाए जाने की चर्चा भी शुरू हो गई थीं और ऐसा हुआ भी.

लेकिन अनुप्रिया के मंत्री बनते ही उनकी पार्टी 'अपना दल' ने भारतीय जनता पार्टी से सख़्त आपत्ति जताई है.

पार्टी के दूसरे सांसद हरिवंश सिंह ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि अनुप्रिया को मंत्री बनाने के बारे में भाजपा ने अपना दल से न तो कोई बात की और न ही पार्टी को कोई सूचना दी गई.

हरिवंश सिंह का कहना था, "भाजपा ने अपना दल के साथ धोखा किया है. अनुप्रिया पटेल को तो एक साल पहले ही अपना दल से निकाला जा चुका है और वो अब पार्टी में नहीं हैं. ऐसे में अपना दल कोटे से वो कैसे मंत्री हो सकती हैं."

हरिवंश उत्तर प्रदेश की प्रतापगढ़ सीट से अपना दल के सांसद हैं. उन्होंने यह भी बताया कि पार्टी इस बारे में सात जुलाई को बैठक कर रही है और इसकी शिकायत लोकसभा अध्यक्ष से भी की जाएगी.

अपना दल एनडीए का हिस्सा है और 2014 के लोकसभा चुनाव में वो इस गठबंधन में शामिल हुआ था. लेकिन चुनाव के बाद से ही पार्टी या यों कहें कि परिवार में आंतरिक कलह शुरू हो गई और आख़िरकार अनुप्रिया पटेल की मां और अपना दल की अध्यक्ष कृष्णा पटेल ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया.

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दिल्ली के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से पढ़ीं अनुप्रिया पटेल उस वक़्त राजनीति में आईं जब अपना दल के संस्थापक और उनके पिता सोनेलाल पटेल की अचानक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई.

लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार काशी प्रसाद यादव बताते हैं, “अनुप्रिया की शादी हुए अभी कुछ दिन ही हुए थे लेकिन उन्होंने पार्टी और अपनी माँ कृष्णा पटेल का बख़ूबी साथ दिया और पार्टी को इस मुक़ाम तक पहुंचाया.”

काशी प्रसाद यादव कहते हैं कि अब चूंकि पार्टी लगभग दो खेमों में बँट गई है, ऐसे में भाजपा का अनुप्रिया पर दाँव लगाना कितना सही है, इसका फ़ैसला तो विधानसभा चुनाव के बाद ही हो सकेगा.

इस बीच, अपना दल के भाजपा में विलय की ख़बरें भी आ रही थीं लेकिन अपना दल ने इससे साफ़ इनकार किया है.

वहीं जानकारों का कहना है कि भाजपा शायद अनुप्रिया पटेल को ही अपना दल समझती है इसीलिए वो पार्टी के अन्य नेताओं को विश्वास में नहीं लेती.

लेकिन देखने वाली बात ये होगी कि जिस वजह से भाजपा अनुप्रिया पटेल को इतनी तवज्जो दे रही है, क्या सिर्फ अनुप्रिया पटेल अपने समुदाय के मतदाताओं को आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा की ओर लाने में कामयाबी हो पाएंगी.

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