'नेताजी बताकर जापानी को जलाया गया था'

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नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बारे में सार्वजनिक की गई डिजिटल फ़ाइलों में अभी तक कोई ऐसी सूचना नहीं मिली है जो नेताजी की मौत के बारे में हमारी सोच को बदल सके.

यह कहना है नेताजी पर शोध करने वाले अनुज धर का. उनसे बात की बीबीसी संवाददाता निखिल रंजन ने. पढ़ें उनका इस बारे में क्या कहना है -

बहुत सारी फ़ाइलें हैं, जिनमें जस्टिस मुखर्जी कमीशन की स्टडी भी है. इसमें कहा गया है कि ऐसा नहीं लगता है कि नेताजी की मौत प्लेन क्रैश में हुई थी.

किसी जापानी सिपाही के शव को नेताजी का शव बताकर जलाया गया था. उनकी अस्थियां जापान में पड़ी हैं.

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शनिवार को जारी फ़ाइलों में नेताजी के ख़ज़ाने से लेकर लड़ाई और उनके परिवार तक की बातें सामने आईं हैं.

नेताजी के ख़ज़ाने को लेकर भी कई कंट्रोवर्सी रही हैं, 1978 में यह ख़ज़ाना खोला गया था. उसकी कुछ जली-कटी फ़ोटो भी यहां दिखाई गई हैं.

15000 से अधिक पन्नों के इन दस्तावेज़ों को बारीकी से पढ़ना होगा क्योंकि नेताजी से जुड़ी हर एक सूचना महत्वपूर्ण है.

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भारत सरकार ने 1956 में जनता के दबाव में आकर शाहनवाज़ कमेटी बनाई थी, जिसमें सुभाष चंद्र बोस के बड़े भाई सुरेश चंद्र बोस भी थे.

शाहनवाज़ कमेटी ने सारे तथ्यों को देखकर लिखा था कि नेताजी प्लेन क्रैश में मारे गए थे लेकिन सुरेश बोस ने एक अलग रिपोर्ट दी थी.

रिपोर्ट में सुरेश बोस ने कहा कि "मुझे लगता है कि नेताजी रूस चले गए थे." इस रिपोर्ट को सरकार ने नहीं माना था.

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1962 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित नेहरू ने संसद में कहा था कि नेताजी की मौत प्लेन क्रैश में हो गई है, तब एक बार फिर सुरेश बोस ने पत्र से पूछा था कि कोई सीधा सपाट प्रमाण दीजिए.

तब नेहरू ने पत्र से ही उन्हें जवाब दिया था कि ऐसा कोई सबूत नहीं दे सकता, परिस्थितियां बताती हैं कि नेताजी मारे गए हैं.

(बीबीसी संवाददाता निखिल रंजन की सुभाष चंद्र बोस पर शोध कर चुके अनुज धर से बातचीत पर आधारित)

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