'पटाखों पर न रहें 'देवी-देवता'

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तमिलनाडु के शिवकाशी प्रशासन ने सलाह दी है कि पटाखा निर्माता पटाखों के पैकट पर देवी देवताओं की तस्वीरों का इस्तेमाल न करें.

लेकिन पटाखा बनाने वाले सुझाव मानने से इनकार कर रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट के उस हुक्म का हवाला दे रहे हैं जिसमें उन्हें इन तस्वीरों के इस्तेमाल की इजाज़त है.

पटाख़ा कंपनियां पहले ही सस्ते चीनी पटाखों की मार झेल रहे हैं. ज़िला राजस्व अधिकारी कार्यालय से आई सलाह उनके लिए नया सरदर्द बन गई है.

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इधर तीन स्कूली बच्चों ने पर्यावरण के आधार पर पटाखों के खिलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है जिसकी सुनवाई चल रही है.

अब हिंदूवादी संगठनों ने पटाखों के पैकट पर देवी देवताओं की तस्वीर लगाने के खिलाफ़ एक नई मुहिम छेड़ी है.

जबकि शिवकाशी में - जबसे 1924 में वहां पटाख़े बनने शुरू हुए हैं; पैकटों पर देवी देवताओं की तस्वीरों का इस्तेमाल हो रहा है.

देवता 'अपमानित'

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29 सितंबर को अखिल भारत हिंदू महासभा ने विरुधुनगर कलेक्टर के पास एक याचिका दायर की थी जिसमें पटाखों पर इन तस्वीरों को बैन करने की मांग की गई थी. इस संगठन के मुताबिक इससे धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं.

हिंदू जनजागृति मंच ने उन हिंदू देवी देवताओं की 'हिफाज़त' के लिए एक अभियान शुरू किया है जिनकी तस्वीरें शिवकाशी में बनने वाले पटाखों के पैकटों पर लगाई जाती हैं.

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हिंदू जनजागृति मंच की तमिलनाडु शाखा की समन्वयक उमा रविचंद्रन कहती हैं, "इस साल हमने एक जागरण अभियान चलाया है और शिवकाशी प्रशासन से अनुरोध किया है कि निर्माताओं को पैकटों पर देवी-देवताओं की तस्वीरें इस्तेमाल न करने दी जाएं."

उमा ने कहा, "दीवाली पर हम लक्ष्मी की पूजा करते हैं और ये विडंबना है कि दीवाली पर ही हम लक्ष्मी बम फोड़ते हैं जिससे लक्ष्मी की तस्वीर छोटे-छोटे टुकड़ों में बिखर जाती है."

हिंदू संगठन

उमा ने कहा, "ये कहने का कोई फ़ायदा नहीं कि लोग और पटाखा निर्माता अज्ञानतावश ऐसा कर रहे हैं. यही वजह है कि हमने ज़िला प्रशासन से निर्माताओं के इस चलन को बंद कराने का अनुरोध किया है."

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इस याचिका पर प्रशासन ने निर्माताओं और उनकी एसोसिएशन को पत्र जारी कर कहा है कि चूंकि इससे कुछ लोगों की भावनाएं आहत होती हैं, इसलिए इसे बंद किया जाए.

विरुधुनगर के ज़िला राजस्व अधिकारी मुथुकुमारन कहते हैं, "हमने इन संगठनों की आपत्ति पटाखा निर्माताओं को दे दी है. छोटे पटाखा निर्माताओं की एक एसोसिएशन ने इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया भी दी है."

लेकिन एक महत्वपूर्ण निर्माता एसोसिएशन तमिलनाडु फायरवर्क्स एमोर्सेस मैन्युफैक्चरर्स असोसिएशन (टीएनएफएएमए) ने अभी तक इस पर कोई प्रतिक्रिया ज़ाहिर नहीं की है.

पहले से ही कम

बहरहाल, टीएनएफएएमए का कहना है कि शिवकाशी में जबसे पटाखे बन रहे हैं तभी से पैकटों पर देवी देवताओं की तस्वीर छापने का चलन है.

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एसोसिएशन के अध्यक्ष जी अबिरुबेन कहते हैं, "हमने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला दिया है जो हमें इन तस्वीरों के इस्तेमाल की इजाज़त देता है. प्रशासन से कोई आदेश नहीं आया है. सिर्फ एक पत्र आया था जिसमें कुछ संगठनों को पटाखों पर देवी देवताओं की तस्वीरों पर आपत्ति होने की बात कही गई थी."

एक मध्यम पटाखा निर्माता ने कहा कि निर्माताओं ने खुद ही पैकेटों पर देवी देवताओं की तस्वीरें लगाना बंद कर दिया है और शिवकाशी के करीब 90 फीसदी निर्माता इसका पालन कर रहे हैं.

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इस बीच, मुथुकुमारन का कहना है कि उन्हें टीएनएफएएमए से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है और वे उम्मीद कर रहे हैं कि वे भी इस पर सहमत हो जाएंगे.

(बीबीसी संवाददाता अविनाश दत्त गर्ग से बातचीत पर आधारित)

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