करवट बदलती महाराष्ट्र की राजनीति

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महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी-शिवसेना का गठबंधन टूटने के साथ ही काँग्रेस-राष्ट्रवादी काँग्रेस पार्टी का गठजोड़ भी टूट गया है.
जहां भाजपा-शिवसेना का गठबंधन 25 साल पुराना था, वहीं कांग्रेस-राकांपा का गठजोड़ 15 साल पुराना था.
दोनों टूटने के साथ ही महाराष्ट्र में सभी राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं. राज ठाकरे की उपस्थिति के कारण अब लड़ाई पंचकोणीय हो गई है.
राजनीतिक अस्थिरता
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे सभी अनुमान बिगड़ जाएंगे. लेकिन इनमें से अधिकांश पार्टियों को चुनाव बाद एक होना ही होगा. आने वाला समय राज्य में अस्थिरता भरा होगा.

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पुणे विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के प्रोफ़ेसर राजीव घोटाले कहते हैं, ''जहां सेना-भाजपा गठबंधन में ग़ैर काँग्रेसवाद का सूत्र था वहीं राष्ट्रवादी काँग्रेस पार्टी की मूल विचारधारा काँग्रेस की ही थी. इसलिए जब भी ये दोनों गठजोड़ सत्ता में आए तो एक तरह की स्थिरता थी."
वो कहते हैं, "आने वाले समय में संभावना है कि कोई भी दल अपने बूते सत्ता हासिल नहीं कर पाएगा. इसलिए जो भी गठजोड़ होगा वो केवल समझौते के तौर पर होंगे. उनमें स्वाभाविकता नहीं होगी."

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प्रोफ़ेसर घोटाले कहते हैं, "भाजपा को रोकने के लिए शिवसेना राष्ट्रवादी कांग्रेस से हाथ मिला सकती है. वहीं एमएनएस अगर कुछ सीटें पाती है तो भाजपा उसे साथ ले सकती है. काँग्रेस व शिवसेना को मराठवाड़ा में, एनसीपी को पश्चिम महाराष्ट्र में और भाजपा को विदर्भ में फ़ायदा हो सकता है."
मतदाताओं का विकल्प
पुणे के फ़र्गुसन कॉलेज के वाइस प्रिंसिपल और राजनीति विज्ञान के प्रोफ़ेसर प्रकाश पवार का दावा है, "यह तो तय है कि कोई भी दल बहुमत हासिल नहीं करेगा. इस घटना के कारण महागठबंधन के लिए सत्ता में आने का अवसर चला गया है. अब लोगों के सामने यह सवाल है कि पुराने नाकारे लोगों को ही वे चुनें या इन आपस में झगडने वालों को चुनें.''
उन्होंने कहा, "चुनाव परिणाम के बाद विधायकों का दल-बदल ज़ोरों पर हो सकती है. चाहे कोई भी पार्टी आपस में समझौता कर सत्ता हासिल करे. लेकिन मतदाताओं के पास विकल्प नहीं रहा. इस तरह एक तरह से यह लोकतंत्र का मखौल हो गया है."

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प्रोफ़ेसर पवार का आरोप है कि एमएनएस जैसी पार्टियां अब केवल 15-20 विधायकों के बल पर सौदेबाज़ी कर सकती हैं.
घोटाले और पवार दोनों मानते है कि आनेवाले समय में राज्य में अस्थिरता होगी, जिसका रज्य के प्रशासन और शासन पर असर होगा.
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